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जग्गी वासुदेव फ्रॉड हैं, जल पुरुष राजेंद्र सिंह का आरोप

भोपाल. राष्ट्रीय जल सम्मेलन में भोपाल आए जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने सद्गुरु जग्गी वासुदेव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा- वो जो जग्गी बाबा है, फ्रॉड है, वो कहता है कि मुझे मिस्ड कॉल करो, तुम्हारी नदी जिंदा कर देंगे। उसने यहां मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में जाकर फ्रॉडगीरी की है। इन फ्रॉड बाबाओं का जाल बढ़ता जा रहा है। वह नदियों को बचाने के लिए ‘नदी जोड़ो’ अभियान चला रहा था, लेकिन बाद में मप्र में दिखा नहीं। मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित राजेंद्र सिंह यहां मीडिया से बातचीत कर रहे थे।

जलपुरुष ने कहा, “ये जो जग्गी है, कहता तो वो खुद सद्गुरू है, लेकिन वह फ्रॉड है। जिसने सबसे पहले अपनी पत्नी की हत्या की। फिर कोयंबटूर में विनोबा भावे के भूदान की जमीन (जिसे 44 महिलाओं को दी गई थी) को छीन लेता है। इस मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चल रहा है। ऐसे फ्रॉड बाबा न कभी नदी जिंदा कर सकते हैं, न किसी देश को पानीदार बनाने का काम कर सकते हैं। वह दिखावा करने में मास्टर हैं, वही काम करते हैं।”

सरकार से अपेक्षा करूंगा कि ऐसे फ्रॉड बाबा की जांच कराएं
राजेंद्र सिंह ने कहा- “मैं वर्तमान सरकार से अपेक्षा करूंगा कि जग्गी बाबा को जो पैसा दिया गया है, उसकी जांच हो और पता किया जाए कि उस पैसे का हुआ क्या। अगर उस पैसे की बर्बादी की गई है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।” उनसे पूछा गया कि जग्गी कई पॉलिटिकल लीडर्स के गुरू हैं तो राजेंद्र सिंह ने कहा- मैं तो यही कहूंगा कि जिसने अपराध किया है कि उसको सजा दो, कौन किसको गुरू बनाता है, मैं उसकी जांच नहीं करता और न मैं कोई पुलिस इंस्पेक्टर नहीं हूं। मैं तो ये कह रहा हूं कि जग्गी बाबा फ्रॉड है। उसकी जांच होनी चाहिए।

जल की जिम्मेदारी से हकदारी का रिश्ता बनेगा
पानी पर हकदारी और जिम्मेदारी का रिश्ता बनता है तब लोग अपनी हकदारी को जिम्मेदारी में बदलते हैं। हमने कोशिश की है कि सबको जल की जिम्मेदारी दी जाएगी। राइट टू वाटर कब तक लागू होगा। मुख्यमंत्री बहुत जल्दी इसे विधानसभा में पारित कराके 3-4 महीने में लागू कराएंगे, क्योंकि ये विधानसभा में पास होने के बाद ही कानून बनेगा। पानी के सारे पहलुओं को देखने के बाद ही पानी का प्रबंधन किया जा सकेगा। मध्य प्रदेश का 70 प्रतिशत भूजल भंडार खाली हो गया। ऐसे में इस भंडार को भरने के लिए कैसे काम किया जाए, जिससे हमारी छोटी नदियां सदानीरा होकर बहती रहें और तालाब जीवित रहें। उसके लिए जल अधिकार अधिनियम बनाने की बात की गई है। मध्य प्रदेश पहला राज्य है जो पहली बार पानी के अधिकारी पर काम कर रहा है। जैसा हम चाहते हैं, वैसा कानून मध्य प्रदेश में बन सकेगा।

पानी के झगड़ों को खत्म कर हक देंगे
राजेंद्र सिंह ने मंच से कहा- कमलनाथजी आपने अपने समाज पर विश्वास किया है। आप राइट टू वॉटर लागू कर पानी के झगड़ों को खत्म करके मालिकाना हक देंगे। जल कानून पूरे देश के लिए बनना चाहिए। राजेन्द्र सिंह ने कहा- नदियों को पुनर्जीवित करने का काम मध्य प्रदेश में शुरू हुआ। अब हमें पंचायतों और ग्राम सभाओं से जुड़कर काम करना होगा। दूसरे राज्यों को मध्य प्रदेश से सीखना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा- राजनीति में आने की वजह पानी
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल में राष्ट्रीय जल सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद एक रोचक किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा- मेरा राजनीतिक जीवन भी पानी से जुड़ा है। पानी न होने से बेटे की शादी नहीं होती थी। 1979 में राजनीति में आया तो उसकी वजह पानी ही थी। रात के 10 बजे सौंसर से पांढुर्ना जा रहा था। उस वक्त मैंने चुनाव लड़ने के बारे में नहीं सोचा था। रास्ते में लोग खाली पीपा और खाली बर्तन लेकर खड़े थे। वह सड़क पर रुके थे, उनका गांव सड़क से अंदर आधा किलोमीटर था। लोगों ने बताया कि हमारे गांव में बेटे की शादी नहीं हो सकती है, क्योंकि पेयजल 12 किलोमीटर दूर है, इसलिए कोई अपनी लड़की देने के लिए तैयार नहीं है। मैंने सोचा मैं इस पर क्या करूं, सिफारिश करूं या खुद इनके लिए आगे आऊं। मैंने तय किया कि राजनीति में जाऊंगा और चुनाव लडूंगा।

जल संरक्षण पर अभी विचार नहीं किया तो कभी नहीं होगा
कमलनाथ ने कहा- कानून तो बन जाएगा। कैसा कानून बनाएं- ये विचार आपको करना होगा। 65 बांध सूखने की कगार पर हैं। नदियां भी सूख रही हैं। नई टेक्नोलॉजी से पानी पर लाने विचार करना होगा। जो 20 साल पहले संभव नहीं था वो आज संभव है। अगर हमने अब भी जल संरक्षण पर विचार नहीं किया तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी भी माफ नहीं करेंगी। उन्होंने राजेन्द्र सिंह से मुखातिब होते हुए कहा- सामाजिक कर्तव्य के प्रति आप हमारी भावनाओं से जुड़ें। आप तो देशभर में चक्कर काटते हैं, लेकिन अब देश के कम, मध्यप्रदेश के ज्यादा चक्कर लगाइए, ताकि हम कह सकें कि मप्र में पानी की कोई कमी नहीं है।


तीन महीने में तैयार हो जाएगा पानी का ड्रॉफ्ट

मिंटो हॉल में राइट टू वॉटर कान्फ्रेंस में देशभर के करीब 25 राज्यों के जल विशेषज्ञ और पर्यावरणविद शामिल हो रहे हैं। इसमें पानी बचाने और सहेजने को लेकर मंथन हो रहा है। राष्ट्रीय जल सम्मेलन में विशेषज्ञों के विचार के बाद अगले तीन महीनों में एक ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। उसमें पानी पर हर व्यक्ति का अधिकार तय किया जाएगा। हर व्यक्ति को 55 लीटर प्रतिदिन पानी और एक करोड़ लोगों के घर तक नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। 5 हजार करोड़ के कामों के टेंडर इसी महीने जारी होंगे। जिसमें 45-45 प्रतिशत राशि केंद्र औऱ राज्य सरकार वहन करेंगे। बाकी की राशि जनसहयोग से जुटाई जाएगी।

राइट टू वाटर पर सुझाव देने देशभर से आए पानी विशेषज्ञ
पूर्व मंत्री और विधायक सरयू राय, तेलंगाना से वी. प्रकाश राव, मदुरै के डी गुरुस्वामी, जल गुरू महेंद्र मोदी, डॉ. इंदिरा खुराना, बंगाल से स्नेहिल डोंडे, डॉ. कृष्णपाल, पुणे से सुमंत पांडेय, अंतरराष्ट्रीय जल कानून विशेषज्ञ डॉ. अनुपम सर्राफ, कर्नाटक के पूर्व मंत्री वीआर पाटिल, अग्रणी नदी बेसिन के नरेंद्र चुघ, हरियाणा से इब्राहिम खान, जगदीश चौधरी, दिल्ली से रमेश शर्मा, प्रतिभा सिद्धे, उत्तराखंड के पूर्व मंत्री किशोर उपाध्याय, केरल के बेनूगोपाल, त्रिपुरा से विभूति राय।

मप्र में जल सुरक्षा का प्रस्ताव :

भौगोलिक पहचान (जियो टैगिंग) और सार्वजनिक तथा निजी जल संसाधनों का रजिस्ट्रेशन।
जल के लिए नगरीय निकाय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों का क्रियान्वयन।
नदियों के मुख्य स्रोतों की बेहतरी के लिए वन विभाग और जल संरक्षण के लिए युवाओं को शामिल करना।
पानी की बर्बादी रोकने के सख्त प्रावधान।
रूफ वाटर हार्वेस्टिंग का सख्ती से पालन।
फसल पद्धति को मानसून और जल की उपलब्धता के साथ जोड़ना।
पंचायतों द्वारा जल संरक्षण और उसका प्रबंधन।
ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पाइप से जल की आपूर्ति सुनिश्चित करना।
प्रत्येक ग्राम पंचायतों में तालाब का पुनर्रुद्धार एवं निर्माण।
ग्राम पंचायत स्तर पर जल संसाधनों के लिए सामुदायिक स्वामित्व और प्रबंधन।
जल सहेली और पानी पंचायत को बढ़ावा देना।

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