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इंदिरा गाँधी की नजर में ऐसे चढ़े थे कमलनाथ

मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री की कुर्सी सम्हालने वाले कमलनाथ का जन्म 18 नवंबर 1946 में कानपुर में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा दून स्कूल से ली। इसके बाद उन्होंने कोलकाता यूनिवर्सिटी के सेंट जेवियर कॉलेज से बी कॉम से ग्रेजुएशन किया। उनके पिता का नाम महेंद्रनाथ और माता का लीला है। कहा जाता है कि दून स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही वह संजय गांधी के संपर्क में आए थे और वहीं से राजनीति में आने की नींव तैयार हुई थी। राजनीति में आने से पहले उन्होंने सेंट जेवियर कॉलेज कोलकाता से स्नातक किया। संजय गांधी और कमलनाथ की दोस्ती स्कूल के जमाने से मशहूर थी। दोनों का सपना था देश में छोटी कार का बड़े पैमाने पर उत्पादन करना। यूथ कांग्रेस के दिनों में संजय गांधी ने कमलनाथ को पश्चिम बंगाल में सिद्धार्थ शंकर रे और प्रिय रंजन दासमुंशी को टक्कर देने के लिए उतारा था। इमर्जेंसी के बाद संजय गांधी को गिरफ्तार किया गया।

पहली बार 1980 में 7वीं लोकसभा के कमलनाथ को चुना गया था। इसके बाद वे 1985 में 8वीं लोकसभा के लिए चुने गए। 1989 में 9वीं लोकसभा, 1991 में 10वीं लोकसभा के लिए चुने गए और उन्हें यूनियन काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स में जगह मिली। कमलनाथ पर्यावरण व वन मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। 1995 से 1996 तक केंद्र सरकार में उन्होंने कपड़ा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पदभार संभाला था। इसके बाद कमलनाथ ने 1998 में 12वीं लोकसभा का चुनाव जीता था। 1999 में 13वीं लोकसभा चुनाव जीते। 2004 में 14वीं लोकसभा चुनाव जीते और 2004 से 2009 तक केंद्र सरकार मे वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाले।

2011 में उन्हें शहरी विकास मंत्री का पदभार सौंपा गया। 2012 में उन्होंने संसदीय कार्य मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाली। दिसंबर 2012 में उन्हें योजना आयोग का सदस्य भी बनाया गया। उन्हें वर्तमान यानी 16वीं लोकसभा में प्रोटेम स्पीकर चुना गया था। बताते चलें कि प्रोटेम स्पीकर उसे ही बनाया जाता है जो सबसे वरिष्ठ यानी वर्तमान में सबसे अधिक समय तक संसद सदस्य रहा हो। कमलनाथ मध्यप्रदेश के छिदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र से नौ बार संसद सदस्य चुने जा चुके हैं। मई 2018 में उन्हें मध्यप्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था।

1997 में जनता लहर में जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस 40 में से 39 सीटों पर हार गई थी और एकमात्र सीट छिंदवाड़ा से चंदूलाल चंद्राकर जीते थे। 1980 में इंदिरा गांधी और संजय गाँधी ने मध्यप्रदेश की इस सबसे सुरक्षित सीट से कमलनाथ को टिकट देकर उनकी राजनीतिक यात्रा को शानदार पड़ाव दे दिया था। 2001 से 2004 तक कमलनाथ कांग्रेस पार्टी के महासचिव पद पर बने रहे।

1996 में जब कमलनाथ पर हवाला कांड के आरोप लगे थे तब पार्टी ने छिंदवाड़ा से उनकी पत्नी अलकानाथ को टिकट देकर उतारा था, वो जीत गई थीं लेकिन अगले साल हुए उपचुनाव में कमलनाथ को हार का मुंह देखना पड़ा था. वे छिंदवाड़ा से केवल एक ही बार हारे हैं. वैसे इस हार के पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प बताई जाती है. दरअसल, कमलनाथ चुनाव हार गए थे तो उन्हें तुगलक लेन पर स्थित मिला हुआ बंगला खाली करने का नोटिस मिला, पहले उन्होंने कोशिश की वह बंगला उनकी पत्नी के नाम अलॉट हो जाए लेकिन नियमों के मुताबिक पहली बार चुनाव जीतने वाले लोगों को उतना बड़ा बंगला अलॉट नहीं किया जा सकता था, इसलिए एक साल बाद ही जब हवाला कांड की बात ठंडी हुई तो कमलनाथ ने अपनी पत्नी का इस्तीफ़ा करा दिया. लेकिन उपचुनाव में कमलनाथ को सुंदर लाल पटवा ने हरा दिया था.

कमलनाथ ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुरेश पचौरी जैसे प्रदेश के सभी दिग्गज नेताओं को एक साथ लाने का काम किया, जिसके चलते इस बार हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी में एकजुटता दिखी। समाज के हर तबके के लिए योजनाओं के कारण चौहान की लोकप्रियता से वाकिफ चुनाव अभियान की शुरूआत में ही कमलनाथ ने भाजपा पर हमला शुरू कर दिया। अभियान के जोर पकड़ने पर पार्टी की ओर मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए राज्य कांग्रेस ने ‘वक्त है बदलाव का’ नारा दिया।

कमलनाथ के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस ने अपने चुनावी अभियान में चौहान के उन वादों पर फोकस किया जिन्हें पूरा नहीं किया जा सका। पार्टी ने चौहान को घोषणावीर बताया जिसके बाद सरकार द्वारा घोषित योजनाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गयी। कमलनाथ का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम महेंद्रनाथ और माता का लीला है। कमलनाथ देहरादून स्थित दून स्कूल के छात्र रहे हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने सेंट जेवियर कॉलेज कोलकाता से स्नातक किया।

मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ के नाम की घोषणा हो चुकी है। कमलनाथ कांग्रेस के चुनिंदा दिग्गज नेताओं में से हैं जो गांधी परिवार की तीन पीढ़ियों के साथ काम कर चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उन्हें अपना तीसरा बेटा मानती थीं तो उनके छोटे बेटे संजय गांधी के वह स्कूली दोस्त थे। इसी वजह से वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भी काफी करीबी माने जाते हैं। कहा जाता है कि संजय गांधी की खातिर एक बार उन्होंने जज के ऊपर कागज का गोला तक फेंक दिया था। हालांकि इसके बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।

कमलनाथ तब संजय गांधी के लिए जज के साथ बदतमीजी कर बैठे थे। कहा जाता है कि उन्होंने जज के ऊपर कागज का गोला तक फेंक दिया था। हालांकि इसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल जाना पड़ा। यह भी कहा जाता है कि तब इंदिरा गांधी की नजरों में कमलनाथ का कद काफी बढ़ गया था।

उनकी पत्नी अलका नाथ हैं जिनसे उन्हें दो संतान हैं। कमलनाथ बिजनस घराने से ताल्लुक रखते हैं। वह खुद भी एक बिजनस टायकून हैं। उनका बिजनस रियल एस्टेट, ऐविएशन, हॉस्पिटलिटी और एजुकेशन के क्षेत्र में फैला हुआ है। वह देश के शीर्ष प्रबंधन संस्थान आईएमटी गाजियाबाद के डायरेक्टर हैं और करीब 23 कंपनियों के बोर्ड मेंबर हैं। ये कारोबार उनके दो बेटे नकुलनाथ और बकुलनाथ संभालते हैं।

क्यूबा क्रांति के जनक फिदेल कास्त्रो से कमलनाथ काफी प्रभावित थे। उनके भारत आगमन में कमलनाथ ने उनके साथ तस्वीर क्लिक कराई थी। कमलनाथ का नाम 84 के सिख दंगों में भी आया था। कमलनाथ पर आरोप है कि वह 01 नवंबर 1984 को नई दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज में तब मौजूद थे जब भीड़ ने दो सिखों को जिंदा जला दिया था।

कमलनाथ के फेजबुक पेज पर एक तस्वीर है जिसमें वह राहुल गांधी और राजीव गांधी के साथ इंदिरा गांधी के पार्थिव शरीर को कंधा दे रहे हैं। कमलनाथ उस समय काफी भावुक हो गए थे। शांत और शालीन माने जाने वाले कमलनाथ कार्यकर्ताओं में भी काफी लोकप्रिय हैं। कहा जाता है कि कमलनाथ का दरवाजा कांग्रेस और उसके कार्यकर्ताओं के लिए आधी रात को भी खुला रहता है।

कमलनाथ के नाम की आधिकारिक घोषणा करने से पहले राहुल गांधी ने अपने ट्विटर हैंडल से ज्योतिरादित्य और कमलनाथ के साथ यह तस्वीर शेयर की थी। इसमें उन्होंने एक संदेश देने की भी कोशिश की। इसमें राहुल ने लियो टॉलस्टॉय का एक वाक्य भी लिखा, ‘समय और धैर्य, दो ताकतवर योद्धा।’



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