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अमेरिका में हिन्दी भाषण प्रतियोगिता में उत्साह से भाग लिया बच्चों ने

एक ओर भारत में हिन्दी को कमजोर करने की साजिश चल रही है वहीं दूसरी ओर अमेरिका में बसा भारतीय समुदाय अपनी अगली पीढ़ी का भविष्य हिन्दी में देख रहा है। अमेरिका के कई शहरों में हिन्दू मंदिर हिन्दी शिक्षण केन्द्रों की भूमिका भी निभा रहे हैं। व्यक्तिगत स्तर पर भी कई लोग, जिनमें हिन्दी के लेखक भी हैं, इस महत कार्य में अपना योगदान दे रहे हैं। आर्केडिया,कैलिफोर्निया में बसी हिन्दी की रचनाकार, रचना श्रीवास्तव भी ऐसे ही लोगों में हैं जो लेखन के साथ -साथ हिन्दी शिक्षण के क्षेत्र में भी कार्यरत हैं। वे अहिन्दी भाषी बच्चों को हिन्दी सिखाती हैं। पिछले दिनों साहित्य- प्रवाह ट्रस्ट , बडॊदरा के सहयोग से उन्होंने बच्चों की हिन्दी भाषण प्रतियोगिता का सफ़ल आयोजन किया।

यह प्रतियोगिया वरिष्ठ और कनिष्ठ दो वर्गों में आयोजित की गयी। वरिष्ठ वर्ग में भाषण प्रतियोगिता और कनिष्ठ वर्ग में कविता वाचन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सभी ने बहुत बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता के लिए बच्चों का उत्साह देखते बनता था। कार्यक्रम शाम ४ बजे प्रारम्भ हुआ सर्व प्रथम रचना श्रीवास्तव ने आकर सभी उपस्थित लोगों को अपने बच्चों को हिन्दी सीखने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए धन्यवाद किया। इन्होने हिन्दी के महत्त्व पर भी प्रकाश डाला। अपने बारे में बोलते हुए रचना ने कहा कि वह पिछले १३ सालों से अमेरिका में रह रही है और बहुत से हिन्दी भाषी ,गैर हिन्दी भाषी तथा अमेरिकन को हिन्दी पढ़ाती आयीं। इसके बाद रचना ने साहित्य प्रवाह बड़ोदरा (गुजरात ) की मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ नलिनी पुरोहित जी का ह्रदय से आभार प्रकट करते हुए कहा कि नलिनी जी भारत में और भारत से बाहर भी हिन्दी के प्रचार के लिए बहुत उत्तम कार्य कर रही है।आर्केडिया कैलिफोर्निया में ये प्रतियोगिता करवाने के लिए हमें मौका दिया इसके लिए नलिनी जी का बहुत बहुत धन्यवाद।

तत्पश्चात प्रतियोगिता प्रारम्भ हुई। इस प्रतियोगिता के लिए रचना श्रीवास्तव और सीमा खत्री दो निर्णायक थे। इन्होने बच्चों के उच्चारण ,समय ,भाव,बोलने का तरीका ,याद कितना है इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए अंक दिए। इस प्रतियोगिता में एक मुख्य बात ये थी कि बच्चों के भाषण या कविता बोल लेने के बाद उनसे प्रश्न किये गए ये देखने के लिए कि जो बच्चे बोल रहे हैं उसका मतलब भी समझते हैं या नहीं और इस बात पर भी उनको अंक दिए गए। इस प्रतियोगिता का संचालन अन्विक्षा श्रीवास्तव ने बहुत ही सुन्दर तरीके किया। यहाँ ध्यान देने की बात ये भी है कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चे मुख्यतः अहिन्दी भाषी परिवारों से थे। जिनके घरों में हिन्दी बिलकुल भी नहीं बोली जाती है। इस प्रतियोगिता में बच्चों को बोलने के लिए २ मिनट का समय निर्धारित किया गया था। छोटे बच्चों में प्रथम पुरस्कार अदित्री सेन तथा दूसरा पुरस्कार ऋतिका हरीश कृष्णन को और विशेष पुरस्कार निरंजन महेशवरन को मिला। वरिष्ठ वर्ग में दो बच्चों को प्रथम स्थान मिला जिनके नाम हैं अमिरुथा (अमृता) अमुधरासन और स्वरित श्रीवास्तव , दूसरा स्थान साधना उमाशंकर तथा तीसरा स्थान महास्विन को मिला। विशेष पुरस्कार संजीव महेशवरन को मिला। इसके अलावा शुद्ध उच्चारण के लिए अमिरुथा (अमृता ) अमुधरासन और हिन्दी में विशेष उन्नति करने के लिए महास्विन को पुरस्कार प्रदान किया गया। इस प्रतियोगिता में ५ साल से ले कर १२ साल तक के बच्चों ने भाग लिया।

भारत से आये एक्सपोर्ट प्रमोशन कौंसिल ऑफ़ इण्डिया (चेन्नई डिवीज़न )के सेवानिवृत श्री पी नटराजन और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती पार्वती नटराजन ने बच्चों को पुरस्कार वितरित किया। इस अवसर पर बोलते हुए इन्होने कहा कि जहाँ आज भारत में लोग अंग्रेजी के पीछे भाग रहे हैं वहां विदेश में रहते हुए हिन्दी को सीखना और उसके लिए इतना समर्पण रखना ये बहुत बड़ी बात है। उन्होंने आगे कहा कि हिन्दी को आगे बढ़ाने के लिए जो कार्य रचना जी कर रही हैं वह बहुत ही सराहनीय है। इनका हिन्दी के प्रति समर्पण देख कर मुझे बहुत ही अच्छा लगा। हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है,तो हम सब को हिन्दी आनी चाहिए। हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए मै रचना को धन्यवाद देता हूँ और आशीर्वाद देता हूँ कि वह ऐसे ही कार्य करती रहे। इतना अच्छा कार्यक्रम यहाँ करवाने के लिए मै साहित्य प्रवाह संस्था को भी धन्यवाद देता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि भविष्य में भी ये संस्था ऐसे कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी। कार्यक्रम के अंत में बच्चों और सम्मानीय अतिथियों के लिए जलपान की व्यवस्था थी। जिसका सभी ने खूब आनन्द लिया। सभी ने कार्यक्रम की सफलता के लिए रचना और साहित्य प्रवाह संस्था का धन्यवाद किया।

साहित्य- प्रवाह ट्रस्ट, वडोदरा २००८ से भारत और अमेरिका के विभिन्न राज्यों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार का कार्य कर रहा है । इसकी संस्थापिका डा नलिनी पुरोहित है जो एम एस युनिवर्सिटी के रसायन शास्त्र की प्रोफ़ेसर होने के साथ साथ अच्छी रचनाकार भी हैं।

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