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केरल से कश्मीर तक जगह जगह बन रहे जेहादी पॉकेट

मुस्लिम आबादी से लोगों दिक्कत नहीं, दिक्कत जिहादी-कट्टरपंथी सोच से है जो घोर असामाजिक, गैर जिम्मेदार और कानून को ललकारने वाली है। यह दिक्कत अभी पूरे देश ने देखी है. दिक्कत, जिहादी तत्वों और उस विचारधारा से है जिसमें आईबी के आफिसर अंकित शर्मा को 200 से ज्यादा बार चाकुओं से गोदा जाता है. अगर आप समझते हैं कि अफगानिस्तान में हमला करने वाले केरल के आतंकवादी और अंकित शर्मा के हत्यारों में कोई अंतर है, तो आप गलत हैं.

बुधवार को काबुल में गुरूद्वारे पर हमला हुआ. 25 सिखों का नरसंहार हुआ. इस हमले को इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने अंजाम दिया. चौंकाने वाली बात ये है कि हमलावरों में केरल का एक आतंकवादी भी शामिल था. जिन तीन आतंकवादियों ने हमला किया, उनमें अबू खालिद अल हिंदी शामिल था. वह नौजवानों की उस खेप में शामिल था, जो बड़ी तादाद में केरल से भागकर आईएस की खिलाफत की जंग में शामिल हुए थे. दुनिया को इस्लामिक परचम के तले लाने और भारत को दारूल इस्लाम बनाने की मंशा रखने वाले जिहादियों की नई खेप देश में तैयार हो रही है. भारत में हर कोने में जिहादी केंद्र सामने आ रहे हैं, नए रूप सामने आ रहे हैं. अब जिहाद सिर्फ एके 47 लेकर नहीं लड़ी जा रही. कहीं हिंदुओं से सामान न खरीदने के फतवे जारी हो रहे हैं, तो कहीं जमीन को सामरिक तरीके से कब्जाने की होड़ है. बंगाल में ये जनसंख्या जिहाद है, तो उत्तर प्रदेश में जमीन जिहाद. केरल में चर्च तक कह रहा है कि हमारी लड़कियों को लव जिहाद से बचाओ.

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआई) ने योजनाबद्ध ढंग से पूरे देश में हिंसा को अंजाम दिया. पीएफआई ऐसा कर सका क्योंकि उसे देश के अलग-अलग हिस्सों में स्वीकार्यता प्राप्त हो रही है. उसके विध्वंसकारी इरादों का अनुसरण करने वाले देश के हर कोने में हैं. देश में बहुत कुछ सुनियोजित चल रहा है. इसे समझने के लिए हम दिल्ली के मॉडल से शुरुआत करते हैं. दिल्ली में पिछले दो दशक में अल्पसंख्यक आबादी का जो प्रसार हुआ है, वह खासा रणनीतिक है. दिल्ली के लगभग हर एंट्री प्वाइंट पर घनी मुस्लिम आबादी की बस्तियां बस चुकी हैं. आप चाहे गुड़गांव से आएं या सोनीपत से और या फिर फरीदाबाद या गाजियाबाद से. दिल्ली के हर मुख्य मार्ग पर मुस्लिम बस्तियां बस चुकी हैं.

सीएए के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों से ये साबित हो गया कि रणनीतिक रूप से दिल्ली के हर एंट्री प्वाइंट पर बैठे मुसलमान जिहादी जब चाहें, दिल्ली को बंधक बना सकते हैं. ओखला से सुखदेव विहार तक या फिर सीमापुरी से आईएसबीटी तक, जिस रास्ते पर चाहेंगे, कब्जा कर सकते हैं. आबादी का ये विस्तार स्वाभाविक है या रणनीतिक, सोचने का समय आ गया है. उत्तर प्रदेश में पचास हजार से ज्यादा आबादी वाले ऐसे इलाकों की सूची 170 है, जहां मुस्लिम आबादी तीस से साठ प्रतिशत हो चुकी है.

मुस्लिम आबादी से लोगों दिक्कत नहीं, दिक्कत जिहादी-कट्टरपंथी सोच से है जो घोर असामाजिक, गैर जिम्मेदार और कानून को ललकारने वाली है। यह दिक्कत अभी पूरे देश ने देखी है. दिक्कत, जिहादी तत्वों और उस विचारधारा से है जिसमें आईबी के आफिसर अंकित शर्मा को 200 से ज्यादा बार चाकुओं से गोदा जाता है. अगर आप समझते हैं कि अफगानिस्तान में हमला करने वाले केरल के आतंकवादी और अंकित शर्मा के हत्यारों में कोई अंतर है, तो आप गलत हैं.

अफगानिस्तान में हमलो को अंजाम देन वाला केरल का 21 साल का मोहम्मद मोहसिन है. उसके बारे में माना जाता था कि वह अफगानिस्तान में ड्रोन हमले में मारा गया. मोहसिन केरल के कसरगोड जिले का रहने वाला है और इंजीनियरिंग का छात्र है. इससे पहले रक्का में आत्मघाती हमले में एक और केरल का आतंकवादी मार गया था. इसका नाम अबू युसूफ अल हिंदी उर्फ शफी अरमार था. वह उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल का रहने वाला था. आईएस के लिए काम करने वाले ये अकेले नहीं है. केरल जिहाद के लिए उपजाऊ जमीन साबित हो रहा है. मई 2016 से अब तक आईएस में शामिल होने के लिए 98 लोग अपने परिवारों के साथ केरल से पलायन कर चुके हैं. इनमें से अधिकतर इस समय अफगानिस्तान में सक्रिय हैं. केरल के 21 लोगों के साथ आईएस में शामिल हुआ राशिद अब्दुल्ला मई 2018 में हवाई हमले में मारा गया था. मल्लापुरम का सैफुद्दीन जुलाई 2019 में मारा गया था. केरल का मामला बहुत संगीन है. असल में यहां बारी-बारी से मार्क्सवादियों और कांग्रेस का शासन रहा है. सभी के राज में कट्टरपंथी विचारधारा को पूरा खाद-पानी मिला है. केरल देश का ऐसा राज्य है, जहां आपको बाइकों और कार पर इस्लामिक स्टेट के स्टीकर नजर आएंगे और कोई रोकने वाला नहीं है. यहां तिरंगा से ज्यादा चांद-तारा मिलेगा. केरल की कुल मस्जिदों में से 90 प्रतिशत पर कट्टरपंथी वहाबी विचारधारा का कब्जा हो चुका है. मध्य एशिया के साथ करीबी संबंधों के चलते यहां भारत विरोधी भावना मुसलमानों में बहुत प्रबल है.

केरल में 300 वर्ष पहले तक 99 फीसद हिंदू थे. फिलहाल केरल की कुल 3.50 करोड़ आबादी का 54.7 प्रतिशत भाग ही हिन्दू हैं. फिलहाल 26.6 फीसदी मुस्लिम और 18.4 प्रतिशत ईसाई हैं. केरल में आबादी का संतुलन खासकर ईसाई मिशनरियों ने बिगाड़ा. 2011 की धार्मिक जगनणना के आंकड़ों अनुसार हिन्दुओं की आबादी 16.76 प्रतिशत की दर से तो मुस्लिमों की आबादी 24.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी. पहली बार हिन्दुओं की आबादी वहां 80 प्रतिशत से नीचे आ गई. 2001 में हिन्दू 80.5 प्रतिशत थे, जो घटकर 79.8 प्रशित रह गए जबकि मुस्लिमों की आबादी 13.4 प्रतिशत से बढ़कर 14.2 प्रतिशत हो गई. केरल में हिंदुओं की आबादी में मुसलमानों की घुसपैठ और फिर उन्हें मुस्लिम बस्तियों मे तब्दील कर देने का काम योजनाबद्ध ढंग से चल रहा है. हिंदू और ईसाई लड़कियों को लव जिहाद का शिकार बनाया जा रहा है. अब तो चर्च ने भी सरकार से ईसाई लड़कियों को लव जिहाद से बचाने की अपील कर दी है. वर्तमान में केरल के मल्‍लापुरम, कासरगोड, कन्‍नूर और पलक्‍कड़ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां मुस्लिमों ने अपनी अलग सत्ता स्थापित कर ली है. हिंदुओं की जीवनशैली यहां तक कि व्रत त्योहार भी मुश्किल हो गए हैं.

कमोबेश यही हाल तमिलनाडु का है. गत वर्ष ईस्टर पर श्रीलंका में हुए नरसंहार के तार तमिलनाडु के कट्टरपंथी संगठन से जुड़े हुए हैं. इसके अलावा पीएफआई की भी तमिलनाडु के मुसलमानों में गहरी पैठ है. तमिलनाडु में तौहीद जमात ने बहुत गहरे पांव पसारे हुए हैं. 2017 में यहां जब पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की प्रतिमा का अनावरण हुआ, तो एक मुस्लिम संगठन ने फतवा दिया था कि कलाम मुसलमान नहीं थे. तमिलनाडु की कुल आबादी का छह फीसद ही मुसलमान है. लेकिन तमिलनाडु के विषय में दिक्कत की बात ये है कि ये सभी छह फीसद आबादी वहाबी विचारधारा वाली है.

जिहादी विस्तार वाला एक और राज्य पश्चिम बंगाल है. यहां जनसंख्या जिहाद चल रही है. 24 परगना, मुर्शिदाबाद, बिरभूम, मालदा आदि ऐसे कई उदाहरण सामने हैं, जहां हिंदू आबादी अल्पमत में आने जा रही है. 2011 की जनगणना से आपको स्थिति की गंभीरता का अंदाजा होगा. जनगणना के अनुसार पश्‍चिम बंगाल में हिन्दुओं की आबादी में 1.94 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों की आबादी में 0.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है जबकि सिर्फ बंगाल में मुसलमानों की आबादी 1.77 फीसदी की दर से बढ़ी है, इस आंकड़े से ही पता चलता है कि पश्‍चिम बंगाल में क्या चल रहा है? 2013 से बंगाल में हिंदू विरोध हिंसा का दौर चल रहा है. बंगाल में हुए सुनियोजित दंगों में सैकड़ों हिंदुओं के घर और दुकानें लूटे गए. मुस्लिम बहुल आबादी से बड़ी तादाद में हिंदू पलायन कर चुके हैं. बंगाल के 3 जिले ऐसे हैं, जहां पर मुस्लिमों ने हिन्दुओं की जनसंख्या को फसाद और दंगे के माध्यम से पलायन के लिए मजबूर किया.

फिलहाल मुर्शिदाबाद में 47 लाख मुस्लिम और 23 लाख हिन्दू, मालदा में 20 लाख मुस्लिम और 19 लाख हिन्दू और उत्तरी दिनाजपुर में 15 लाख मुस्लिम और 14 लाख हिन्दू हैं. हिन्दू यहां कभी बहुसंख्यक हुआ करते थे। प. बंगाल के सीमावर्ती उप खंडों की बात करें तो 42 क्षेत्रों में से 3 में मुस्लिम 90 प्रतिशत से अधिक, 7 में 80-90 प्रतिशत के बीच, 11 में 70-80 प्रतिशत तक, 8 में 60-70 प्रतिशत और 13 क्षेत्रों में मुस्लिमों की जनसंख्या 50-60 प्रतिशत तक हो चुकी है. पश्चिम बंगाल का किस तरीके से जिहादीकरण हो रहा है, जरा आंकड़ों से समझिए. पश्चिम बंगाल की साढ़े नौ करोड़ आबादी है. इसमें ढाई करोड़ मुसलमान हैं. 1951 की जनगणना में पश्चिम बंगाल में 2.6 करोड़ आबादी में सिर्फ पचास लाख मुसलमान थे. पश्चिम बंगाल में एक दशक में होने वाली आबादी की वृद्धि दर भी इस जनसंख्या जिहाद का खुलासा कर देती है. 2011 में एक दशक में हिंदू वृद्धि दर 10.8 प्रतिशत तो मुस्लिम आबादी की बढ़ोतरी 21.8 फीसद की दर से हो रही है.

जनसंख्या जिहाद में असम भी पीछे नहीं है. यहां के 9 जिले मुस्लिम बहुल हैं. माने ये कि इन जिलों में हिंदुओं की आबादी मुसलमानों से कम हो गई है. 2001 की जनगणना के मुताबिक जिन जिलों में हिंदुओं की तुलना में मुस्लिमों की आबादी ज्यादा है उनमें बारपेटा, धुबरी, करीमगंज, गोलपाड़ा, नगांव, बोंगईगांव, मोरीगांव, हैलाकांडी व दारंग शामिल हैं. जनगणना के मुताबिक धुबरी जिले में 79.67,बारपेटा में 70.74,दारंग में 64.34,हैलाकंडी में 60.31,करीमगंज में 56.36,नगांव में 55.36,मोरीगांव में 52.56,बोंगईगांव में 50.22 और गोलपाडा में 57.52 फीसदी मुस्लिम हैं.

इस्लाम का जिहादी विस्तार
– भारत में मुस्लिमों का जनसंख्या वृद्धि दर 24.6% है
– 2001 – जनगणना के मुताबिक़ भारत में मुसलमानों की आबादी 29.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही थी
– अमेरिकी थिंक-टैंक पिऊ (PEW) के अनुसार भारत में 2050 तक मुसलमानों की कुल जनसंख्या बढ़कर 31.1 करोड़ तक हो सकता है
– भारत की 47 प्रतिशत मुस्लिम आबादी तीन प्रदेश में रहती है. येहैं उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार
– भारत में सबसे ज्यादा आबादी वाले तीन प्रदेश- उत्तर प्रदेश – 3.07 करोड़ (19.3%), पश्चिम बंगाल – 2.02 करोड़ (25%) और बिहार – 1.37 करोड़ (16.9%)
– सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या प्रतिशत वाला केंद्रशासित प्रदेश लक्ष्यद्वीप – 61,981 – 96.2%
– सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या प्रतिशत वाला राज्य – जम्मू और कश्मीर – 8,570,916 – 68.3% के बाद असम – 10,659,891 – 34.2%
– सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश – 38,519,225 – 19 .3%

मृदुल त्यागी राष्ट्रवादी मुद्दों पर लिखते हैं

साभार- https://www.panchjanya.com/ से

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