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‘छत्तीसगढ़ के मांझी’ ने अकेले खड़ा कर दिया जंगल, 87 की उम्र पर भारी जुनून

रायपुर। बिहार के दसरथ मांझी की जिंदगी पर आधारित बॉलीवुड फिल्म ‘मांझी द माउंटेन मैन’ की खूब चर्चा हो रही है। माउंटेनमैन की ही तर्ज पर छत्तीसगढ़ के गेंदालाल देशमुख को ‘ट्रीमैन’ कहा जाता है। मांझी ने जैसे पहाड़ तोड़कर रास्ता बना दिया था, वैसे ही गेंदालाल ने पेड़ लगाकर जंगल खड़ा कर दिया।

दुर्ग जिले के कोड़िया गांव के रहने वाले गेंदालाल अब तक 50 हजार पेड़ लगा चुके हैं और 87 साल की उम्र में भी इस काम में जुटे हुए हैं। अब से 20 साल पहले उन्होंने अपने गांव की 5 एकड़ परती जमीन में पौधे लगाए थे, वह एरिया अब जंगल बन चुका है।

दसरथ मांझी की तरह निःस्वार्थ भाव से कर रहे इस काम के कारण इलाके में उनका बहुत सम्मान है। सरकार भी उन्हें सम्मानित कर चुकी है।

गेंदालाल ने पौधे लगाने की शुरुआत 10 साल की उम्र में प्राइमरी की पढ़ाई छोड़ने के बाद की थी। आगे उन्होंने पढ़ाई नहीं की और खेती के अलावा पेड़ों की कमाई से गुजर-बसर करने लगे। उन्होंने बताया, “खेती से अलग मैंने शुरूआत में नीम, शिवा बबूल, आम और पीपल के पेड़ अपने घर के आसपास लगाए थे। ये पेड़ मुझे पैसे से ज्यादा तसल्ली देते थे।”

देशमुख ने बताया कि वह अपने इलाके में जलभराव की समस्या से परेशान थे, जिसका एकमात्र समाधान ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना ही था।
लेकिन एक अभियान के रूप में पेड़ लगाने की प्रेरणा उन्हें अब से 35 साल पहले भागवत कथा के उस श्लोक से मिली जिसमें ‘एक पेड़ दस पुत्र के समान’ बताया गया है। देशमुख पौधे लगाना पुण्य का काम समझते हैं। वह उन्हें लगाने के बाद छोड़ नहीं देते, बल्कि बड़े होने के तक उसकी पूरी देखभाल करते हैं और उसके बाद उसकी सुरक्षा का ख्याल भी।

पेड़-पौधों के प्रति उनके लगाव का यह नतीजा है कि कोड़िया और आस-पास के गांवों में दिखने वाले ज्यादातर पेड़ उन्हीं के लगाए हुए हैं।

गेंदालाल ने पांच साल पहले कोड़िया से दुर्ग जाने वाली सड़क पर बरगद और पीपल के पौधे रोपे थे जो अब बड़े हो चुके हैं। हाल ही में उन्होंने भानपुरी-अंडा रोड पर ऐसे ढाई सौ पौधे रोपने व उन्हें पेड़ बनाने का संकल्प लिया है और उस पर काम शुरू कर चुके हैं।

प्राइमरी तक ही पढ़े गेंदालाल पेड़-पौधों की ग्रोथ और सुरक्षा के लिए कृत्रिम खाद या कीटनाशक के बजाय प्राकृतिक तरीकों से काम लेते हैं। वे औषधीय पौधों की मदद से लोगों की बीमारियों का भी इलाज करते हैं।

साभार- https://www.facebook.com/permalink.php?story_fbid=909968992389970&id=909968325723370&substory_index=0 से

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