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केरल में भी हैं दुनिया के खूबसूरत समुद्र बीच

आइये ! समुद्र तटीय राज्यों की यात्रा पर आपको ले चलते हैं दक्षिण भारत के केरल राज्य की सैर पर, जो सैलानियों के मध्य खासा लोकप्रिय है। केरल राज्य में 590 कि.मी. लम्बी समुद्रीयतट रेखा पर समुद्र, समुद्रतट, वन, वन्यजीव, झरनें आदि मनोरम प्रकृति के सुरम्य दृश्य सैलानियों को न केवल मौन आमंत्रण देते हैं, वरण उन्हें भरपूर आनन्द, मस्ती, मनोरंजन का असीम सुख भी प्रदान करते हैं। सैलानियों के लिए रोचक,रोमांचक,मनोरंजक और आश्चर्यचकित कर देने वाला हर दृष्टि से सम्पन्न केरल पुरानी एवं अधुनातन संस्कृति का सुन्दर समन्वय है । यहां की ऐतिहासिक, प्राकृतिक एवं धार्मिक सम्पदा तथा समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराओं ने केरल को समृद्ध बनाने में जहाँ अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है वहीं पर्यटन विकास के नए द्वार भी खोलें हैं। यहां हम आपको करा रहे हैैं केरल के खूबसूरत तटों -बीचेज की सैर।
विश्व प्रसिद्ध कोवलम बीच।

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यदि आपका दिल चाहता है-समुद्री बीच पर रेत पर धूपस्नान और रेत की मनभावन आकृतियां बनाने को,समुद्र के किनारे तट पर बॉलीबॉल, फुटबाल खेलने और पतंग उड़ाने को , समुद्र में डुबकी लगा कर स्न्नान करने और तैरने,एक दूसरे पर पानी उछाल कर मस्ती और अठखेलियाँ करने , किनारे जल में खड़े होकर प्रेम मुद्रा में फोटो खिंचाने और जल का आनन्द लेने को, जड़ी-बूटियों के तेल-उबटन की शरीर पर मालिश कराने को, चट्टानों पर खड़े होकर या बैठ कर समुद्र और चारों ओर बिखरी रमणीयता को निहारने,तट पर आरामदायक लंबी कुर्सी पर अधलेटे होकर समुद्र में उठती-गिरती लहरों के आनन्द के साथ नारियल पानी, बीयर अथवा कॉफी की चुस्कियों का और लजीज समुद्री भोजन का लुत्फ उठाने को, तट पर पैदल घूमने और परम्परागत हस्तशिल्प वस्तुओं आदि की खरीददारी कर शॉपिंग का सपना पूरा करने को, विशिष्ट सांस्कृतिक कार्यक्रम और कैटामारैन क्रूजिंग का लुत्फ लेने को और साथ ही समुद्र के जल के अंदर साहसिक क्यूबा ड्राइविंग कर जलीय जंतुओं के साथ तैराकी का असीम कल्पनाओं का आनन्द लेने और एक नई दुनिया की सैर करने को तो केरल की बीच आपके लिए आदर्श स्थल हैं। ऐसे ही और अनेक विविध आकर्षणों एवं मनोरंजन से भरपूर समुद्री बीच पर अविस्मरणीय पलों-क्षणों को जीना चाहते हैं तो आइए आपको को ले चलते हैं, केरल की हसीन वादियों के मध्य स्थित विश्व प्रसिद्ध कोवलम बीच पर।

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प्रकृति के भरपूर सौन्दर्य से आप्लावित केरल के समुद्री तटों की चर्चा चलती है तो कोवलम तट का नाम सबसे ऊपर आता है। यह बीच 17 किलोमीटर लंबी कॉस्ट लाइन बीच है। अपनी अनन्य विशेषताओं से यह तट अंतर्राष्ट्रीय मान्यता रखता है। ऊंचे-ऊंचे नारियल के दरख्तों की लंबी कतार समुद्र की सुंदरता को कई गुणा बढ़ा देती हैं। इस समुद्र तट पर विशाल चट्टानी अट्टालिका बन जाने से यह बीच तीन बीचों में विभक्त हो गया है। समुद्री बीच,लाइट हाउस बीच और हावा बीच। तीन बीच होकर भी भी एक विशाल बीच का ही आभास कराते हैं। इनकी शांत जलराशि की खूबसूरती देखते ही बनती है और समुद्र में स्नान के लिए बेहतरीन जगह है। यहां रेत पर धूपस्नान के समय सूर्य की धूप इतनी चुभने वाली होती है कि मिनटों में त्वचा पर धूप की तेजी महसूस होने लगती है। यह तट विश्वभर के पर्यटकों का सर्वाधिक पसंदीदा तट रहा है।

सबसे बड़ा लाइटहाउस बीच कोवलम का आकर्षण और बेहतरीन समुद्री तट है, जिसकी विशेषता यहां 35 मीटर लंबा लाइटहाउस है। इसकी वजह से ही इस तट का नाम लाइटहाउस बीच रखा गया है। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए यह स्वर्ग से कम नहीं है। सबसे ज्यादा विकसित होने से यह लोकप्रिय है और बहुत हद तक विदेशी सैलानियों को अपनी और आकर्षित करता है। यहां की चमकदार रेत, नीला एक्वामेरीन पानी, आकर्षक लहरे पर्यटकों को प्रभावित करती हैं। बीच की यात्रा के दौरान यहां सैलानी सर्फिंग, सनबाथिंग, तैराकी, बीच वॉलीबॉल जैसी गतिविधियों का आनंद लेते हैं। यहाँ स्थित कृत्रिम ऑफ-शोर कोरल रीफ देखने योग्य स्थान है। यह एक पारिस्थितिकी सुरक्षा और सुधार के लिए एक अद्भुत परियोजना है, जिसे केरल सरकार द्वारा हार्बर इंजीनियरिंग विभाग के सहयोग से चलाया जा रहा है।यहां के रीफ(चट्टान) को बनाने के के लिए जिस सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है वो मछली पकड़ने और समुद्री आवास के लिए बहुत ही उपयोगी है। मानव निर्मित ये चट्टाने सर्फिंग के अवसर प्रदान कर कोवलम पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक हैं। आप ने कोवलम में छुट्टियों की योजना बनाई हैं, तो इस कृत्रिम ऑफ-शोर कोरल रीफ पर जाना न भूलें। लाइटहाउस बीच पर स्थित जर्मन बेकरी के लजीज व्यंजनों का स्वाद लेना नहीं भूलें। सस्ती कीमतों पर शानदार व्यंजनों का नाश्ता वाकई कमाल का होता है। यहां बनने वाले पेनकेक्स, मलाईदार मिल्कशेक, कॉफी, पेस्ट्री, मसालेदार पिज्जा आपके जायके को यादगार बना देंगे।

लाइटहाउस बीच से थोड़ा कम, पर कोवलम का हावा समुद्री तट पर्यटकों के मध्य काफी लोकप्रिय है। यहां आने वाले सैलानी इस बीच की सुंदरता की चर्चा किये बिना नहीं रहते हैं। खूबसूरत हावा बीच लाइटहाउस बीच के ठीक सामने स्थित है और देश में पहले श्टॉपलेस बीचश् का दर्जा मिला हुआ है। यह समुदी तट यूरोपीय महिलाओं का पसंदीदा समुद्र तट है जो यहां सनबाथिंग के लिए आना पसंद करती हैं। हालांकि अब यहां टॉपलेस हो कर स्नान करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन यहां पर्यटकों का आना कम नहीं हुआ है। यहाँ कुछ निजी रेटोरेंट्स को अनुमति दी गई हैं, आप इनमें लजीज व्यजंनों का आनंद उठा सकते हैं।

यह तट भी बहुत हद तक सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। अरब सागर की अनंत दूरी को यहां से देखना काफी रोमांचक एहसास कराता है। प्राकृतिक दृष्टि से यह काफी खास है। बाकी तटों की तुलना में काफी शांत है, अगर आप एकांत में कुछ समय बिताना चाहते हैं तो यहां आ सकते हैं। चूंकि इस समुद्र तट का किनारा थोड़ा चट्टानी है इसलिए यहां अकेले स्नान न करने की सलाह दी जाती है।

दोपहर ढलने के बाद से ही कोवलम बीच पर चहल-पहल शुरू हो जाती है जो देर रात तक बनी रहती है। बीच परिक्षेत्र के अंतर्गत आयुर्वेदिक हेल्थ रिजॉर्ट,शॉपिंग जोन, स्विमिंग पूल, योग एवं मेडिटेशन केंद्र और आयुर्वेदिक मसाज की बेहतरीन सुविधाएं हैं। यहाँ औषधीय पार्क , खूबसूरत सागरिका मेरीन रिसर्च एकुरेम एवं किड्स एन्जॉय जोन, भी दर्शनीय हैं।

पर्यटकों के ठहरने के लिए यहाँ पाँच सितारा होटल से लेकर हर प्रकार के बजट होटल एवं कॉटेज उपलब्ध हैं। सैलानी कम बजट के कॉटेज में भी भरपूर आनंद ले सकते हैं। होटलों और कैफेटीरिया में कांटीनेंटल भोजन से लेकर दक्षिण भारतीय व्यंजन तक परोसे जाते हैं। यहाँ मिलने वाला समुद्री भोजन इतना लजीज होता है कि उसका स्वाद सालों तक याद रहता है।

असीम सुंदरता लिए विश्व लोकप्रिय कोवलम बीच केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से महज 16 किमी दूर है और यहां पहुंचना बहुत आसान है। लेकिन, यदि आप छुट्टियों पर हैं तो कोवलम को केंद्र बना कर तिरुवनंतपुरम शहर को भी देखने का कार्यक्रम बना सकते हैं, जो आपके लिए अच्छा अनुभव रहेगा। कोवलम का नजदीकी रेलवे रेल्वे स्टेशन, तिरुवनंतपुरम सेंट्रल एवं अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट महज 16 किमी पर तिरुवनंतपुरम में स्थित हैं।

पूवार बीच
कोवलम से दक्षिण में मात्र 12 किमी दूरी पर स्थित यह बीच अरब सागर में गिरने वाली नेय्यार नदी के मुहाने पर स्थित है। इस इलाके में नौकायन करना अद्भुत अनुभव प्रदान करता है। यहां बैकवाटर्स और बड़ी संख्या में विशिष्ट जीवजंतुओं का शानदार नजारा सैलानियों को लुभा लेता है। बीच की सुनहरी रेत इसे बेहतरीन पिकनिक स्थल बना देती है। यहाँ बहुत ही कम दरों पर बोट में घूमने का मजा ले सकते हैं।तिरुवनंतपुरम जिले में कोवलम से 12 किमी दक्षिण स्थित यह स्थल तटवर्ती ग्रामीण जीवन की झलक देखने के लिए मुफीद है। इस खूबसूरत स्थल की लोकप्रियता हर साल बढ़ती जा रही है।यहाँ पहुँचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन एवं एयरपोर्ट करीब 23 किमी दूर तिरुवनंतपुरम है।
बेकल फोर्ट बीच

प्राकृतिक सुंदरता, समुद्र तट पर खड़ी ढाल वाली पहाड़ी पर स्थित विशाल बेक्कल किले का अद्भुत दृश्य,ऑब्जर्वेशन टावर में झांकने के सुंदर झरोखे और लैटेराइट निर्मित स्थापत्य कला का खूबसूरत नमूना रॉक गार्डन जैसी अनेक खूबियां अपने में समेटे इस बीच पर घूमने के लिए सैलानी बड़ी संख्या में पहुँचते हैं। बीच के किनारे बेहतरीन रख-रखाव वाला बेक्कल किला होने से से इसे बेकल फोर्ट बीच कहा जाता है। केरल के उत्तरी जिले कासरगोड से 16 किमी दक्षिण में यह किला केरल के सबसे बड़े किलों में आता है। किला समुद्र तल से 130 फीट की ऊंचाई पर है और 35 किमी की मुख्य मूमि पर स्थित है। स्लैब से पॉलीगोनल (बहुभुजीय) स्वरूप में निर्मित यह किला केरल के कुछ अति लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शुमार है। अनेक कारणों से यह स्थल लोकप्रिय है। अपने स्थापत्य के विख्यात आंजनेय मंदिर जिसमें लैटराइट की बनी दो तेय्यम मूर्तियां मुख्य आकर्षण हैं। टीपू सुल्तान द्वारा बनवाई गई एक प्राचीन मस्जिद और बहुत से भूमिगत मार्ग भी यहां के महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल हैं। पार्किंग परिक्षेत्र में समुद्र तट पर शानदार वॉक वे के किनारे पेड़ लगाए गए हैं, जिससे समुद्र पर टहलना और प्रकृति के सुंदर दृश्य सुकून प्रदान करते हैं। यहाँ की रात्रि देखते ही बनती है जब संपूर्ण इलाका खास लाइटों से रोशन होता है, जो यहां की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। किले को सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित टिकिटलेकर देखा जा सकता है। यहाँ पहुँचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन कासरगोड, कोष़िक्कोड- मंगलूर-मुम्बई रेल मार्ग पर स्थित हैं।

तलिक्कुलम स्नेहतीरम बीच
केरल के तृश्शूर शहर से 25 किमी दूरी पर अपने कुदरती परिवेश और समुद्र तट के शानदार नजारों के लिए जाना जाता है। यह केरल के सबसे बेहतरीन रखरखाव वाले समुद्र तटों (बीच) में से एक है। सूर्यास्त खास तौर पर मनोरम होता है और लोग यहां इस नजारे को देखने बड़ी संख्या में जुटते हैं। नजदीकी पार्क बच्चों की गतिविधियों से गुलजार रहता है और कभी-कभी यहां पास के मंच पर संगीत कार्यक्रम का भी आयोजन होता है। हर समय यहां का वातावरण आपका स्वागत करता हुआ प्रतीत होता है और यह इस इलाके का एक खासा पसंदीदा पर्यटन स्थल है। नजदीकी रेलवे स्टेशन 16 किमी दूर तृश्शूर स्टेशन है।

पय्याम्बलम बीच
बेहद खूबसूरत रखरखाव वाले पय्याम्बलम बीच की सुंदरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसके खूबसूरत पानी के दृश्य कई दक्षिण भारतीय फिल्मों में फिल्माये गए हैं। एडवेंचर प्रेमियों के लिए यह स्थान सर्फिंग और स्विमिंग के लिए विख्यात है। यह शांत गंतव्य आपको बेहद सुकूनदायी पारिवारिक पिकनिक स्थल मुहैया करता है। कण्णूर शहर के निकट होने से यह स्थान पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों का भी पसंदीदा स्थल है। यहां पहुँचने के लिये नजदीकी रेलवे स्टेशन 2 किमी दूर कण्णूर है।

मुषप्पिलंगाड़ बीच
सैलानियों के लिए अनन्त मनोरंजन का खजाना समेटे यह खूबसूरत बीच जीप सफारी,तैरने और वाटर स्पोर्ट्स का आनंद प्रदान करता है। बीच की काली चट्टानें तट को गहरी लहरों से बचाती हैं,इस वजह से यह समुद्र में तैरने का आनन्द लेने वालों के लिए स्वर्ग कहा जाता है। करीब 4 किलोमीटर लंबा यह बीच जीप सफारी के लिए भी प्रसिद्ध है,जहाँ सैलानी जीप या कार से ड्राइव करते हुए खूबसूरत मलाबार के विहंगम तट के नजारे का मजा ले सकते हैं। सफारी के दौरान रास्ते की झोपड़ियों में मिलने वाले स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठा सकते हैं। मनोरंजन की सीमा यहीं खत्म नहीं होती, सैलानी यहाँ पेराग्लाइडिंग, पेरासेलिंग ,माइक्रो लाइट फ्लाइट्स और वाटर स्पोर्ट्स पावर बोटिंग एवं आम कैटामरन राइड का भरपूर आनंद उठा सकते हैं।साफ-सुथरे और अच्छी रख-रखाव वाले इस तट पर मनोरंजन करते हुए अपना वक्त आराम से बिता सकते है। आकर्षक गतिविधियों वाला यह बीच कण्णूर के तलश्शेरी से लगभग 7 कि.मी दूर स्थित है। बीच कण्णूर मुख्य रेलवे स्टेशन से 16 किमी एवं तलश्शेरी स्टेशन से 12 किमी की दूरी पर स्थित है। समीपस्थ इंटरनेशनल एयरपोर्ट, लगभग 102 कि. मी. दूरी पर कालिकट (कोष़िक्कोड) में है।

वरकला बीच
सैलानियों के लिए अनेक आकर्षण समेटे वरकला बीच भी बेहद खूबसूरत बीच हैं। इसमें आकर मिलने वाले अनेक प्राकृतिक झरने बीच की विशेषता है। झरनों के जल में औषधीय गुण होने से इलाज करने के काम में लिया जाता है। बीच पर कई आयुर्वेदिक मसाज केन्द्रों के कारण तेजी से एक लोकप्रिय आरोग्य केंद्र के रूप में लोकप्रिय हो रहा है। शांत और छोटे से गांव वरकला से मात्र 10 किलोमीटर पर स्थित इस बीच के बारे में माना जाता है, यहाँ समुद्र में स्नान करने से शरीर की तमाम अशुद्धियां चली जाती हैं और पाप धुल जाते हैं। इसीलिए इसे पापनासम समुद्र तट’ भी कहा जाता है। तट से कुछ ही दूरी पर एक टीले पर करीब दो हजार वर्ष पुराना विष्णु मंदिर एवं समीप ही शिवगिरि मठ ,जिसकी स्थापना महान धार्मिक सुधारक और दार्शनिक श्री नारायण गुरु द्वारा (1856-1928 ई०) ने की थी दर्शनीय धार्मिक स्थल हैं। “एक जाति, एक धर्म तथा एक ईश्वर” का मत चलाने वाले नारायण गुरु की समाधि के दर्शन करने के लिए शिवगिरि तीर्थ यात्रा का दिसम्बर माह में आयोजन प्रति वर्ष किया जाता है,जिसमें हजारों श्रद्धालु यहाँ आते हैं।ठहरने की यहाँ उत्तम सुविधा उपलब्ध है। वरकला गांव तिरुवनंतपुरम जिले में तिरुवनंतपुरम नगर से 51 कि.मी. उत्तर में स्थित हैं। वरकला से 3 किमी दूरी पर रेलवे स्टेशन उपलब्ध है।

वडकरा सैंड बैंक्स बीच
कोट्टक्कल नदी और अरब सागर के संगम को देखने के लिए इस बीच पर आते है सैलानी। । एकांत,अद्भुत शांति , शुद्ध वायु और सूर्यास्त का खूबसूरत नजारा बीच की खासियत हैं। उत्तरी केरल का छोटा सा वडकरा गॉव आनेवालों के लिए कुछ न कुछ आर्कषण रखता है। निकट ही वडक्कनपाट्टु (उत्तरी मलबार का बैले) के ऐतिहासिक नायक तच्चोली ओतेनन का जन्म स्थान है। यहां के अनेक प्रसिद्ध मंदिर उन्हें समर्पित हैं और कलरिप्पयटट में निपुण कई व्यक्ति यहां रहते हैं। मात्र एक किमी दूरी पर बड़करान जदीकी रेलवे स्टेशन है। कालिकट (कोष़िक्कोड) इंटरनेशनल एयरपोर्ट, लगभग 65 कि.मी.दूर है।
कोष़िक्कोड बीच

यहाँ के समुद्र तट से सूर्यास्त का नजारा देखने बड़ी संख्या में लोग उमड़ते हैं। प्रातः काल डॉलफिन पॉइंट तक टहलने जाएं तो निश्चित रूप से आपको खिलंदर डॉलफिन देखने को मिल सकते हैं। एक विशाल लाइटहाउस और सागर में खुलने वाले दो पोतघाट (पायर्स) पिछले 100 वर्षों से सैलानियों के स्वागत कर रहे हैं। लायंस पार्क और नजदीकी मरीन वाटर एक्वेरियम में बच्चों का जमघट लगा रहता है जो हर दिन सुबह 8.00 बजे से साँय 8 बजे तक खुला रहता है।बीच के आस-पास की झोपड़ियों में ताजे सी फुड का लुत्फ उठाया जा सकता है। कल्लुम्मक्काया (मसल यानी शंबूक) स्थानीय लोगों का पसंदीदा आहार है। कोष़िक्कोड का केरल के इतिहास में खास स्थान है क्योंकि यहीं पर वास्को-द-गामा पहली बार उतरा था और उसके बाद ऐतिहासिक मसाला व्यापार के मार्ग खुले थे। यह क्षेत्र आज भी अपने ऐतिहासिक आकर्षण से युक्त है। कोष़िक्कोड बीच अनेक चरित्रों को साकार करता है जिनसे कोष़िक्कोड इतना अनोखा और खास है। नजदीकी रेलवे स्टेशन 3 किमी दूर कोष़िक्कोड है। नजदीकी एयरपोर्ट कालिकट इंटरनेशनल एयरपोर्ट करीब 29 कि.मी.हैै।

डॉ. प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार
1-F-18, आवासन मंडल कॉलोनी,कुन्हाड़ी
कोटा(राजस्थान)
9928076040
[email protected] com

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