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मेजर जनरल बक्षी का एक-एक शब्द आपको अपने भारतीय होने का अहसास कराता है

मुंबई में मेजर जनरल बक्षी आएँ और उनको सुनने के लिए लोग नहीं आएँ ये संभव ही नहीं। कॉर्पोरेट गिफ्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीजीएआई) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मेजर बक्षी को सुनना ऐसा था मानो राष्ट्रीय विचारों से लबरेज कोई गंगा बह रही है और श्रोता उस गंगा में डुबकियाँ लगा रहे हैं। मेजर जनरल बक्षी यहाँ आयोजित एक कार्यक्रम में ‘भारतीय फौज से कारोबार और उद्योग जगत क्या सबक सीखे’- विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे, उनकी आवाज़ का जादू और सेना में इतने बरसों की सेवा का ही नतीजा था कि श्रोता मंत्रमुग्ध होकर सुने जा रहे थे।

श्री बक्षी ने कहा कि भारतीय सेना आसन्न स्थिति में आए संकट से जूझने की कला जानती है, जब सेना के सामने चुनौती आती है तो कोई किंतु परंतु नहीं होता, सेना के हर अफसर को, हर जवान को अपने लक्ष्य पूरा करना ही होता है। अगर सेना के अधिकारी को ये आदेश दिया जाए कि उसे टाईगर हिल पहुँचना है तो वो ये सवाल नहीं पूछ सकता कि टाईगर हिल कहाँ है। हमें जो भी लक्ष्य दिया जाता है उसे हमें पूरा करना होता है, हमें वापस आकर ये कहने का कोई अधिकार नहीं होता कि इस वजह से वो अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाया या ऐसा होता तो मैं ऐसा कर लेता। नहीं, हम या तो लक्ष्य पूरा करके लौटते हैं या अपनी जान देकर। हम करो या मरो की रणनीति पर जीते हैं।

जबकि कारोबार जगत में लक्ष्य को हासिल करने की सुविधा, साधन और स्थितियाँ सब अनुकूल होती है या बना ली जाती है।

पाकिस्तान की चर्चा करते हुए मेजर जनरल बक्षी ने कहा कि पाकिस्तान अपने सभी पड़ोसियों के लिए एक सिरदर्द है। पूरी दुनिया में किसी देश की अपनी फौज होती है, लेकिन पाकिस्तान का मामला विचित्र है, वहाँ फौज के पास पाकिस्तान जैसा देश है। पाकिस्तान एक पागल कुत्ते की तरह बर्ताव करता है, जैसे पागल कुत्ता हर किसी को काटने दौड़ता है वही हालत पाकिस्तान की है। 30 साल पहले पाकिस्तान ने भारत पर कब्जा करने के लिए पंजाब में आतंकवाद फैलाया। जब वहाँ उसको कुचल दिया गया तो उसने अब जम्मू कश्मीर में अपना जाल फैलाया है। हमारे देश के कथिचत बुध्दिजीवी पाकिस्तान के पक्ष में दलील देते रहते हैं र चाहते हैं कि उससे बात की जाए। तो कोई ये बताए पिछले 60-70 साल से बात चल रही है क्या नतीजा निकला। उन्होंने कहा कि 1971 में हने जनरल जेएन चौधरी के नेतृत्व में पाकिस्तान को धूल चटाई। हमने पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों को घुटने पर बिठा दिया। उधर पाकिस्तान में पाकिस्तानी औरतें वहाँ के प्रधान मंत्री भुट्टो के घर चूड़ियाँ तोड़ रही थी कि हमारे खसमों को भारत से वापस लाओ।

उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई भी फौज नागरिकों पर हमला नहीं करती मगर पाकिस्तान छद्म युध्द से बम विस्फोटों और आतंकवादी गतिविधियों से हमारे देश मे 45 हजार सैनिकों और 80 हजार नागरिकों की जान ले चुका है। लेकिन पिछले तीस साल में हम पाकिस्तान को कोई सबक नहीं सिखा पाए। इस देश के लोग पाकिस्तान के हाथों इसलिए मारे जा रहे हैं कि नेताओँ को नोबुल पुरस्कार चाहिए। क्या 80 हजार भारतीय नागरिकों की जान की कोई कीमत नहीं है। उन्होंने कहा, मुंबई में ताज होटल पर हमला हुआ हमारे मेजर उन्नीथन शहीद हो गए। हमने बदले में पाकिस्तान को क्या सबक सिखाया। इज़राईल में एक को मारते हैं तो वो 100 को मार गिराते हैं। क्या हम भारतीयों का खून इतना सस्ता है कि कोई भी आकर हमें मारकर चला जाए।

उन्होंने कहा कि देश ने पहली बार सर्जिकल स्ट्राईक करके पाकिस्तान को करारा जवाब दिया और सर्जिकल स्ट्राईक के बाद हमारे डीजीएमओ ने पाकिस्तान के डीजीएमओ को फोन करके बताया कि हमने सर्जिकल स्ट्राईक कर दी है।

उन्होंने कहा कि देश की मोमबत्ती गैंग पूछती है कि मारे गए आतंकवादियों की लाशें कहाँ है। तो उनको चाहिए कि वो बालाकोट जाकर वहायं दफन लाशें गिनकर आ जाएँ।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने प्रस्ताव पारित कर स्पष्ट आदेश दिया है कि भारतीय सीमा से पाकिस्तानी फौजें हटाई जाए, लेकिन इस पर कोई बात ही नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में प्रधान मंत्री का चुनाव नहीं होता बल्कि वह फौज द्वारा चुना जाता है, इमरान खान पाकिस्तानी फौज के चुने हुए प्रधान मंत्री हैं।

उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि हम पड़डोसी नहीं बदल सकते, लेकिन हममें इतनी ताकत है कि हम अपने देश का नक्षा तो बदल ही सकते हैं। उऩ्होंने नई पीढ़ी के श्रोताओँ से आव्हान किया कि वे संकल्प लें कि आने वाले बरसों में वे पाकिस्तान के बलुचिस्तान, पख्तूनिस्तान, पंजाब और सिंध के रूप में चार टुकड़े करके दिखाएँगे।

उन्होंने कहा कि हम भारतीयों के खून में ही सदाशयता है इसलिए महमूद गजनी को 17 बार हराने के बाद भी पृथ्वीराज चौहान ने उसे जिंदा छोड़ दिया।

कश्मीर के पुलवामा में हुए हमले को लेकर उन्होंने कहा कि वहाँ पहले नियम था कि जब फौज का काफिला गुजरेगा तो कोई निजी वाहन नहीं निकलेगा। लेकिन एक बार शराब पीकर हुड़दंग करने वाले लड़कों ने जब दो बैरियरों पर गाड़ी नहीं रोकी तो तीसरे बैरियर पर उनको गोली मार दी गई। फौज के इऩ तीन जवानों को गिरफ्तार कर लिया गया इससे फौज का मॉरल गिरा।

इस पर वहाँ की सरकार ने ये नियम बदलवा दिया और उसका नतीजा ये हुआ कि पुलवामा में हमारे निर्दोष जवान शहीद हो गए।

बालाकोट की सर्जिकल स्ट्राईक की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वहाँ जो बम डाले गए थे वो इज़राईल से आए थे और उनकी कीमत एक एक करोड़ रुपये थी। इन बमों की खासियत ये है कि ये लक्ष्य को बेधने के साथ ही आसपास की सारी ऑक्सीजन सोख लेते हैं, ऐसे में इनके प्रभाव में आने वाले आदमी के फेफड़े और आँतें तक बाहर निकल आती है, ऐसे हमले से कोई जिंदा बच जाए संभव ही नहीं।

उन्होंने कहा कि कश्मीरी युवकों को फौज के खिलाफ भड़काने के लिए उनको नशा दिया जाता है और मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित किया जाकर उनकी कब्र खुदवाकर उसमें उनसे फातिहा पढ़ाया जाता है कि तू अल्लाह के नाम पर मर ही चुका है।

मेजर जनरल बक्षी ने कहा कि मैं 1990 में कश्मीर में तैनात था। वहाँ आए दिन बवाल होता था। एक बार कुछ उपद्रवियों ने फौजी बच्चों की स्कूल की बस घेर ली और बस जलाने की तैयार करने लगे। बस के साथ चल रहे सिख फौजी ने अपनी मशीन गन निकालकर 8 उपद्रवियों को वहीं ढेर कर दिया और 15 घायल हो गए तो बाकी सब सिर पर पैर रखकर भाग गए। इसके बाद फौजी के खिलाफ इनक्वायरी हुई तो मैं उसके बचाव में आगे आया। जबकि दिल्ली में बैठे अधिकारी उसके खिलाफ एक्शन लेना चाहते थे क्योंकि तक्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद और प्रधान मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का भारी दबाव था। मैने अधिकारियों कों समझाने की कोशिश की कि अगर इनको नहीं मारा जाता तो वो 50 बच्चों से भरी बस में आग लगा देते। इस पर मेरे अधिकारी ने कहा कि अगर तुमको कहा जाए कि इस स्थिति में तुम स जवान से क्या जवाब माँगोगे तो मैने कहा कि मैं उसके खिलाफ एक्शन लेते हुए कहूँगा कि जिस मशीन गन से 35- 40 आदमी मारे जा सकते थे, उससे तुमने मात्र 8 आदमी ही क्यों मारे, तुम्हारा निशाना तक ठीक नहीं है, तुम्हारे खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए। मेरी ये बात अधिकारियों को समझ में आ गई और उन्होंने उस फौजी को ऐसा ही नोटिस थमा दिया।

उन्होंने कहा कि हमारी फौज का हर जवान और हर अधिकारी न किसी सरकार के लिए काम करता है न किसी और के लिए हम सब केवल देश के लिए काम करते हैं।

कार्यक्रम में सीआरपीएफ के डीआईजी श्री रविंदन्र सिंह रौतेला ने भी संबोधित किया और कहा कि मेरे कार्याकाल में जम्मू कश्मीर में सेवाएँ देने का अनुभव आज भी रोमांचित करता है।

जनरल बक्षी के इस धाराप्रवाह भाषण को सुनने के लिए श्रोता दम साध कर बैठे रहे और सभी इस बात से अभिभूत थे कि उन्हें पहली बार हमारे फौजियों के बारे में इतना कुछ जानने को मिला। कई श्रोताओं ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सरकार को चाहिए कि जनरलव बक्षी और उनके जैसे ही अन्य फौजियों को तो देश भर के स्कूलों में छात्रों से संवाद करने भेजना चाहिए ताकि नई पीढ़ी देश की समस्याओँ को समझ सके, हमारी फौज किन विषम परिस्थितयों में काम कर सकती है ये जान सके और छात्रों में अनुशासन और देश प्रेम की भावना भी पनप सके।

इस कार्यक्रम के आयोजन में कॉर्पोरेट गिफ्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीजीएआई) के सर्वश्री शीतल शाह, उमेश सिंह, सुनील असरानी, मनोज जैन, राजेश असरानी, नलिन शाह, व साचिन महानसारिया की प्रमुख भूमिका रही।

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