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भुबनेश्वर में हुआ अप्रतिम भारत ग्रंथ का लोकार्पण

मुंबई के श्री भागवत परिवार द्वारा प्रकाशित अप्रतिम भारत ग्रंथ का लोकार्पण एक शानदार समारोह में भुबनेश्वर में ओड़िशा के माननीय राज्यपाल प्रो. गणेशीलाल ने किया। इस समारोह का आयोजन कादंबिनी मीडिया द्वारा किया गया था।

इस अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय ने कहा कि भारत के तत्त्व दर्शन को समझना है तो महर्षि अरविंदों की 15680 पंक्तियों वाली उनकी कविता को पढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही भारत की दृष्टि वैश्विक रही है। हम आज विज्ञान के क्वांटम युग में हैं और अब इसके माध्यम से विज्ञान वहीं पहुँचना चाह रहा है जहाँ हजारों साल पहले हमारे वैदिक ऋषि पहुँच चुके थे। उन्होंने कहा कि ये जानकर सुखद अनुभूति हुई कि मुंबई के श्री भागवत परिवार ने अप्रतिम भारत ग्रंथ के माध्यम से हमारी प्राचीन जीवन शैली, उसके मूल्यों और उनकी वैज्ञानिक दृष्टि को सामने लाने का प्रयास किया है। राज्यपाल महोदय ने कादंबिनी मीडिया, और किट http://kiit.ac.in/ व किस https://kiss.ac.in/ संस्थापक डॉ. अच्युत सामंता के को धन्यवाद दिया कि उन्होंने इतना भव्य समारोह इस पुस्तक के लोकार्पण के लिए आयोजित किया।

इस अवसर पर डॉ. अच्युत सामंता के गुरू पूज्य श्री रामनरायण दास महाराज ने कहा कि भारत त्याग और वैराग्य की भूमि है। जब हम अपने देश को भारत के नाम से पुकारते हैं तो हमारे अंदर गर्व की भावना पैदा होती है, इंडिया कहने से नहीं। त्याग से ही पूरी दुनिया में भारत की पहचान बनी है।

पुस्तक की समीक्षा करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार श्री असित मोहंती ने कहा कि इस ग्रंथ में पूरा भारत समाया हुआ है, वह भारत जिसके बारे में हम ज्यादा कुछ नहीं जानते। महाकवि रवीन्द्र नाथ टैगोर की रचना “भारत तीर्थ“ का उल्लेख करते हुए उन्होंनेल कहा कि इस पुस्तक में हमारी संस्कृति, ज्ञान, कला, अध्यात्मिकता और शिक्षा से लेकर हर विषय पर अपने अपने क्षेत्र के विद्वानों के बहुत ही गंभीर, रोचक व शोधपूर्ण आलेख हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पद्मविभूषण एवँ ओड़िया के प्रख्यात विद्वान आज के दौर में ऐसी पुस्तकों से समाज को एक नई दृष्टि मिलती है।

किट http://kiit.ac.in/ व किस https://kiss.ac.in/ के संस्थापक एवँ राज्यसभा सांसद डॉ. अच्युत सामंता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ये हमारा सौभाग्य है कि श्री भागवत परिवार के 25 सदस्य हमसे मिलने और इस पुस्तक के लोकार्पण के लिए भुबनेश्वर आए।

श्री भागवत परिवार के समन्वयक श्री वीरेन्द्र याज्ञिक ने कहा कि 20 वर्ष पहले मुंबई में श्री भागवत परिवार की स्थापना इसी उद्देश्य से हुई थी कि हम अपनी नई पीढ़ी को हमारे परंपरागत मूल्यों और जीवन दर्शन से कैसे जोड़ें। उन्होंने कहा कि इस ग्रंथ के प्रकाशन को अंतिम रुप दिया जा रहा था तब एक फिल्म अभिनेत्री के निधन की खबरें मीडिया में सुर्खियों में थी, लेकिन उसी दिन काँची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती जिन्होंने अपना पूरा जीवन भारतीय वेद-पुराणों, संस्कृत और संस्कृति की ऋषि परंपरा को समर्पित कर दिया और पैदल ही पूरे भारत की यात्रा की, उनका भी निधन हुआ मगर मीडिया में ये खबर एक दो लाईनों में ही सिमट कर रह गई। तभी हमने निर्णय लिया कि इस ग्रंथ को शंकराचार्यजी की स्मृति में उन्हीं को समर्पित किया जाएगा।

इस अवसर पर श्री भागवत परिवार के अध्यक्ष श्री एसपी गोयल ने कहा कि हमें समाज से मिलता तो बहुत है, लेकिन हम कोशिश करते हैं कि जो हमें मिला है वह दूसरों को भी मिले।

कार्यक्रम का सफल संचालन साहित्यकार श्री अशोक पाँडे ने किया, शुध्द और सहज-सरल हिंदी में इस कार्यक्रम को उन्होंने जिस तरह संचालित किया वह मुंबई से गए सभी लोगों के लिए अप्रतिम अनुभव था।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में कादंबिनी मीडिया की सुश्री इति सामंता की भूमिका उल्लेखनीय रही, वो मंच पर आने की बजाय सबसे अंतिम सीट पर बैठकर कार्यक्रम के सभी सूत्रों को जोड़ती रही।

कार्यक्रम के प्रति लोगों के उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि पाँच सितारा होटल मेफेअर का पूरा हाल भर गया था और कई लोग हाल के बाहर से कार्यक्रम का आनंद ले रहे थे।



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