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भारतीय मीडिया पाकिस्तान का भोंपू

पाकिस्तान की हरकतों से कुछ सीखें हमारे टीवी चैनल और धर्म निरपेक्षता का ढिंढोरा पीटने वाले।

सवाल यह नहीं है कि पाकिस्तान में जाकर हमारे गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने क्या कहा, सवाल यह है कि राजनाथ सिंह के साथ पाकिस्तान में क्या हुआ? सब जानते हैं कि राजनाथ सिंह इस्लामाबाद में आयोजित सार्क देशों के गृहमंत्रियों के सम्मेलन में भाग लेने गए थे। इस सम्मेलन का मकसद भारत और पाकिस्तान के विवादों से नहीं था। लेकिन इसके बावजूद भी राजनाथ सिंह के साथ पाकिस्तान में एक दुश्मन जैसा व्यवहार किया गया। सिंह के साथ जो व्यवहार हुआ, उससे हमारे टीवी चैनलों और धर्म निरपेक्षता का ढिंढोरा पीटने वालों को सबक लेना चाहिए।

गृहमंंत्रियों के सम्मेलन के दौरान जब राजनाथ सिंह बोलने लगे तो पाकिस्तान के सरकारी टीवी ने प्रसारण ही रोक दिया। इसके विपरीत हमारे देश के टीवी चैनल वाले पाकिस्तान के नेताओं और रिटायर फौजी अफसरों को बैठाकर भारत के खिलाफ जहर उगलने का पूरा मौका देते हैं। ऐसे टीवी चैनल वालों को अब शर्मसार होना चाहिए। समझ में नहीं आता कि हमारे चैनल वाले पाकिस्तान के व्यक्तियों को क्यों बैठाते हैं? क्या इन चैनल वालों का उद्देश्य भारत विरोधी है? जब पाकिस्तान का सरकारी टीवी हमारे गृहमंत्री के भाषण का प्रसारण नहीं करता है तो फिर हमारे टीवी चैनल वाले पाकिस्तान के नेताओं को अपने स्टूडियो में बुलाकर क्यों देश विरोधी काम करते हैं? 4 अगस्त को इस्लामाबाद में दोपहर का भोजन राजनाथ सिंह को पाकिस्तान के गृहमंत्री निसार अली खान के साथ करना था, लेकिन इस भोज में निसार अली आए ही नहीं।

एक तरह से पाकिस्तान ने हमारे गृहमंत्री का अपमान किया है। राजनाथ सिंह के समक्ष इतने तनाव पूर्ण हालात कर दिए गए कि उन्हें निर्धारित समय से चार घंटे पहले ही इस्लामाबाद को छोडऩा पड़ा। हमारे देश में जो लोग धर्म निरपेक्षता का ढिंढोरा पीटते हैं वे बताएं कि राजनाथ सिंह के साथ पाकिस्तान में दुश्मनों जैसा व्यवहार क्यों किया गया? अब कोई भी लेखक अथवा साहित्यकार अपना पुरस्कार नहीं लौटा रहा है। पुरस्कार लौटाना तो दूर पाकिस्तान की निंदा तक नहीं की जा रही है। क्या ऐसे लोग पाकिस्तान की निंदा करने से भी डर रहे हैं? हमारे गृहमंत्री के खिलाफ पूरा पाकिस्तान एकजुट हो गया है और हम भारत में पाकिस्तान के खिलाफ एकजुट नहीं हो पा रहे हैं। क्या अब समय नहीं आ गया कि जब हमें भी पाकिस्तान के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए। जब हमारे गृहमंत्री को अपमानित किया जाता है तो फिर हम पाकिस्तान के राजनेताओं, कलाकारों साहित्यकारों, फिल्मकारों आदि को बुलाकर भारत में क्यों सम्मान देते हैं? जो लोग धर्मनिरपेक्षता की आड़ लेकर पाकिस्तान के लोगों को भारत में बुलाते हैं, उन्हें राजनाथ सिंह की घटना से कुछ सीखना चाहिए।

राज्यसभा में दिखी एकता:
5 अगस्त को राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद, बीएसपी अध्यक्ष मायावती, सपा के सांसद रामगोपाल यादव, जेडीयू सांसद शरद यादव आदि ने पाकिस्तान में राजनाथ सिंह के साथ हुए व्यवहार को लेकर पाकिस्तान की निंदा की। देखना है कि इस निंदा का पाकिस्तान पर कितना असर होता है।

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