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इरफान ने पूछा, मासूमों का खूनबहाने वालों पर चुप क्यों है मुसलमान?

इरफान खान ने रमजान के महीने में कुर्बानी के खिलाफ बोलकर विवाद खड़ा करने के बाद अब बांग्‍लादेश के ढाका में हुए हमलों की निंदा की है। आतंकवादियों ने दो दिन पहले ढाका के एक रेस्‍तरां पर हमला कर 20 लोगों की जान ले ली थी। इरफान ने सोशल मीडिया पर धमाके के पीड़‍ितों के लिए संवेदना जाहिर की। उन्‍होंने ऐसी हरकत करने वाले आतंकियों को आड़े हाथों लेते हुए इस्‍लाम का नाम खराब करने की आलोचना की। इरफान ने मुस्लिम समुदाय की चुप्‍पी पर सवाल भी उठाए। इरफान ने फेसबुक पर लिखा, ”बचपन में मज़हब के बारे में कहा गया था कि आपका पड़ोसी भूखा हो तो आपको उसको शामिल किए बिना अकेले खाना नहीं खाना चाहिए।

बांग्‍लादेश की खबर सुनकर अंदर अजीब वहशत का सन्‍नाटा है। कुरान की आयतें ना जानने की वजह से रमजान के महीने में लोगाें को कत्‍ल कर दिया गया। हादसा एक जगह होता है, बदनाम इस्‍लाम और पूरी दुनिया का मुसलमान होता है। वो इस्‍लाम जिसकी बुनियाद ही अमन, रहम और दूसरों का दर्द महसूस करना है। ऐसे में क्‍या मुसलमान चुप बैठा रहे और मज़हब को बदनाम होने दे? या वो खुद इस्‍लाम के सही मायने को समझे और दूसरों को बताए, कि जुल्‍म और कत्‍लोंघरात (नरसंहार) करना इस्‍लाम नहीं है।”

बकरों की कुरबानी पर कहा, किसी की जान लेकर पुण्य कैसे मिलेगा?

इसके पहले इसफान ने बकरीद पर बकरों की कुरबानी पर भी सवाल उठाते हुए कहा था कि ‘कुर्बानी का असली मतलब अपनी कोई प्यारी चीज कुर्बान करना होता है, ऐसी चीज जिससे आपका कोई रिश्ता जुड़ा हो जो आपको सबसे ज्यादा पसंद हो। लिहाजा इरफान के मुताबिक ये गलत है कि ईद से दो दिन पहले बकरा खरीद लें और उसकी कुर्बानी दी जाए। जब आपको उन बकरों से कोई लेना-देना नहीं है तो वो कुर्बानी कहां से हुई? उन्होंने कहा कि इससे कौन-सी दुआ कुबूल होती है? हर आदमी अपने दिल से पूछे कि किसी और की जान लेने से उसको कैसे पुण्य मिल जाएगा।

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