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इंडिया टीवी ने अपनी ही एंकर के खिलाफ ठोंका दो करोड़ का मुकदमा

देश के बड़े पत्रकारों में शुमार रजत शर्मा का हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया टीवी’ एक बार फिर मैनेजमेंट-एम्पलॉई के बीच होने वाले विवाद की वजह से चर्चा में है। इस बार इंडिया टीवी प्रबंधन ने अपनी एक दशक से भी अधिक पुरानी एंकर को कोर्ट में घसीटा है।

मामला ये है कि इंडिया टीवी में करीब 14 साल से कार्यरत एंकर सुचरिता कुकरेती ने यहां से अलविदा कहकर ‘रिपब्लिक टीवी’ के नए हिंदी चैनल ‘रिपब्लिक भारत’ को जॉइन कर लिया है। ऐसे में इंडिया टीवी प्रबंधन ने उन पर कॉन्ट्रै्क्ट तोड़ने का आरोप लगाते हुए दो करोड़ के हर्जाने की मांग की थी। इसके लिए न्यूज चैनल ने 25 जनवरी को दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। साथ ही मांग की थी कि उक्त एंकर को नए चैनल में जाने से रोका जाए।

शुरुआती स्तर पर हाई कोर्ट ने इसे मानवीय स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करार देते हुए इंडिया टीवी की एंकर को रोकने की मांग खारिज कर दी है। मामले की अगली तारीख 11 जुलाई है।

इंडिया टीवी का तर्क था कि वो अपने एंकर्स को ब्रैंड बनाता है। इसमें करोड़ों खर्च होते हैं। उसे इसी खर्च का हर्जाना चाहिए।‘ सुचरिता का इंडिया टीवी के साथ नवंबर 2019 तक का कॉन्ट्रैक्ट था, ऐसे में इंडिया टीवी’ ने हाई कोर्ट के सामने ये पेशकश भी कर दी कि वह कुकरेती को 30 नवंबर 2019 तक सैलरी देने को तैयार है, मगर वे पर्दे के पीछे काम करें। वो किसी भी सूरत में किसी भी अन्य चैनल की स्क्रीन पर एंकरिंग नहीं कर सकती हैं।

इस बारे में ‘इंडिया टीवी’ के एजीएम (एचआर और लीगल) राहुल खन्ना का कहना था, ‘सुचरिता कुकरेती ने वर्ष 2004 में ‘इंडिया टीवी’ में बतौर फ्रेशर जॉइन किया था। इस दौरान चैनल ने कुकरेती को पद, प्रतिष्ठा और सफल करियर बनाने में अपनी तरफ से हरसंभव काम किया है। इस अवधि के दौरान वह अपने कॉन्ट्रैक्ट को रिन्यू कराती रही हैं और उनका कॉन्ट्रैक्ट अब नवंबर 2019 में खत्म हो रहा है। कुकरेती ने अनुबंध की अवधि के दौरान किसी भी प्रतिस्पर्धी न्यूज चैनल या मीडिया हाउस को जॉइन नहीं करने का वचन दिया था।’

दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजीव सहाय एंडला ने अपने आर्डर में कुकरेती को बड़ी राहत देते हुए कहा, ‘ मेरी नजर में इस मामले में रोक लगाने का कोई आधार नहीं है। रोक का मतलब उस एंकर को अपनी विशेषज्ञता का वो काम करने से रोकना होगा जिसे वो पिछले 14 सालों से करती आ रही है। इ्ंडिया टीवी ने उस पर 30 नवंबर 2019 तक ऑन एयर होने से रोक लगाने की मांग की है। ऐसा कोई भी आदेश पिछले 14 सालों में उस एंकर द्वारा अर्जित प्रतिष्ठा पर चोट करने जैसा होगा। उसे खत्म करने जैसा होगा। एक एंकर को स्क्रीन के पीछे रखकर काम करने पर मजबूर करना उसकी क्षमता, प्रशिक्षण और बुद्धिमत्ता के खिलाफ होगा।

हाई कोर्ट ने इंडिया टीवी के एंकर्स को ब्रैंड बनाने में हुए भारी खर्च वाले तर्क के बारे में कहा है, ‘अगर एंकर कांट्रैक्ट की अवधि पूरी होने के बाद किसी दूसरे चैनल में चली जाती है, तब वो क्या करेगा? फिर उसके एंकर को ब्रैंड बनाने के खर्च का क्या होगा? फर्क सिर्फ इतना है कि एंकर 11 महीने पहले चैनल को छोड़़कर जा रही है। अगर 11 महीने बाद यानी कांट्रैक्ट की अवधि पूरा होने पर वो चैनल छोड़ेगी तो इंडिया टीवी उसे रोक भी नही सकेगा।’ दिल्ली हाई कोर्ट ने इस आदेश में संविधान के अनुच्छेद 21 का भी जिक्र किया है जो जीवन की रक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जिसमें मनपसंद व्यवसाय की स्वतंत्रता भी शामिल है।

वैसे इंडिया टीवी के अपनी एंकर के प्रति इतने गुस्से के पीछे की वजह ये भी बताई जा रही है कि एंकर ने चैनल प्रबंधन को धोखे में रखते हुए अपनी पारिवारिक जरूरतों के लिए छुट्टी की मांग की थी, पर इस दौरान उन्होंने प्रबंधन को बिना सूचित किए दूसरे चैनल के साथ अपनी पारी शुरू कर दी, जिससे चैनल प्रबंधन अपने को ठगा महसूस कर रहा है।

सुचरिता कुकरेती ने दिल्ली के वेंकटेश्वर कॉलेज से अंग्रेज़ी साहित्य में शिक्षा प्राप्त की लेकिन पत्रकारिता में रुझान ने उनके करिअर की दिशा बदल दी। सुचरिता अभिनय की दुनिया से भी जुड़ी रहीं और उन्होंने ड्रामाटेक के साथ मिलकर जहां नाटकों में अभिनय किया वहीं ज़ी टीवी और सब टीवी पर धारावाहिकों में भी काम किया।

स्पॉट रिपोर्टिंग और लाइव इवेंट की रिपोर्टिंग में महारथ हासिल करने के बाद उन्होंने इंडिया टीवी पर ईवनिंग न्यूज़ और महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर आधारित कई शो किए।

साभार-http://www.samachar4media.com/ से



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