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जिंदलजी ने परिवार, समाज, धर्म और परोपकार को एक माला में पिरो दिया

मुंबई के कारोबार, उद्योग और समाज सेवा से लेकर धार्मिक जगत में श्री देवकीनंदन जिंदल का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। समाज सेवा का कोई भी काम हो जिंदलजी आँख मूंदकर सबके साथ खड़े हो जाते हैं। वे मात्र धनराऎशि से ही मदद नहीं करते बल्कि किसी भी काम में खुद हाथ बँटाना पसंद करते हैं। जब 75 वर्ष का कोई व्यक्ति जी जान लगाकर समाज में सबके साथ मिलकर काम करता है तो स्वाभाविक है, उसके संस्कारों, जीवन और आचरण में ऐसा कुछ है जो हर किसी को हैरान कर देता है। मुंबई के मालाड क्षेत्र में विगत 36 सालों से अनवरत रामलीला का आयोजन एक ऐसा ऐतिहासिक कार्यक्रम हो चुका है जिसे देश की श्रेष्ठतम तीन रामलीलाओं में शामिल किया गया है। मजे की बात ये है कि इस रामलीला का आयोजन भी विगत 36 वर्षों से मुरादाबाद के श्री राजेश रस्तोगी द्वारा किया जा रहा है। श्री रस्तोगी स्वयँ एक बड़े उद्योगपति हैं लेकिन जिंदलजी के प्रति अपने प्रेम की वजह से वे पूरे परिवार के साथ इस रामलीला का मंचन करने आते हैं।

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1963 में हरियाणा के भिवानी से खाली हाथ मुंबई आए जिंदल जी ने अपने पुरुषार्थ, समर्पण और एकनिष्ठ ध्येय से कारोबार जगत में ही नहीं बल्कि समाज के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त की। अपने परिवार से लगातार दस साल दूर रहकर यहाँ आकर सफलता प्राप्त कर अपने परिवार को भी स्थापित किया और संयुक्त परिवार की परंपरा के साथ पूरे परिवार को एक साथ रखा।

विश्व हिन्दू परिषद् के कोंकण प्रांत के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने इस संगठन को पूरे महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में एक अलग पहचान दी।

मुंबई में देवकीनंदनजी जिंदल के जीवन की 75 वर्ष की यात्रा पूरी होने पर जब उनके सम्मान समारोह का आय़ोजन किया गया तो महामंडलेश्वर विश्वेश्वानंद गिरी जी महाराज, साध्वी ऋतुंभरा जी, विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष श्री प्रवीण तोगड़िया, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सहकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी, स्वामी विज्ञानानंद जी, संघ व विश्व हिन्दू परिषद के जुड़े प्रमुख पदाधिकारी दादा वेदक, श्री शंकर गायकर, श्री राघव रेड्डी, श्री अशोक राव, श्री चंपत राय के साथ ही महाराष्ट्र की महिला एवँ बाल विकास मंत्री श्रीमती विद्या ठाकुर, वात्सल्य धाम के अध्यक्ष डॉ. श्याम अग्रवाल सहित समाज के विभिन्न वर्गों के विशिष्ट जन मंच पर मौजूद थे।

इस अवसर पर संन्यास आश्रम मुंबई के महामंडलेश्वर श्री विश्वेश्वरानंद जी गिरी ने कहा कि एक समय था जब हम गलियों में घूमकर जय श्री राम का नारा लगाते थे तो लोग हम पर पत्थर फेंकते थे, लेकिन विश्व हिन्दू परिषद और जिंदल जी जैसे लोगों ने इस नारे को गौरव प्रदान किया। जिंदल जी नींव के पत्थर की तरह सेवा करते रहे, आज चारों ओर जो शिखर दिखाई दे रहे हैं वो जिंदलजी जैसे नींव के पत्थरों का ही पुण्य प्रताप है। हमारा समाज जिंदलजी जैसे लोगों से ही बना है और जब तक ऐसे लोग होंगे, हमार समाज नहीं टूटेगा।

श्री प्रवीण तोगड़िया ने अपने ओजस्वी भाषण में कहा कि इस देश में 17 करोड़ लोग रोज भूखे सोते हैं, 8 करोड़ लोगों के पास अपना घर नहीं है, 25 करोड़ लोग डॉक्टर का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है। इस देश में गौ हत्या पर कोई कानून नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक कश्मीर घाटी से विस्थापित हिन्दुओं को वापस नहीं बसाया जाएगा और स्वर्गीय अशोक सिंघल के राम मंदिर के निर्माण के स्वप्न को पूरा नहीं किया जाएगा इस देश में हिन्दुओं के स्वाभिमान की प्रतिस्थापना नहीं होगी। इस देश के हिन्दू 14 वीं शताब्दी से अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में आज के दौर में जिंदलजी जैसे लोग हमें ये आशा और प्रेरणा देते हैं कि हिंदुओं का संघर्ष रंग लाएगा।

इस अवसर पर श्री भैयाजी जोशी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने विश्व के मंच पर हमारा गौरव बढ़ाया था। उन्होंने कहा कि आज चारों ओर असुरी शक्तियों का बोलबाला है, हमें अपने आपको असुरी शक्तियों से बचाना ही नहीं है बल्कि दूसरों की भी रक्षा करना है। असुरी शक्तियाँ संगठन और शौर्य की शक्ति से ही पराजित हो सकती है। हम बाहरी शक्तियों से तो मुकाबला कर सकते हैं लेकिन समाज की कुरुतियों का सामना करना बहुत मुश्किल है। हमारी वाणी और आचरण में धर्म भी जरुरी है। आज 100 करोड का हिन्दू समाज मात्र 25 करोड़ में ही सीमित हो गया है। हम सामाजिक हिन्दू बनें और अपने सभी हिन्दू भाईयों को गले लगाएं तभी हम हिन्दू समाज को बचा सकेंगे।

साध्वी ऋतुंभराजी ने कहा कि देवकीनंदन जी में एक पिता की, एक परोपकारी की और समाजसेवी की जो करुणा है, जो संवेदना है वो हमें प्रेरणा देती है, उनके विराट व्यक्तित्व में सेवा का समर्पण और अकर्ता का सहज भाव है।

डॉ. श्याम अग्रवाल ने कहा कि जिंदलजी हमारे संकट मोचक हैं। हम वृंदावन में दीदी माँ के आश्रम में हर दो महीने में नैत्र शिविर के लिए जाते हैं जहाँ हजारों मरीजों का निःशुल्क ऑप्रेशन किया जाता है और उन्हें दवाई आदि भी उपलब्ध कराई जाती है। जिंदल जी ने मुझे ये आदेश दे रखा है कि जब भी आप शिविर लेकर जाएँ और कोई व्यवस्था न हो तो उसका खर्च मैं उठाउंगा। वे जब हमारे साथ शिविर में वृंदावन जाते हैं तो देर रात तक मरीजों से मिलते हैं, उनको कंबल देते हैं और ये देखते हैं कि कोई मरीज गल्ती से भी भूखा न रह जाए या उसे ओढ़ने-बिछाने की समस्या न आए। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि मुंबई के केशव सृष्टि में उदारता से दान देने से लेकर हरियाणा सम्मेलन के माध्यम से हरियाणा के लोगों को एक मंच पर लाने में जिंदलजी का योगदान भुलाया नहीं जा सकता है।

उनकी पुत्रवधू श्रीमती प्रीति जिंदल ने कहा मैं इस घर में बहू बनकर आई तो पूरे परिवार का जो प्यार, अपनापन और स्नेह मिला उसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है।

इस अवसर पर श्री देवकीनंदन जी जिंदल की 36 वर्षों की सामाजिक यात्रा पर बना एक प्रेरक वृत्त चित्र भी दिखाया गया। इसका निर्माण उनके पौत्र ऋषभ की पहल पर किया गया।

इस अवसर पर जिंदल जी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे भाई प्रेमजी चौधरी, का संबल, भाई हनुमान प्रसाद और महावीर प्रसाद सहयोग न होता तो मैं आज इस मुकाम पर नहीं खड़ा होता।



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