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जेएनयू में अब संस्कृत में कर्मकांड भी पढ़ाया जाएगा

राजधानी दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) इस साल इंजीनियरिंग की पढ़ाई तो शुरूकर ही रहा है, अगले वर्ष से कर्मकांड की पढ़ाई भी शुरू हो सकती है। जेएनयू में हाल ही में स्थापित स्कूल ऑफ संस्कृत एंड इंडिक स्टडीज (एसएसआईएस) ने इसका प्रस्ताव तैयार किया है। यह एक रोजगार परक पीजी डिप्लोमा होगा, जिसमें दाखिला के लिए धर्म, जाति और समुदाय विशेष का होने की बाध्यता नहीं होगी। एसएसआईएस के डीन गिरीश नाथ झा ने कहा प्रस्ताव अभी प्रारंभिक चरण में है और इसके लिए अभी एक बैठक हुई है। इस बैठक में स्कूल ऑफ साइंस और ई-लर्निंग कोर्स के विशेषज्ञों को खासतौर पर आमंत्रित किया गया था। इसमें श्रुति पर आधारित स्त्रोत सूत्र, स्मृति या परंपरा पर आधारित स्मृतिसूत्र जैसे पाठ पढ़ाए जाएंगे। बता दें कि जेएनयू में 2001 में स्थापित स्पेशल सेंटर फॉर संस्कृत स्टडीज को पूरी तरह अपग्रेड कर दिसंबर 2017 में स्कूल ऑफ संस्कृत एंड इंडिक स्टडीज के रूप में तब्दील किया गया है और यहां कई तरह के प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है।

इंजीनियरिग के दो कोर्स जुलाई से : जेएनयू में इस साल जुलाई से स्कूल ऑफ इंजीनियरिग में दो कोर्स शुरू हो जाएंगे। कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार ने विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस कोर्स में स्पष्ट है कि छात्र बीच में पढ़ाई छोड़कर बीटेक की डिग्री नहीं ले सकता। यह इंटिग्रेटेड कोर्स है, जिसमें छात्र के पास एमटेक या परास्नातक करने का विकल्प भी होगा। पहले तीन साल बीटेक की पढ़ाई होगी, सातवें सेमेस्टर से मास्टर्स की पढ़ाई शुरू होगी। बीटेक (कंप्यूटर साइंस) और बीटेक (कंप्यूटर साइंस एंड कम्युनिकेशन) में दाखिले जेईई मेन के अंक के अनुसार होंगे। दोनों कोर्स में 50-50 सीटें हैं। यह जेएनयू प्रशासन की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसकी तैयारी कुलपति ने आते ही शुरू कर दी थी। विगत वर्ष विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से अनुमति मिलने के बाद इसकी प्रक्रियाओं को पूरा करने में तेजी से काम हो रहा है।



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