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मीडिया के सामाजिक सरोकार पर डॉ.चंद्रकुमार जैन का प्रभावी मार्गदर्शन

राजनांदगांव। दिग्विजय कालेज के प्रोफ़ेसर डॉ.चंद्रकुमार जैन ने कहा है कि पिछले 15 वर्षों में मीडिया के स्वरूप में बहुत तेज बदलाव देखने को मिला है। सूचना क्रांति एवं तकनीकी विस्तार के चलते मीडिया की पहुंच व्यापक हुई है। इसके समानांतर भूमंडलीकरण, उदारीकरण एवं बाजारीकरण की प्रक्रिया भी तेज हुई है, जिससे मीडिया अछूता नहीं है। नए-नए चैनल खुल रहे हैं, नए-नए अखबार एवं पत्रिकाएं निकाली जा रही है और उनके स्थानीय एवं भाषायी संस्करणों में भी विस्तार हो रहा है। लेकिन, मीडिया के इस विस्तार के साथ चिंतनीय पहलू यह जुड़ा गया है कि यह सामाजिक सरोकारों से दूर होता जा रहा है।

मीडिया के सामाजिक सरोकार पर पत्रकारिता के विद्यार्थियों से बिलासपुर में चर्चा करते हुए मूलतः पत्रकारिता से उच्च शिक्षा की सेवा में आये डॉ.चंद्रकुमार जैन ने कहा कि मीडिया के इस बदले रूख से उन पत्रकारों की चिंता बढ़ती जा रही है, जो यह मानते हैं कि मीडिया के मूल में सामाजिक सरोकार होना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत में मीडिया की भूमिका विकास एवं सामाजिक मुद्दों से अलग हटकर हो ही नहीं सकती पर यहां मीडिया इसके विपरीत भूमिका में आ चुका है। मीडिया की प्राथमिकताओं में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी, विस्थापन जैसे मुद्दे रह ही नहीं गए हैं। उत्पादक, उत्पाद और उपभोक्ता के इस दौर में खबरों को भी उत्पाद बना दिया गया है, यानी जो बिक सकेगा, वही खबर है।

डॉ.जैन ने कहा कि दुर्भाग्य की बात यह है कि मीडिया समाज का सचेतक और मार्गदर्शक भी है किन्तु जाने अनजाने में उन्हें वास्तविक सामाजिक मुद्दों से दूर किया जा रहा है। लेकिन , हाल ही में भोपाल में हुए मूकमाटी महामंथन से लौटे डॉ.चंद्रकुमार जैन ने बताया कि ऐसी ही परिस्थितियों के बीच मीडिया में विकास के मुद्दों Aबढ़ावा देने का कार्य कर रही भोपाल की एक संस्था विकास संवाद ने कुछ दिन पूर्व चित्रकूट में राष्ट्रीय मीडिया संवाद का आयोजन कर नई उम्मीदें जगाई हैं। संवाद में संपादक, वरिष्ठ पत्रकार, स्वतंत्र पत्रकार, वरिष्ठ उप संपादक, उप संपादक, संवाददाता, जिला संवाददाता, पत्रकारिता के प्राध्यापक एवं पत्रकारिता के विद्यार्थियों ने शिरकत की प्रतिभागियों को अपने अनुभवों को खंगालने का मौका मिला।

डॉ.जैन ने बताया कि राष्ट्रीय मीडिया संवाद में विकास, एकांगी विकास, समग्र विकास, शहरी एवं ग्रामीण विकास में अंतर, विस्थापन, स्वास्थ्य, बच्चों के अधिकार, विकास में महिलाओं की स्थिति, समानता एवं उसके विभिन्न पहलू, वैकल्पिक मीडिया, मुख्यधारा के मीडिया में स्पेस की समस्या का समाधान, अपनी भूमिकाएं आदि कई मुद्दों पर चर्चा की गई। ऎसी चर्चाओं को जन भावनाओं के अनुरूप हर जगह नई दिशा देने की जरूरत है।

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