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मॉर्डन आर्ट्स से केकरे को मिली अंतर्राष्ट्रीय पहचान

हाड़ोती में कई ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपने कार्य से न केवल अपने देश में वरन दुनिया में भी अपनी पहचान बनाई। ऐसी शख्सियतों में एक चित्रकार हैं सुभाष केकरे जिन्होंने चित्रकला के क्षेत्र में ” मॉडर्न आर्ट” शैली को अपने ब्रश और रंगों से केनवास पर कल्पनाओं में उतार कर अपनी पहचान कायम बनाई। ग्वालियर से कोटा केंदीय विद्यालय में चित्रकला के लेक्चरर बन कर आए तो कल्पना भी नहीं थी कि वह हाड़ोती के ही होकर रह जायेंगे और कला में नाम और सम्मान कमाएंगे।

गौरव की बात है कि इनकी बनाई गई कलाकृतियां बुलगारिया, बर्लिन और मास्को सहित अन्य देशों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनियों में प्रदर्शन के लिए गई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से जहां इनको प्रोत्साहन मिला वहीं वाशिंटन कला दीर्घा, पेरिस कला दीर्घा एवं जापान कला दीघा में इनकी कृतियां स्थाई तौर पर चयनित कर प्रदर्शित की गई हैं।

आपने उज्जैन में 2019 में कलावती न्यास द्वारा आयोजित 24 वें ” इंटरनेशनल आर्ट कैंप ” में भाग लेकर कला का प्रदर्शन किया। इसी प्रकार आगामी वर्ष 2020 में उज्जैन में आयोजित ” इंटरनेशनल ऑन लाइन आर्ट्स फेस्टिवल” में भाग लेकर मॉडर्न आर्ट के जोहर दिखाए। चित्रकार ने अब तक की कला यात्रा में देश के विभिन्न शहरों में 4 एकल चित्रकला प्रदर्शनियां लगाई , 6 चित्रकारों के समूह के साथ कला का प्रदर्शन किया एवम 14 आर्ट्स कैंपस में भाग लिया।

आपकी कलाकृतियां भारत के राजभवन नई दिल्ली, राष्ट्रीय ललित कला अकादमी, नई दिल्ली, साहित्य कला परिषद , नई दिल्ली, राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर , सहित देश और विदेशों में कई प्रमुख भवनों में स्थाई रूप से प्रदर्शित की गई हैं।

मेरे जनसंपर्क अधिकारी कार्यकाल में जब कोटा में कला दीर्घा का शुभारंभ करने के समय तत्कालीन जिला कलेक्टर जे.सी.महांती ने भारत वर्ष के चित्रकारों की पेंटिंग्स स्थाई प्रदर्शन के लिए आमंत्रित की थी उस समय इन्होंने जिला प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिला कर रात – दिन काम किया और अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया था। जिला प्रशासन ने आपके उत्कृष्ठ योगदान के लिए सम्मानित भी किया। आपको कई बार विभिन्न कला संस्थाओं द्वारा राज्य और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।

धीर – गंभीर और शांत स्वभाव के सुभाष केकरे का जन्म ग्वालियर में 8 जुलाई 1947 को हुआ। आपने 1969 में कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स, ग्वालियर से फाइन आर्ट्स में
डिप्लोमा और 1990 में जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से चित्रकला में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। आपसे मॉडर्न आर्ट की शिक्षा प्राप्त कई कई स्टूडेंट्स इस कला क्षेत्र में आगे बढ़े हैं। वर्तमान में आप निरंतर मॉडर्न आर्ट की साधना में लगे हुए हैं।

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