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भारत की विश्व विरासत-यूनेस्को की सूची में शामिल

कोटा के विख्यात लेखक ,पत्रकार एवं पूर्व संयुक्त निदेशक जनसम्पर्क विभाग राजस्थान सरकार तथा अनुज कुमार कुच्छल इंजीनियर भारतीय रेलवे,कोटा द्वारा संयुक्त रूप लिखित पुस्तक “भारत की विश्व विरासत -यूनेस्को की सूची में शामिल” देश भर के पर्यटकों के लिए एक गाइड एवं एन्साइक्लोपीडिया है। सम्भवत इस विषय पर दोनों लेखकों की अद्यतन यह पहली पुस्तक है।

पुस्तक का मुख पृष्ठ आकर्षक है। पुस्तक में चित्रों के साथ 38 खण्डों में विभक्त कर 203 पेज में देश की विरासत का ऐतिहासिक एवं पर्यटन महत्व को संक्षिप्त रूप में ज्ञानवर्धक जानकारियों के साथ प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक को 38 खंडों में विभक्त कर विषय वस्तु को गागर में सागर बनाकर भर दिया है। भारत में यूनेस्को द्वारा घोषित प्राकृतिक श्रेणी में शामिल 7, सांस्कृतिक श्रेणी की 30 एवं मिश्रित श्रेणी की एक कुल 38 विरासतों को शामिल किया गया हैं। इन्हें ही पुस्तक लेखन का आधार बनाया गया है। पुस्तक का प्राक्कथन कुम्भा पुरस्कार प्राप्त इतिहासविद डॉ. हुकम चंद जैन ,सेवनिवृत प्राचार्य महाविद्यायल कोटा द्वारा लिखा गया है। सारांश परिचय भूगोल के गोल्डमेडलिस्ट प्रमोद कुमार सिंघल द्वारा आलेखित किया गया है जो बूंदी राजकीय महाविद्यालय में पूर्व प्राचार्य रह चुके हैं। पुस्तक का प्रकाशन चौड़ा रास्ता जयपुर स्थित प्रकाशक साहित्यागार द्वारा किया गया है।

हिंदी भाषी पर्यटकों के लिए देश भर की विरासत की एक मार्गदर्शिका के रूप में कम्पीटिशन छात्रों के ज्ञानवर्धन को दृष्टिगत रखते हुए एवं शोधार्थियों के लिए उपयोगी यह पुस्तक देश भर में बहुउपयोगी साबित होगी।

पुस्तक में असम के मानस जंगली राष्ट्रीय अभ्यारण्य , काजीरंगा राष्ट्रीय पार्क , बिहार के बोध गया में महाबोधि मंदिर , पुरातात्विक स्थल नालंदा विश्वविधयालय के बारे में सम्पूर्ण जानकारी है जबकि चंडीगढ के केपिटल बिलडिंग कॉम्प्लेक्स ली कोबुर्जिए की वास्तुकला को अंकित किए गया है। दिल्ली की क़ुतुब मीनार सहित अन्य ऐतिहासिक स्मारक हुमायूं का मक़बरा , लालकिले के बारे में ऐतिहासिक महत्व के साथ परिचय है।इसी तरह गुजरात के अहमदाबाद का ऐतिहासिक नगर ,चम्पानेर पावागढ़ पुरातात्विक पार्क , रानी की वाव , गोवा के गिरजाघर एव मठ ,, हिमाचल का ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय पार्क सुरक्षित क्षेत्र ,कर्नाटक के हप्पी स्मारक समूह ,पत्तदकल समूह , महाराष्ट्र की अजंता , एलोरा ,एलिफेंटा गुफाएं , छत्रपति शिवाजी टर्मिनल , विक्टोरिया गोथिक और आर्ट डेको असेम्ब्ल , मध्य्प्रदेश के खजुराहों स्मारक समूह , साँची के बौद्ध स्मारक , भीम टेका के चट्टानी निवास के बारे में जानकारी है। ओडिशा के कोणार्क का सूर्य मंदिर , पश्चिमी बंगाल का सुन्दर वन राष्ट्रीय उद्यान , भारत के पर्वतीय रेलवे – नीलगिरि पर्वतीय रेलवे , दार्जिलिंग , कालका- शिमला रेलवे का ज़िक्र है । पश्चिमी घाट ( कर्नाटक ,केरल ,तमिलनाडु , महाराष्ट्र ) , राजस्थान के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान ,, जयपुर के जंतर मंतर , जयपुर की चार दीवारी , राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग आमेर ,चित्तोड़ , गागरोन ,जैसलमेर , कुम्भलगढ़ , गागरोन ,रणथम्भोर दुर्ग के हवाले है। सिक्किम का कंचन जंघा राष्ट्रीय पार्क रिज़र्व बायोस्फियर , तमिलनाडु के महान जीवित चोल मंदिर , महबलीपुरम के स्मारक समूह , उत्तर प्रदेश में आगरा का ताजमहल , लाल क़िला , फतेहपुर सीकरी के वर्णन है जबकि उत्तराखण्ड का नंदादेवी एवं फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क का हवाला है । पुस्तक को विश्व धरोहरों के पर्यटन महत्व की दृष्टि से अंतर्राष्टीर्य स्तर पर बहुउपयोगी बनाने का सफल प्रयास रहा है , जिसके लिए लेखकगण बधाई के पात्र है ।

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