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आईएस आतंकवादियों की गिरफ्तारी भयभीत करने वाला

निश्चित रुप से इस खबर से देशभर में भय और सनसनाहट का माहौल बना हुआ है। यह पहली बार है जब देश में इस्लामी स्टेट यानी आईएसआईएस के दो संदिग्ध आतंकवादी पकड़े गए हैं। जी हां, गुजरात पुलिस की माने तो दोनों आतंकवादियों को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वे अलग-अलग विस्फोटक बनाने में लगे हुए थे। उनके पास से विस्फोटक सामग्रियों के अलावा जिहादी साहित्य बरामद किए गए हैं। जो कुछ इनसे पूछताछ के बारे में गुजरात के आतंकवाद निरोधक दस्ते ने बताया है उसके अनुसार ये चोटिला स्थिज चामुंडा मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों पर हमला करने की योजना बना चुके थे। साथ ही ये अन्य जगहों पर रासायनिक हमले की योजना भी बना रहे थे। कहने की आवश्यकता नहीं कि इनकी योजना कितनी खतरनाक थी। मजे की बात देखिए कि पकड़े गए वसीम और नईम दोनों सगे भाई हैं तथा इनके पिता आरिफ रमोड़िया जिला स्तर के क्रिकेट अंपायर भी है। पिता का कहना है कि दोनों की गतिविधियों के बारे उनको कोई जानकारी नहीं है। संभव है पिता सच बोेले रहे हों, क्योंकि कोई भारतीय पिता अपने बेटे को इस तरह आतंकवादी बनते नहीं देखना चाहेगा। किंतु गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता यदि कई महीनों से इन पर नजर रख रहा था और पुख्ता सूचना और सबूत के बाद गिरफ्तार किया है तो इस समय हमारे पास इसे सच स्वीकारना ही होगा।

जबसे यह खबर आई कि आईएस ने दक्षिण एशिया के लिए अपना कमाडर नियुक्त कर दिया है और वह यहां गतिविधियां चलाने की कोशिश में है तब से ही आतंकवाद के जानकार भारत को लेकर चिंतित थे। हालांकि अभी तक आईएस से प्रभावित होकर देश से भागने वाले के बारे में सूचनाएं थीं, कुछ युवक भागते हुए पकड़े गए…..कई सोशल मीडिया के माध्यम से आईएस का प्रचार करते तथा उसके लिए युवाओं का मानस बदलने के काम में लगे भी पकड़ में आए। पिछले माह एनआईए ने एक केरल निवासी को भी आईएस के संदिग्ध आतंकी के तौर पर गिरफ्तार किया था तथा पिछले वर्ष राजस्थान के आतंकवादी निरोधक दस्ते ने सीकर जिले से आईएस के एक ऑपरेटिव को गिरफ्तार किया था। इस पर आतंकवादी संगठन को धन स्थानांतरित करने का आरोप लगा है। इस प्रकार आईएस का किसी तरह हमारे यहां विस्तार हो रहा है यह तो स्पष्ट लग रहा था किंतु बाजाब्ता योजना बनाकर हमला करने वाले आईएस के आतंकवादी हमारी जमीन पर पैदा हो चुके हैं ऐसी सूचना पहली बार मिल रही है। जैसा पुलिस बता रही है ये दोनों भाई लगातार देश के बाहर आईएसआईएस आतंकवादियों के साथ स्काइप, ट्विटर और सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों के जरिए संपर्क में थे। इसके अनुसार दोनों आईएस के प्रचारक अब्दुस सामी कासमी से संबंध बनाए हुए थे।
हमारे पड़ोस बंगलादेश में आईएस का हमला हो चुका है और काफी लोगों की पकड़ धकड़ हुई है। हाल ही में पाकिस्तान में सूफी दरगाह पर हुए बड़े आत्मघाती हमलों की जिम्मेवारी आईएस ने ली थी। इसे देखते हुए हमारी चिंता यह थी कि ये कहीं हमारे यहां भी न पहुंच जाए। हालांकि कश्मीर घाटी में आईएस के झंडे लहराते हुए दिखने के बावजूद वहां भी अभी तक आईएस की किसी गतिविधि की सूचना नहीं है। इस तरह गुजरात में हुई गिरफ्तारी भारत के लिए आसन्न खतरे का संदेश है जिसके बाद पूर्व से कहीं ज्याद चिंता करने और चौकन्ना होने की आवश्यकता है। इस तरह के आतंकवावदियों को लोन वुल्फ कहते हैं। इनका सीधा संगठन से रिश्ता हो, या संगठन की योजना से ये हमला करने आवश्यक नहीं। उससे प्रभावित होकर अकेले योजना बनाकर ये हमला करते हैं। यानी जिस तरह भेड़िया दवे पांव आकर अकेले हमला करता है वैसे ही ये करते हैं। दुनिया में ऐसे कई हमले हो चुके हैं। फ्रांस के नीस शहर का हमला हम भूले नहीं होंगे। पिछले वर्ष फ्रांस के लोग 14 जुलाई की रात बास्तिल के पतन की वर्षगांठ के जश्न में थे और एक आतंकवादी ट्रक लेकर घुसा तथा लोगों को रौंदता चला गया। 90 लोग मारे गए तथा 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। जश्न सेकेण्डांें में मातम में बदल गया। इसी तरह 13 जून को अमेरिका के फ्लोरिडा में समलैंगिक पल्स नाइट क्लब में एक बंदूकधारी ने हमला कर 49 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। उसने तो पुलिस को फोन करके कहा कि मैं आईएस का समर्थक हूं।

ऐसे और कई हमलों का यहा जिक्र किया जा सकता है। यह आईएस की नई रणनीति है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है। सितंबर, 2014 में इस्लामिक स्टेट के मुख्य प्रवक्ता अबू मोहम्मद अल-अदनानी ने अपने एक भाषण में इस्लामिक स्टेट के समर्थकों से यह अपील की थी कि वे अब अपने स्तर पर हमले करें। यानी आप अकेले निजी तौर पर हमले करने की तैयारी करें। अदनानी ने अपने भाषण में कहा था कि जो कोई भी हथियार आपके हाथ आए, उसी से हमला बोल दें। उसने कहा था कि अगर तुम्हें बम या गोली नहीं मिलते तो उनके सिर को पत्थर से फोड़ दो, या उन्हें छुरा घोंप दो, या उन पर अपनी कार चढ़ा दो, या उन्हें किसी ऊंची जगह से फेंक दो, उनका गला घोंट दो, या उन्हें जहर दे दो …अगर तुम यह भी नहीं कर पा रहे हो, तो उनके घर, उनकी कार, उनके कारोबार को राख कर दो, उनकी फसलें तबाह कर दो। और कुछ नहीं, तो उनके चेहरे पर थूक दो। इसे हम लोन वुल्फ आतंकवाद विचार कह सकते हैं। इसको अमली जामा पहनाना आरंभ हो चुका है। वैसे भी आईएस इस समय इराक एवं सीरिया में भारी हमलों से पस्त है। इसलिए दुनिया के जिस क्षेत्र के लिए अल बगदादी ने खिलाफत यानी खलीफे के साम्राज्य की घोषणा की है सब जगह संगठित समूह में जाकर लड़ना या तथाकथित जेहाद करना उसके लिए संभव नहीं है। इसलिए यह रास्ता ज्यादा आसान है।

लेकिन दुनिया के लिए यह सबसे बड़ा खतरा और सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे लोगों को पकड़ पाना खुफिया एजेंसियों के लिए आसान नहीं होता। कौन कहां किस समय किस चीज को हथियार बनाकर आतंकवादी बन जाए आप कल्पना नहीं कर सकते। पिछले वर्ष फ्रांस के पहले बंाग्लादेश में जो दूसरा हमला हुआ उसमें स्थानीय आतंकवादी थे जिनके हाथों छूंड़ा था और स्थानीय स्तर पर उनने बम बनाया था। क्यूबेक में एक आतंकवादी ने दो कनाडाई सैनिकों पर अपनी कार चढ़ा दी थी। वैसे भी चाहे आईएस हो या अल कायदा या ऐसे दूसरे संगठन ये एक विचार भी हैं जो लोगों को मजहबी उन्माद से भरकर उनके भीतर हिंसा करने की उद्याम प्रेरणा पैदा करते हैं। इससे ये स्वयं अपना संपर्क विकसित करते हैं, विस्तार करते हैं, विस्फोटक से लेकर संसाधन तक की स्वयं व्यवस्था करते हैं और योजना बनाकर हमला भी खुद ही करते हैं। न तो फ्रांस में हमला करने वाले का आईएस संगठन से सीधा संबंध था न अमेरिका के क्लब पर हमला करने वालों का।

गुजरात में पकड़े गए दोनों भाइयों के बारे में विस्तृत सूचना मिलनी अभी शेष है, लेकिन यदि ये वाकई आईएस के वुल्फ आतंकवादी हैं तो फिर यह मानकर चलना पड़ेगा कि इनकी संख्या इन दो तक ही सीमित नहीं हो सकती। ये देश में अन्यत्र भी फैले होंगे। जो लोग अभी भी आईएस के खतरे को दूर की कौड़ी मानकर उस पर चिंता करने वालों का उपहास उड़ाते थे उनको कम से कम अब अपने विचार बदल लेने चाहिए। हाल ही में आईएस के चंगुल से छूटने वाले भारतीय डॉक्टर के रामामूर्ति ने कहा है कि आईएस भारत में ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच अपनी सोच को फैलाना चाहता है। रामामूर्ति के मुताबिक आईएस में शामिल युवा बेहद पढ़े लिखे हैं उन्हें भारत के बारे में काफी कुछ जानकारी हैं। यहां तक की वह यह भी जानते हैं कि यहां की विकास दर कितनी है और शिक्षा में भारत कितना विकसित है। इन्हीं वजहों से भारत उनका पसंदीदा देश बन गया है। राममूर्ति को दो साल पहले लीबिया से आईएसआईएस न अपहरण कर लिया था। जो व्यक्ति इतने ंलंबे समय तक आईएस के चंगुल में रहा हो उससे ज्यादा पुख्ता जानकारी भारत के संदर्भ में उनकी सोच के बारे में और कौन दे सकता है। इस प्रकार भारत को इस नए खतरे के बारे में समग्रता से विचार कर इससे सफलतापूर्वक निपटने के लिए हर क्षण तैयार रहना होगा।
अवधेश कुमार, ई.ः30, गणेश नगर, पांडव नगर कॉम्प्लेक्स, दिल्लीः110092, दूर.ः01122483408, 9811027208

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