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पश्चिम रेलवे के राजकोट मंडल से राजस्थान के लिए खुले वैगनों में औद्योगिक नमक का लदान

मुंबई। पश्चिम रेलवे के ज़ोनल मुख्यालय और विभिन्न मंडलों में गठित बहु-विषयक व्यावसायिक विकास इकाइयाँ (BDU) नये विचारों और पहलों को शामिल करके माल बाजार में व्यावसायिक सम्भावनाओं को बेहतर बनाने के लिए अपने हरसम्भव बेहतरीन प्रयास कर रही हैं। पश्चिम रेलवे की इन बिज़नेस डेवलपमेंट यूनिटों द्वारा माल ढुलाई करने वालों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएं प्रदान की जा रही हैं। साथ ही व्यवसाय करने में आसानी को बेहतर बनाने के लिए कई तरह की सुविधाऍं प्रदान की जा रही हैं। इसी क्रम में पश्चिम रेलवे के राजकोट डिवीजन द्वारा खुले वैगनों में औद्योगिक नमक के लदान का एक और उल्लेखनीय सौदा सुनिश्चित किया गया है।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री सुमित ठाकुर द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, खुले वैगनों BOXN में औद्योगिक नमक की लोडिंग 25 अक्टूबर, 2020 को राजकोट मंडल के लवणपुर से की गई, जो हैंडलिंग / लोडिंग के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुपालन के साथ सुनिश्चित की गई। औद्योगिक नमक लोडिंग का यह नया यातायात राजकोट डिवीजन की बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट (BDU) के कारगर प्रयासों से सम्भव हुआ। रेलवे बोर्ड द्वारा औद्योगिक उपयोग के लिए नमक के वर्गीकरण और कक्षा 120 से 100 ए में संशोधन की नीतिगत पहल को व्यापारियों द्वारा सराहा गया है। यह रेक जयपुर डिवीजन में अलवर गुड्स शेड के लिए बुक किया गया है। BOXN वैगन रेक द्वारा औद्योगिक नमक का परिवहन 3831 टन के भार के साथ 947 किलोमीटर की दूरी पर किया जा रहा है, जिससे लगभग 37.21 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।

श्री ठाकुर ने बताया कि 22 मार्च, 2020 से लागू पूर्ण लॉकडाउन और वर्तमान आंशिक लॉकडाउन के दौरान कठिनतम परिस्थितियों और विकट चुनौतियों के बावजूद, पश्चिम रेलवे ने 25 अक्टूबर, 2020 तक मालगाड़ियों के 19343 रेक लोड करके काफी सराहनीय कार्य किया है। विभिन्न स्टेशनों पर श्रमशक्ति की कमी के बावजूद पश्चिम रेलवे द्वारा अपनी मालवाहक ट्रेनों के ज़रिये देश भर में अत्यावश्यक सामग्री का परिवहन बखूबी सुनिश्चित किया जा रहा है।

इस अवधि में कुल 41.32 मिलियन टन भार वाली विभिन्न मालगाड़ियों को उत्तर पूर्वी क्षेत्रों सहित देश के विभिन्न राज्यों में भेजा गया। इनके अलावा मिलेनियम पार्सल वैन और मिल्क टैंक वैगनों के विभिन्न रेक दवाइयों, चिकित्सा किट, जमे हुए भोजन, दूध पाउडर और तरल दूध जैसी विभिन्न आवश्यक वस्तुओं की मांग के अनुसार आपूर्ति करने के लिए उत्तरी और उत्तर पूर्वी क्षेत्रों में भेजे गये। कुल 37,753 मालगाड़ियों को अन्य ज़ोनल रेलों के साथ इंटरचेंज किया गया, जिनमें 18,845 ट्रेनें सौंपी गईं और 18,908 ट्रेनों को पश्चिम रेलवे के विभिन्न इंटरचेंज पॉइंटों पर ले जाया गया।

इन मालगाड़ियों के परिचालन से कुल 3638.56 करोड़ रु. का राजस्व अर्जित हुआ। इसके अलावा 23 मार्च, 2020 से 25 अक्टूबर, 2020 तक 1.59 लाख टन से अधिक विभिन्न अत्यावश्यक सामग्री का परिवहन पश्चिम रेलवे द्वारा अपनी 632 पार्सल विशेष गाड़ियों के माध्यम से किया गया है, जिनमें कृषि उत्पाद, दवाइयां, मछली, दूध आदि मुख्य रूप से शामिल हैं। इस परिवहन के माध्यम से मिलने वाला राजस्व 53.69 करोड़ रुपये से अधिक रहा है। इस अवधि के दौरान 109 मिल्क स्पेशल गाड़ियों को पश्चिम रेलवे द्वारा चलाया गया, जिनमें 82 हजार टन से अधिक का भार था और वैगनों का 100 % उपयोग हुआ।

इसी प्रकार, 52, 500 टन से अधिक भार वाली 467 कोविड -19 विशेष पार्सल ट्रेनें भी विभिन्न आवश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए चलाई गईं। इनके अलावा, 25,000 टन भार वाले 56 इंडेंटेड रेक भी लगभग 100% उपयोग के साथ चलाए गए। पश्चिम रेलवे ने देश के विभिन्न हिस्सों में समयबद्ध पार्सल विशेष रेलगाड़ियों को चलाने का सिलसिला लगातार जारी रखा है, जिसके अंतर्गत 26 अक्टूबर, 2020 को दो पार्सल विशेष ट्रेनें पश्चिम रेलवे से रवाना हुईं, जिनमें पहली ट्रेन बांद्रा टर्मिनस से जम्मू तवी के लिए चली, जबकि दूसरी मिल्क स्पेशल ट्रेन के रूप में पालनपुर से हिंद टर्मिनल के लिए परिचालित की गई।

कोरोना वायरस के कारण पश्चिम रेलवे पर यात्री राजस्व का कुल नुकसान लगभग 3070 करोड़ रुपये रहा है, जिसमें उपनगरीय खंड के लिए 476 करोड़ रुपये और गैर-उपनगरीय के लिए 2594 करोड़ रुपये का नुक़सान शामिल है। इसके बावजूद, 1 मार्च, 2020 से 25 अक्टूबर, 2020 तक टिकटों के निरस्तीकरण के परिणामस्वरूप पश्चिम रेलवे ने 461 करोड़ रुपये के रिफंड की अदायगी सुनिश्चित की है। उल्लेखनीय है कि इस धनवापसी राशि में, अकेले मुंबई मंडल ने 224 करोड़ रुपये से अधिक का रिफंड सुनिश्चित किया है। अब तक, 71.72 लाख यात्रियों ने पूरी पश्चिम रेलवे पर अपने टिकट रद्द कर दिए हैं और तदनुसार अपनी रिफंड राशि प्राप्त की है।

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