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‘अंतरराष्ट्रीय कर्पूरचंद्र कुलिश पुरस्कार ‘ प्रदान किये गए

राजस्थान पत्रिका’ के संस्थापक कर्पूरचंद्र कुलिश की याद में उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए दिए जाने वाले ‘अंतरराष्ट्रीय कर्पूरचंद्र कुलिश’ पुरस्कार का वितरण समारोह सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। विजेताओं को सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सम्मानित किया, तो वहीं कार्यक्रम को पत्रिका के समूह संपादक गुलाब कोठारी ने भी संबोधित किया।

2016 का पुरस्कार घाना के पत्रकार अनस अरेमेयाव अनस को उनकी स्टोरी ‘अनस फ्लोर्स डेरी’ के लिए मिला है। वहीं 2017 का पुरस्कार मलेशिया के इआन यी को उनकी स्टोरी ‘स्टूडेंट्स ट्रैफिक्ड’ के लिए दिया गया।

2016 के मेरिट अवॉर्ड विजेता-

– ‘मलयाला मनोरमा’ के संतोष जॉन थूवल को उनकी रिपोर्ट’अ सर्च फॉर द ड्रॉप टू अवेकन द लैंड ऑफ 44 रिवर्स’ के लिए दिया गया।

– मलेशिया के ‘द स्टार मीडिया’ समूह के इआन यी और उनकी टीम को ‘प्रीडेटर इन माय फोन स्टोरी’ के लिए दिया गया।

– केन्या के ‘द स्टैंडर्ड ऑन संडे’ के पैट्रिक मायोयो और जोसेफ ओडिन्हो को उनकी स्टोरी ‘रेलवे फर्म अंडर प्रोब ओवर यूज ऑफ वर्ल्ड बैंक मिलियंस’ के लिए दिया गया।

2017 के मेरिट अवॉर्ड विजेता

– दुबई के ‘एक्सप्रेस गल्फ न्यूज’ के पत्रकार मजहर फारुकी की स्टोरी ‘वी आर अ बोगस फर्म यट वी गॉट अन आईएसओ सर्टिफिकेट’ का चयन हुआ है।

इस दौरान सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए जनरल बिपिन रावत ने कहा, ‘आपने पत्रकारिता के क्षेत्र में बड़े प्रतिमान गढ़े हैं। पत्रिका ने सेना के साथ तृष्णा कैम्पेन किया था। सैनिक हाथ में बंदूक लेकर सीमा पर तैनात होता है और पत्रकार हाथ में कलम लेकर देश की सुरक्षा करता है। हम सब मीडिया की भूमिका और जिम्मेदारी से परिचित हैं। स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतांत्रिक देश के लिए जरूरी है, लेकिन पत्रकारिता करते समय सिद्धांतों का ध्यान रखना चाहिए।’

कार्यक्रम को राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘पुरस्कार पाने वाले पत्रकारों का मैं स्वागत करता हूं। इनका कार्य स्तुत्य है। इनसे हमें सीखना चाहिए कि खुद को बीज की तरह बनाकर समाज के लिए वृक्ष बनाया। वाल्तेयर के शब्द पर हम आज भी चलते हैं- या एशु सुप्तेषु जागर्ति। विश्वसनीयता ही पत्रिका की शक्ति है। हमारी खबरों को सच माना जाता है। पत्रिका के अभियान के बाद राजस्थान सरकार को वापस लेना पड़ा काला कानून। हमनें अभियान चलाया ‘जब तक काला, तब तक ताला।’ ‘आज मीडिया जनहित की जगह सिर्फ मनोरंजन की बात करने लगा है। पत्रिका के लिए जनहित ही सबसे प्रमुख है। पत्रिका परिवार का हर पत्रकार स्वयं में पत्रिका है। पत्रकारिता के सामने बहुत बड़ी चुनौती है। उस पर खरा उतरना होगा। पत्रिका के पास विश्वसनीयता की शक्ति है, हमारी खबरों को अदालतें रिट मान लेती हैं।’



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