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‘केशव सृष्टि के परदे पर’ भूमि पुत्रों की फिल्म

यह एक ऐसी जीवंत फिल्म थी जिसके कई नायक और नायिकाएं थी, कोई खलनायक नहीं था, हर नायक नायिका की अपनी कहानी थी, हर पात्र मुंबई के सुदूर वनवासी गाँव से भी आया था तो देश के किसी बड़े कॉर्पोरेट में ऊंचे पद पर काम करने वाला भी था, गाँव का सामान्य पढ़ा लिखा युवक भी था तो आईआईटी से निकला हुआ छात्र भी, हर कहानी पर दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट थी। ये फिल्म परदे पर नहीं बल्कि सीधे मंच पर देखी जा रही थी, केशव सृष्टि के मंच पर। इस फिल्म के निर्माता निर्देशक हैं बिमल जी केड़िया, जिन्होंने केशव सृष्टि की ग्राम विकास योजना के माध्यम से मुंबई के आसपास के वनवासी गाँवों की दशा और दिशा बदलने का जो संकल्प ले रखा है उसमें वे जी जान से जुटे हैं, उनके इस भागीरथी संकल्प ने जो आकार लिया है वही मुंबई के यशवंत भवन में आयोजित केशव सृष्टि के स्नेह मिलन समारोह में प्रत्यक्ष देखने को मिला।


कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि सुदुर गाँवों से आए वनवासी युवक और किशोर कितनी निष्ठा, संकल्प और समर्पण के साथ अपने गाँव के विकास के लिए जुटे हुए हैं। समस्याओँ और अभावों से जूझते अपने गाँवों के भाग्य बदलने का जो पुरुषार्थ ये युवक युवतियाँ कर रहे हैं से ही उन्होंने मराठी भाषी होते हुए भी हिंदी में आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किया। अपने गाँव और अपने काम को लेकर उनके अंदर जो गर्व और समर्पण की भावना थी उसने सभी श्रोताओं को रोमांचित कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्री माधव बर्वे द्वारा प्रस्तुत भारत माता की वंदना से हुआ।

श्री कैलाश कुटकुटे ने बताया कि केशव सृष्टि के सहयोग से 51 गाँवों में 1950 बच्चे माधव संस्कार केंद्र के माध्यम से अपने अपने स्तर पर प्रतिदिन योग, देशभक्ति गीत, उद्यम प्रशिक्षण व पढाई आदि के माध्यम से जन जागरण का कार्य कर रहे हैं। कुपोषण से लेकर फलों के व जंगली वनस्पतियों के बीज कत्र करने के क्षेत्र में भी ये लोग काम कर रहे हैं। मार्च अप्रैल में ये लोग बीज एकत्री करण का कार्य करते हैं और अभी तक 5 लाख से ज्यादा बीज एकत्र कर चुके हैं। इस साल 10 लाख बीज एकत्र करने का लक्ष्य रखा है। इस क्षेत्र में 19 बाँध बनाए गए हैं जिससे 15 लाख लीटर पानी की बचत हो रही है।बच्चों को विज्ञान की शिक्षा देने के लिए नॉलेज ञन व्हील् के रुप में सुसज्जित तीन बसें प्रयोगशाला के रूप में चल रही है।

प्रज्ञा पाटिल ने बताया कि 2017 से कंप्यूटर प्रशिक्षण का कार्य चलाया जा रहा है जिससे अब तक 38 छात्रों को नौकरी मिल चुकी है और अभी 42 छात्र-छात्राएँ प्रशिक्षण ले रहे हैं।

आशा खोड़े ने बताया कि कोरोना काल में 300 गाँवों में जनजागृति अभियान चलाकर लोगों को कोरोना से बचाव का संदेश दिया। 1100 बच्चों का परीक्षण किया गया जिसमें से 15 प्रतिशत बच्चे कुपोषित पाए गए। लोगों को हेल्थ कार्ड भी वितरित किए गए। कुपोषित बच्चों के लिए 10 गाँवों में प्रयोग के तौर पर पौष्टिक लड्डू की योजना शुरु की गई है, अगर ये योजना सफल होती है तो इसका और विस्तार किया जाएगा। गाँव के दंपत्तियों को स्वच्छता को लेकर को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है और मेंदांता अस्पताल से अनुबंध कर बीमार लोगों के मुफ्त ईलाज की व्यवस्था भी की गई है। 9 से 12 साल की किशोरियों के स्वास्थ्य परीक्षण की नियमित व्यवस्था की गई है, उनकी 9 महीनों की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी तैयार की गई ।


संदेश बोटसे ने कृषि के क्षेत्र में किए जा रहे कामों की जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीणों को कृषि की नई नई तकनीक व इसके लाभों को लेकर मार्गदर्शन दिया जा रहा है और 210 एकड़ क्षेत्र में पानी की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। जव्हार क्षेत्र में 15 एकड़ क्षेत्र में बाँस के पेड़ लगाए गए।

श्री दिलीप घटाल ने बताया कि श्री गौरव श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में ग्रीन गोल्ड योजना के तहत विक्रमगढ़ तहसील में दस गाँवों में महिलाओं को बाँस की राखी, कंडील आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया गया और 50 हजार राखी व 2 हजार कंडील बेचे गए। इस तरह इन महिलाओं ने घर बैठे 12 लाख का व्यापार किया। ये कार्य 15 गाँवो में 500 महिलाओं द्वारा किया जा रहा है।

वैशाली गावित ने मंगल फायबर योजना की जानकारी देते हुए बताया कि बताया कि श्री मुकेश पाध्या के मार्गदर्शन में इसके तहत 4 हजार राखी और 100 हैंडबैग तैयार किए गए। ये बैग कोटक महिंद्रा बैंक द्वारा खरीदे जाते हैं।

प्लास्टिक मुक्त गाँवों के लिए 50 गाँवो का चयन कर प्लास्टिक का उपयोग पैवर ब्लॉक बनाने के लिए किया जा रहा है।

आदर्श गाँव योजना की जानकारी देते हुए श्री विजय धापसी ने बताया कि क्षेत्र के चार गाँवों को आदर्श गांव में बदल दिया गया है । वर्ष 2022 तक 11 आदर्श गाँव बनाने की योजना है। आदर्श गाँव में पूरे गाँव को विवाद मुक्त, व्यसन मुक्त बनाया जाता है।

ग्राम विकास योजना से कैसे लोगों का जीवन बदल रहा है इसका उदाहरण है डोंगरी गाँव, ये गाँव पहाड़ी के ऊपर बसा है और यहाँ की महिलाएँ दूर से बस पीने इतना ही पानी भरकर ला पाती थी। गाँव के आदमी की कमाई बमुश्किल हजार रुपया महीना था। केशव सृष्टि ने ऐसे 60 गाँवों को गोद लिया और कैस्टस कंपनी के सहयोग से सौर उर्जा संयंत्र लगाए । इनके माध्यम से ड्रिप सिंचाई की सुविधा मिली और इसका फायदा ये हुआ कि गाँव के लोगों की औसत आमदनी हजार रुपये से बढ़कर दस हजार रुपये हो गई।

सचिन पाचलकर ने बताया कि 60 गाँवों में विवेकानंद शक्ति केंद्र के माध्यम से युवा सप्ताह में एक aबार एकत्र होते हैं और सभी आपस में खेलते हैं,गाँव के उत्सव मिलकर मनाते हैं और गाँव में सफाई अभियान चलाते हैं। 12 जनवरी को विवेकानंद जयंती पर 1800 युवकों ने एक साथ भाग लिया।

आईआईटी रुड़की के छात्र रहे श्री अंशुमान लाट ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि हमने यूआरसी यानी अर्बन रुरल कनेक्टिविटी माध्यम से कई प्रयोग किए। शहर के संपन्न वर्ग के लोगों को गाँव के लोगों से जोड़ने के लिए उनको गाँव में ले जाकर गाँव वालों के साथ साल भर में 4 उत्सव, दीवाली, जन्माष्टमी, भारत माता का पूजन गाँव के लोगों के साथ मनाए। दुनिया की हर सभ्यता से किसी न किसी नदी का नाम जुडा होता है। नदी नहीं बची तो सभ्यता और संस्कृति बी नहीं बचेगी। हमने गाँवों में नदी को बचाने का संकल्प लिया है। जव्हार क्षेत्र में 25 से 30 हजार मिलीमीटर बारिश होने के बावजूद इस क्षेत्र में पानी की समस्या रहती है। हमने अपने अभियान से 7 गाँवों मे कुओं क रिचार्ज किया, 20 गाँवों में जो लोग पहाड़ों पर रहते हैं उनको पानी की सुविधा उपलब्ध कराई। इस कार्य में टाटा कैपिटल ने हमें आर्थिक सहायता दी।

अंकुश अग्रवाल ने बताया कि कोरोना काल में गाँव के लोगों को गाँव की आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से फर्स्ट ऐड का प्रशिक्षण दिया। गाँव के लोगों से उनके ही घर के सामने उनसे ही गंदे पानी को सोखने वाले गढ़ढे खुदवाकर उन्हें मेहनताना भी दिया गया। इसका नतीजा ये हुआ कि लोगों के घरों का पानी बहने की बजाय उस गढ्ढे में एकत्र हो जाता है। कोरोना काल में जब स्कूल बंद थे तो एक प्रयोग किया गया कि गाँव में जो लड़के-लड़कियाँ पढ़े लिखे थे उन्हें छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया और इसके शानदार परिणाम सामने आए।

इन गाँवों में स्वास्थ्य के लिए कार्य कर रहे श्री कृष्ण गोपाल मंत्री ने कहा कि बिमल जी केड़िया की वजह से हम लोग इन गाँवों और ग्रामवासियों से जुड़ पाए। वर्ष 2018 में एक विचार आया कि हम लोग गाँवों में जाकर इन लोगों से मिलते हैं तो क्यों न गाँवे के लोगों को अपने घर बुलाकर एक नई शुरुआत की जाए। अगस्त 2018 में जब भयंकर बारिश हो रही थी तो गाँवों से 60 कार्यकर्ता मुंबई आए और अलग अलग घरों में सभी परिवारों के साथ रहे। चिंचवड़ के तीन युवा मेरे घर आए। हम जब गाँव में वृक्षारोपण के लिए गए तो मेरे साथ फिलिपिंस से आए मेरे परिवार के लोग और उनकी 9 साल बच्ची भी साथ थी। उसे ये देशकर आश्चर्य हुआ कि हम लोगों ने गाँव के लोगों के साथ उनके घर में भोजन किया।

श्री मंत्री ने बताया कि उनकी श्रीमती ने 250 महिलाओँ का एक वाट्सप ग्रुप बनाया है जिसने केशव सृष्टि के इस अभियान के लिए 15 लाख रुपये एकत्र किए।

उन्होंने कहा कि वनवासी हनुमान जी की तरह हैं हमें उनको उनकी शक्ति का एहसास भर कराना है, उनके अंदर काम के प्रति लगन, सत्यनिष्ठा और संकल्प हनुमानजी की तरह ही है।

श्री मंत्री ने कहा कि अगर इंटरनेट का 5जी आएगा तो तकनीकी सुनामी आना तय है अगर हमको इससे बचना है तो ‘पाँच जी’ गाय, गोबर, गीता गायत्री और गाँव ही हमको बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ‘पाँच ज’ यानी जल, जमीन, जंगल, जानवर और जलवायु को हम बचा पाए तो ही हम बच सकेगें।

बिमल जी केड़िया ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि डोंगरीपाड़ा के कई बड़े किसानों ने मुझे शिकायती लहजे में कहा कि आपकी वजह से हमारे लिए समस्या पैदा हो गई है। उनका कहना था कि आपने गाँव के लोगों को इतना आत्म निर्भर बना दिया है कि अब हमें गाँव में मजदूर नहीं मिलते हैं। उन्होंने बताया कि राम मंदिर अभियान के लिए जब हम इन वनवासी लोगों के पास गए तो सबने पूरी श्रध्दा के साथ सहयोग निधि में योगदान दिया।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के श्री अभिजीत पाटिल ने बताया कि बैंक ने क्षेत्र के ग्रामीणों की सुविधा के लिए मिनी बैंक शुरु किए हैं जिसका अच्छा परिणाम सामने आया है।

महाराष्ट्र व गुजरात के संघ के अधिकारी श्री यशवंत चौधरी ने कहा कि संघ जो काम करता है वह संघ का नहीं बल्कि समाज का काम होता है। हम तो उसमें निमित्त मात्र बन जाते हैं।

इस अवसर पर वर्ष 2019 का केशव सृष्टि नाना जी देशमुख पुरस्कार श्री गौरव श्रीवास्तव को, 2020 का पुरस्कार श्री अंकुश अग्रवाल व श्रीमती राधिका अग्रवाल को व 2021 का पुरस्कार श्री कृष्ण गोपाल मंत्री व अमेय पत्की को संयुक्त रूप से दिया गया।

कार्यक्रम में एलआईसी के प्रबंध संचालक श्री सिध्दार्थ मोहंती, फेडरल बैंक के प्रबंध निदेशक श्री आशुतोष जी मुंबई के नगर संघ चालक श्री सुरेश भगेरिया, कोंकण प्रात के संघ चालक श्री सतीश मोढ़, दिव्य विद्यालय ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री एम एल सिंघानिया, उद्योगपति श्री अशोक गोयल, जाने माने विचारक श्री रतन शारदा जाने माने चार्टर्ड एकाउंटेट श्री एस एस गुप्ता, स्टेट बैंक के श्रीआशुतोष खजूरिया, स्टार यूनियन सन डाई ची के श्री साईम कुमार, श्री लोकनाथ पांडा, श्री शैलेष चित्रे, श्री दीपक पाटिल श्री दिनेश मोदी आदि उपस्थित थे।

कार्यक्रम का सफल संचालन श्री संतोष गायकवाड़ ने किया।

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