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जगजीत सिंह के जीवन के सफर का प्रमाणिक दस्तावेज है, ‘कहां तुम चले गए: दास्तान-ए-जगजीत’

राजेश बादल की किताब ‘कहां तुम चले गए… दास्तान ए जगजीत’ का लोकार्पण दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में गुरुवार की शाम एक विशेष कार्यक्रम के दौरान किया गया।

शिरोमणि गजल गायक जगजीत सिंह को इस दुनिया से गए करीब 10 वर्ष हो गए हैं और आगामी 10 अक्टूबर को उनकी पुण्यतिथि है। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में गुरुवार की शाम एक विशेष कार्यक्रम आयोजन किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार व फिल्मकार राजेश बादल की किताब ‘कहां तुम चले गए… दास्तान ए जगजीत’ का लोकार्पण किया गया। यह किताब जगजीत सिंह के जीवन के सफर का प्रमाणिक दस्तावेज है।

इस कार्यक्रम का आयोजन सांस्कृतिक संस्था इंटरनेशनल मेलोडी फाउंडेशन और मंजुल पब्लिशिंग हाउस के बैनर तले किया गया। कार्यक्रम के दौरान जगजीत सिंह के सगे छोटे भाई सरदार करतार सिंह ने उनकी कुछ चुनिंदा गजलें भी पेश कीं, जोकि सभागण में मौजूद सभी के दिलों को छू गईं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किताब के लेखक व वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल कहते हैं कि जगजीत सिंह को इस दुनिया से गए करीब 10 वर्ष हो गए हैं, लेकिन आज तक कोई अच्छा कार्यक्रम उनकी याद में नहीं हुआ है। आज भी वे हमारे दिल में धड़कते हैं। उन्हें याद किए बगैर कोई दिन नहीं जाता। जगजीत सिंह ऐसे व्यक्ति थे, जो आम लोगों के बीच से निकलकर सदियों में छा गए और आगे भी ऐसे ही छाए रहेंगे। उनकी गजलों ने जिंदगी को कई रूपों में जीना सिखाया है। जहां गांधी का दर्शन था, जहां के गांधी के राम थे। ठीक उसी तरह जगजीत के भी राम थे।

उन्होंने कहा कि जगजीत सिंह जैसी कोई शख्सियत जब हमारे बीच नहीं रहती, तो वह अपने साथ कई तरह के अनुभव ले जाती है। लिहाजा हमें कोशिश करनी चाहिए कि उन अनुभवों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके और हमनें यही छोटा सा प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि जगजीत सिंह ने जो किया है, उन सभी बातों को किताब की एक शक्ल दे पाना मुश्किल है, लेकिन फिर भी मैंने एक कोशिश की है और यह किताब उन लोगों के लिए, जो जगजीत सिंह को जानना-समझना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि जगजीत सिंह की जिंदगी से जुड़े किस्सों की ऐसी किताब की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी, क्योंकि जगजीत सिंह ने गजल को प्राइवेट पार्टियों और कुछ खास लोगों की बैठक से निकाल कर बड़े मंच और फिल्मी परदे तक पहुंचाया। फिर आम जनता के इस प्रिय गायक की जिंदगी पर लिखा-पढ़ा जाने लायक इतना कम क्यों है। यह किताब इस कमी को कुछ हद तक पूरी करती है। उन्होंने आगे कहा कि जगजीत ने कभी भी छोटे-बड़े का भेदभाव नहीं किया। वे सभी के लिए गायक के साथ-साथ एक फरिश्ते की तरह थे। वह हर समय लोगों की मदद के लिए तैयार रहते थे। महीनें में दो से तीन बार वह मुंबई की सड़कों पर सैकड़ों लोगों की आर्थिक मदद करने निकल पड़ते थे। आज हम महसूस करते हैं कि ईश्वर एक शक्ति है। जो सबका भला चाहते हैं। ठीक इसी तरह की कल्पना का एक अंश हैं जगजीत सिंह। उन्होंने अपनी गजलों से लोगों की दुख और पीड़ा को उठाया। आज हम गरीबी, सद्भाव, महंगाई सहित कई मुद्दों से परेशान हैं। ये सभी मुद्दे कहीं न कहीं जगजीत अपनी गजलों के जरिए उठा चुके हैं।

लेखक ने कहा कि राजस्थान के श्रीगंगानगर के सिख अमर सिंह और बच्चन कौर के सात बच्चों के परिवार में आठ फरवरी, 1941 को जगमोहन का जन्म हुआ। जगमोहन का नाम परिवार के गुरुजी के कहने पर जगजीत सिंह रखा गया और यही जगजीत सिंह आगे चलकर गजल सम्राट बना। आज भी मन यह कहता है और दिल से आवाज आती है कि जगजीत कहीं नहीं गए। वह यही हैं।

वहीं, ओएनजीसी के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन के हेड हरीश अवल ने कार्यक्रम में कहा कि जगजीत सिंह की सबसे बड़ी उपलब्धि यही रही है कि उन्होंने गजल गायकी में खूब सारे प्रयोग कर उसे इतना आसान और कर्णप्रिय कर दिया कि अमीरों की गजल आम जनता की हो गई। जगजीत के सारे अलबमों की खासियत उनकी आसान और सुरीली गजलें रहीं, जो आज भी गुनगुनाई जा रही हैं। शास्त्रीय संगीत पर भी उनकी अच्छी पकड़ थी। यही वजह थी कि जब जगजीत की गायकी बहुत विस्तृत और कई दफा चौंकाने वाली होती थी। इनकी कारणों से आज वे दिल और दिमाग दोनों पर राज करते हैं।

इंटरनेशनल मेलोडी फाउंडेशन के महासचिव डॉ. हरिश भल्ला ने बताया कि पत्रकार और फिल्मकार राजेश बादल की पुस्तक ‘कहां तुम चले गए: दास्तान-ए-जगजीत’ असल में जगजीत सिंह को नजदीक से जानने का एक शानदार दस्तावेज है। इस किताब में जगजीत सिंह की गायकी के अलावा उनकी जिंदादिली और उदारता के कई किस्से हैं। जगजीत सिंह किस तरह मुंबई की सड़कों पर मदद करने निकलते थे और बेटी की शादी के नाम पर कार्यक्रम का निमंत्रण देने वालों को मिठाई के डिब्बे में रुपए देकर विदा कर देते थे। जगजीत सिंह का हॉर्स रेसिंग का प्रेम, उनके नए गायकों और शायरों से रिश्तों की भी इस किताब में विस्तार से चर्चा की गई है। इस किताब में उनके पारिवारिक जीवन के सुख-दुख का भी बेहद संजीदगी से चित्रण किया गया है। चित्रा से मुलाकात, चित्रा की पुरानी जिंदगी, इस जोड़ी के जवान बेटे विवेक की मौत के बाद परिवार में आया गम और उस गम से उबरना जगजीत सिंह की जिंदगी के इन उतार-चढाव को भी विस्तार से लिखा गया है, जो कई जगह दिल को छू जाता है।

कार्यक्रम में सिक्किम के पूर्व राज्यपाल बाल्मीकि प्रसाद सिंह, पूर्व डीजी आल इंडिया रेडियो लक्ष्मी कांत वाजपेयी ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में साहित्य और संगीत की दुनिया के कई नामी चेहरे शामिल हुए। अंत में जगजीत सिंह के छोटे भाई सरदार करतार सिंह ने उनकी कुछ चुनिंदा गजल भी प्रस्तुत की।

साभार-https://www.samachar4media.com/ से

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