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ऐसा लगता है देश की सरकार में अंग्रेजों की आत्माएँ बैठी है

सेवा में,
श्री हंसमुख अधिया
राजस्व सचिव, वित्त मंत्रालय
भारत सरकार
नई दिल्ली

विषय: वस्तु एवं सेवा कर (“वसेक”) सम्बन्धी वेबसाइट, ऑनलाइन सेवाएँ , प्ररूप(फॉर्म), मैनुअल, विवरणी (रिटर्न), ऑनलाइन पंजीयन आदि केवल अंग्रेजी में होने की शिकायत

महोदय,
आपके विभाग के अधिकारियों ने वस्तु एवं सेवा कर (“वसेक”) की पूरी व्यवस्था केवल अंग्रेजी में शुरू की है और देश के करोड़ों आम व्यापारियों की सुविधा की पूर्णतः अनदेखी की गई है. चूंकि पूरी व्यवस्था अंग्रेजी में है इसलिए करोड़ों आम व्यापारियों और आम जनता में वसेक के प्रति बहुत अधिक डर का माहौल है. वे चाहते हुए भी कानून का पालन नहीं कर पा रहे हैं.

लोक शिकायत के मुख्य बिंदु:
1. वस्तु एवं सेवा कर से संबंधित सभी पोर्टल तथा वेबसाइटें, gst.gov.in ; gstawareness.cbec.gov.in ; www.cbec-gst.gov.in एवं, gstcouncil.gov.in, www.cbec.gov.in/htdocs-cbec/gst/index केवल अंग्रेजी में हैं.

2. वेबसाइट प्रयोग के सभी मैनुअल और प्ररूप(फॉर्म) अंग्रेजी में जारी किए गए हैं.

3. वस्तु एवं सेवा कर से संबंधित सभी प्रकार के ऑनलाइन रिटर्न केवल अंग्रेजी में तैयार किए गए हैं

4. वसेक में पंजीयन की ऑनलाइन सुविधा केवल अंग्रेजी में प्रदान की गई है और उसमें नाम पता इत्यादि केवल अंग्रेजी में भरना ही अनिवार्य है, जबकि सभी फॉर्म द्विभाषी(डिगलॉट) रूप में बनाना अनिवार्य है.

5. वसेक से संबंधित पंजीयन के प्रमाण पत्र केवल अंग्रेजी में जारी किए जा रहे हैं, जबकि सभी पंजीयन प्रमाण पत्र द्विभाषी(डिगलॉट) रूप में जारी करना अनिवार्य है.

6. वसेक से संबंधित एसएमएस, ईमेल केवल अंग्रेजी में ही भेजे जा रहे हैं जिन्हें देश के करोड़ों आम व्यापारी न तो पढ़ सकते हैं न समझ सकते हैं.

7. वसेक परिषद की बैठकों में सारी कार्यवाही केवल अंग्रेजी में की गई और इन बैठकों में प्रयोग किए गए बैनर एवं मेज नामपट्ट केवल अंग्रेजी में तैयार किए गए.

8. केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड की वेबसाइट www.cbec.gov.in के हिंदी संस्करण पर वसेक से संबंधित कोई भी जानकारी हिंदी में उपलब्ध नहीं है.

9. वस्तु एवं सेवा कर से संबंधित सभी प्रेस विज्ञप्तियाँ मीडिया को केवल अंग्रेजी में जारी की जा रही हैं, जबकि सभी प्रेस विज्ञप्तियाँ द्विभाषी(डिगलॉट) रूप में जारी करना अनिवार्य है.

आप से विनम्र प्रार्थना करता हूं कि वसेक सभी सॉफ्टवेयर, ऑनलाइन सेवाएँ, ऑनलाइन विवरणी, ईमेल आदि राजभाषा हिंदी/भारतीय भाषाओं में जल्द से जल्द शुरू करवाएँ वर्ना यह “कर व्यवस्था” फ्लॉप भी हो सकती है, जैसे कि विपक्ष दावा कर रहा है और मीडिया में हर दिन ख़बरें छप रही हैं.

इस संबंध में की गई कार्यवाही से मुझे अवगत कराएं और मेरे पत्र का उत्तर शीघ्र दें.

भवदीय,
प्रवीण कुमार जैन
मुंबई



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