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कई खजाने छिपे हैं रेगिस्तान के आंचल में

दुनिया के रेगिस्तान की चर्चा चलती है तो सतरंगी रंगों में नज़र आते हैं रेगिस्तान। कहीं सुनहरी रेत तो कहीं भूरी, सफेद तो कहीं काली रेत। कहीं शुष्क और गर्म तो कहीं बर्फ का ठंडा रेगिस्तान। रेत के ऊंचे-ऊंचे धोरे तो कहीं समतल रेत के मैदान। कहीं निर्जन तो कहीं आबाद रेगिस्तान। आबाद रेगिस्तान के लोगों का जीवन जितना कठीन हैं, उनकी जीवनशैली, रहन-सहन,वेशभूषा और संस्कृति उतनी ही रंगबिरंगी हैं। कई रेगिस्तान अपने गर्भ में खनिजों का भण्डार छुपाएं हैं। रेत में उगने वाली वनस्पति और जानवर भी पाये जाते हैं। कुछ रेगिस्तानों में नदियों की धारा,झील और झरने भी मिलते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि रेगिस्तानी इलाकों पर निरन्तर शोध होते रहते हैं और कुछ देशों ने अपने स्थाई अनुसन्धान विज्ञान केंद्र भी स्थापित किये हैं। अपने महत्व को प्रतिपादित करते रेगिस्तान जहाँ पर्यटन को बढ़ावा देने की धुरी बने हैं वहीं इनके खनिज भंडारों ने विकास की नई इबारत भी लिखी है। भारत में थार का युवा रेगिस्तान विशेषकर पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तान तो इन दोनों अवधारणाओं का पर्याय बन गया है। आबादी वाले इस रेगिस्तान के लोगों के जीवन को सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए किये गये भगीरथी प्रयासों और प्रौद्योगिकी ने तो यहां का भूगोल और जीवनशैली में व्यापक बदलाव की रेखाएं खींच कर नये रंग भर दिये हैं।

ऐसे स्थान जहाँ वर्षा कम होती है उन क्षेत्रों को मरूस्थल कहा जाता है। मरूस्थल ठंडे और गर्म दो प्रकार के होते हैं। अटलांटिक बर्फ से ठका हुआ विश्व का सबसे बड़ा ठंडा मरुस्थल माना जाता है। भारत में थार का मरूस्थल एक गर्म मरूस्थल है। 25 सेमी. से कम वर्षा वाले क्षेत्रों को शुष्क मरूस्थल तथा 25 से 50 सेमी. वर्षा वाले क्षेत्रों को अर्ध शुष्क मरूस्थल, कांटेदार पत्तियों से युक्त पादप, जल स्त्रोतों की कमी,जलापूर्ति से आधिक वाष्पीकरण विशेषताओं से युक्त होते हैं। सहारा विश्व का सबसे बड़ा गर्म मरूस्थल है। यह उत्तरी-पश्चिमी अफीका में स्थित हैं। सहारा नाम अरबी शब्द अहरा से लिया गया है जिसका अर्थ है मरूस्थल। उसके अलावा अराकामा ( लिली), पेंटामोनिया ( अर्जेंटाइना), कोलोरेडो (अमेरिका), गोबी (मंगोलिया), टकलामाकन (चीन), कालाहारी (दक्षिण अफिका), विक्टोरिया (आस्ट्रेलिया), न्यूबियन (सूडान), अलना फूल और सब अल खाली (सऊदी अरब) विश्व के अन्य प्रमुख मरूस्थल हैं। गोबी और पेंटगिनिया ठंडे मरूस्थल माने जाते हैं। शीत मरूस्थल में अंटकिटिक तथा गर्म मरूस्थलों में सहारा विश्व के सबसे बड़े मरूस्थल हैं। गोबी का मरूस्थल एशिया का सबसे बड़ा मरूस्थल मना जाता है जो मंगोलिया में स्थित है। कराकुम और किजुलकुम मध्य एशिया के प्रमुख मरूस्थल हैं। अमेरिका के केलीफोर्निया प्रांत में स्थित मृत घाटी (डेथ वैली) भी एक प्रमुख मरूस्थल है। लिबियन मरूस्थल (उत्तरी अफिका) विश्व का दूसरा तथा आस्ट्रेलियन मरूस्थल (आस्ट्रेलिया) विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मरूस्थल है। इन रेगिस्तानों की स्थिति और उनकी विशेषताएँ इस प्रकार हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा गर्म सहारा रेगिस्तान

आप सहारा रेगिस्तान जाए तो यहाँ चलने वाली ट्रेन से रेगिस्तान देखने का लुत्फ उठा सकते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि सहारा गर्म रेगिस्तान होने पर भी यहां जीवन मानव,पशु और पक्षियों के रूप में पाया जाता है। यहाँ पेड़-पौधे, वनस्पति और 4 मिलियन लोग रहते हैं। यहां प्रमुख रूप से कैटफिश, गेरबिल, शुतुरमुर्ग, जरबोआ, केप हरे, रेगिस्तानी हाथी, बर्बरी भेड़, डामा हिरण, न्यूबियन जंगली गधा जानवर पाये जाते हैं। सहारा में पक्षियों की भी बहुत अधिक प्रजातियाँ शामिल है। सहारा की झीलों और ताल में शैवाल और नमकीन चिंराट और अन्य क्रस्टेशियंस भी पाए जाते हैं। सहारा मरुस्थल के जानवर और पक्षी भोजन के रूप में घोंघे का उपयोग करते है। चट्टानों और टीलों के बीच छिपकली, गिरगिट और कोबरा पाए जाते हैं
सहारा के कठोर और शुष्क वातावरण के बाद भी कई स्थान ऐसे है जहां पौधों की प्रजातियाँ उगती है।
यहाँ पाई जाने वाली वनस्पति में लेपरिन का ओलिव ट्री, सहारन सरू, खजूर, डेजर्ट थाइम, तामरिस्क, बबूलडम पाम, रेगिस्तानी लौकी प्रमुख है।

अफ्रीका महाद्वीप में दुनिया में सबसे बड़ा गर्म रेगिस्तान है।यह दक्षिण की तरफ मोरक्को एटलस पर्वत और भू मध्य सागर से घिरा हुआ है। सहारा मरुस्थल ने विश्व के 8 प्रतिशत थल भाग को घेर रखा है। यह मरुस्थल कुल 11 देशों में फैला हुआ है।अफ्रीका महाद्वीप के लगभग 31% भू-भाग में फैला हुआ यह रेगिस्तान 9.2 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तारित है,जिसमें अल्जीरिया, चाड, मिस्र, लीबिया, माली, मॉरिटानिया, नाइजर, पश्चिमी सहारा, सूडान और ट्यूनीशिया के बड़े हिस्से शामिल हैं। सहारा मरुस्थल इतना गर्म है कि यहाँ वर्षा नाम मात्र की होती है और बारिश का पानी ज़मीन पर गिरते ही वाष्प में बदल जाता है। सन 2006 में सहारा मरुस्थल में उल्का पिंडों की खोज की गई थी। सहारा डेजर्ट के भीषण गर्म होने के बाबजूद भी पर्यटक यहाँ घूमने के लिए आते हैं।

सहारा मरुस्थल में अफ्रोवेंटर, जोबेरिया और आउनोसोरस सहित डायनासोर के जीवाश्म भी यहाँ पाए गए हैं। 1600 ईसा पूर्व पृथ्वी की धुरी में बदलाब हुए जिसने अफ्रीका का मरुस्थलीकरण कर दिया। इस मरुस्थल का तापमान दिन के समय 56 डिग्री से ज्यादा और रात में शून्य डिग्री से भी नीचे चला जाता है। यहाँ पर सब से ज्यादा ऊंटों को खरीदने और बेचने का कार्य किया जाता है। इसके कई टीलों की ऊँचाई 180 मीटर से भी ज्यादा होती है। वर्ष 13 सितम्बर 1922 को इस मरुस्थल का तापमान 136 डिग्री दर्ज किया गया था। इस रेगिस्तान का उच्चतम बिंदु चाड में माउंट कूसि नामक विलुप्त ज्वालामुखी है जिसकी ऊँचाई 3415 मीटर है। सहारा मरुस्थल में 12000 से भी अधिक ऊँटों का कारवां व्यापार के लिए उपयोग किया जाता रहा हैं। विश्व की सबसे लम्बी नील नदी सहारा मरुस्थल के पूर्वी भाग से गुजरती है । यहाँ कहीं-कहीं कुएं, नदियाँ और झरने भी देखने को मिलते है। खारे पानी की झील भी पाई जाती है। अरबी यहां आम बोली है।

अंटार्कटिका-दुनिया का सबसे ठंडा रेगिस्तान दुनिया के सबसे ठंडे रेगिस्तान

अंटार्कटिका की बर्फ की औसत मोटाई 1,6 किलोमीटर है। अंटार्कटिका महाद्वीप का अधिकांश भाग पर्वतों के उभरे हुए कंधों और चोटियों से बना हुआ है। यह साल के लगभग सभी महीनों में दुनिया के सबसे अधिक तूफानी समुद्रों और बर्फ के बड़े-बड़े तैरते पहाड़ों से घिरा रहता है। वर्ष में केवल 20 ही दिन तापमान शून्य से ऊपर रहता है। पृथ्वी की सतह पर मापा गया सबसे कम तापमान भी अंटार्कटिका में ही मापा गया है। सोवियत रूस द्वारा स्थापित वोस्टोक नामक शोधशाला में 24 अगस्त 1960 को तापमान -88.3 डिग्री सेल्सियस मापा गया था।अंटार्कटिका में बहुत कम बारिश होती है, इसे सबसे ठंडा रेगिस्तान माना जाता है। वहां की औसत वार्षिक वर्ष मात्र 200 मिलीमीटर है। अंटार्कटिका का मौसम शायद ही कभी पाले और बर्फीली हवाओं से मुक्त रहता हो। अंटार्कटिका को पवनों की राजधानी कहा जाता है,यहां कभी-कभी 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं चलती हैं।

अंटार्कटिक महाद्वीप दक्षिणी ध्रुव प्रदेश में स्थित विशाल भूभाग को अंटार्कटिक महाद्वीप अथवा अंटार्कटिका कहते हैं। सातों महाद्वीपों में से सबसे ठंडा महाद्वीप अंटार्कटिका महाद्वीप है जिसका कुल क्षेत्रफल 1.4 करोड़ वर्ग किलोमीटर है। इस महाद्वीप में शायद मात्र 2,000 वर्ग किलोमीटर खुली जमीन है। अंटार्कटिका महाद्वीप में मात्र 70 प्रकार के जीव खोजे गये हैं। जिनमें से 44 कीड़े-मकोड़े हैं। यहां कोई स्थलीय स्तनधारी प्राणी नहीं है, पर बहुत से समुद्री स्तनधारी उसके तटों पर विश्राम या आसपास के समुद्रों में आहार खोजने आते हैं। इनमें कई प्रकार की ह्वेलें और दक्षिणी ध्रुव के आसपास रहने वाले पांच प्रकार के सील – केकड़ा भोजी सील, तेंदुआ सील, रोस सील, वेडेल सील और गजसील हैँ। रोस सील अत्यंत दुर्लभ प्राणी है, जबकि वेडेल सील तटों के नजदीक ही रहता है। सभी सीलों में बड़ा गजसील है। अंटार्कटिका के पास के समुद्रों में बिना दांतवाली ह्वेलें काफी मात्रा में पाई जाती हैं। आज उनके शिकार पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगा हुआ है।यहां दक्षिण ध्रुवीय स्कुआ तथा अडेली और सम्राट पेंग्विन जैसे कुछ पक्षी भी पाये जाते हैं। वनस्पति नाम मात्र की ही पाई जाती है।

अंटार्कटिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की चुंबकीय विशेषताओं, मौसम, सागरीय हलचलों, जीवों पर सौर विकिरण के प्रभाव तथा भूगर्भ विज्ञान से संबंधित अनेक प्रयोग एवं अध्यन किए हैं। भारत सहित चीन, ब्राजील, अर्जेन्टीना, कोरिया, पेरू, पोलैंड, उरूग्वे, इटली, स्वीडेन, अमरीका, रूस आदि देशों ने यहां अपने स्थायी वैज्ञानिक केंद्र स्थापित किए हैं। भारत द्वारा स्थापित प्रथम पड़ाव का नाम था दक्षिण गंगोत्री। जब यह पड़ाव पानी के नीचे आ गया, तो मैत्री नामक दूसरा पड़ाव 1980 के दशक में स्थापित किया गया। वैज्ञानिकों ने मानना है कि अंटार्कटिका में सीसा, तांबा और यूरेनियम सहित 900 से भी अधिक पदार्थों की महत्वपूर्ण खानें हैं। इस महाद्वीप के अधिक संतुलित और समस्त मानव-जाति के हित में उपयोगी बनाने के लिए 1959 में 12 देशों ने अंटार्कटिका संधि में हस्ताक्षर करके इस महाद्वीप को सैनिक गतिविधियों और खनन से मुक्त रखने का निर्णय लिया। अब इस संधि में 46 देशों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसमें भारत भी शामिल है।

अरब प्रायद्वीपीय गर्म रेगिस्तान–पैट्रोलियम भंडार से भरपूर
इस प्रायद्वीप में संसार के दो-तिहाई पैट्रोलियम संसाधन के भंडार हैं। इस प्रायद्वीप का दक्षिण-पूर्वी भाग सबसे शुष्क क्षेत्र है। अरब रेगिस्तान गर्म, शुष्क तथा अतिशुष्क है। उत्तर में सीरिया से लेकर दक्षिण में ओमान तक 230,00,00 वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल में फैला अरब प्रायद्वीपीय रेगिस्तान है जो सहारा रेगिस्तान का ही विस्तारित रूप है। इन दोनों में बहुत समानता पाई जाती है। यहां भी रेत के विशाल समुंद्र हैं। लाल सागर इन्हें अलग- अलग करता हैं। अनेक वर्षों तक यहां औसत वर्षा केवल 100 मि.मी. से कम ही रही है। इस रेगिस्तान के मध्य भाग का तापमान 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है हालांकि शीत ऋतु में तापमान काफी नीचे आ जाता है और अकसर रात्रि में यह जमाव बिंदु तक पहुंच जाता है।

अटाकामा रेगिस्तान — दुनिया में तांबे की सबसे बड़ी खान
संसार की सबसे बड़ी तांबे की खान इसी रेगिस्तान में ‘चुकीकामता’ नामक क्षेत्र में स्थित है। यहां नाइट्रेट, तांबा तथा चांदी खनिज भी पाये जाते हैं। यहां की मुख्य पैदावार मक्का तथा एल्फाल्फा होती है।अटाकामा उत्तरी चिली में स्थित एक तटीय रेगिस्तान है जिसकी औसत लंबाई लगभग 960 कि.मी. एवं तटीय चैड़ाई 160 कि.मी. से कम है । यह रेगिस्तान 1,40,000 वर्ग कि.मी.क्षेत्रफल में फैला है जो लवणीय चट्टानों से युक्त है। यह लगभग वर्षा विहीन पठारी क्षेत्र है जो लवणीय द्रोणियों, रेत और लावा प्रवाह से बना है। यह पृथ्वी का सबसे शुष्क क्षेत्र है। इस क्षेत्र में औसत वर्षा कुल 15 मि.मी. प्रति वर्ष तक ही सीमित है। कुछ भागों में तो वर्षा के होने के कोई मानवीय प्रमाण उपलब्ध ही नहीं हैं। उत्तरी चिली के इस रेगिस्तानी क्षेत्र के एक स्थान जिसे कि कलामा कहा जाता है, वहां 400 वर्षों तक (1570-1971) वर्षा नहीं हुई थी। हालांकि अटाकामा रेगिस्तान के कुछ भागों में पर्याप्त वर्षा होने के कारण भूक्षरण के चिन्ह भी अंकित किए गए। अटाकामा रेगिस्तान में मानव भी निवास करते हैं। सामान्य रूप से इसके ठिकाने चार विभिन्न नखलिस्तान या मरुद्यान (ओएसिस्) स्थलों जैसे पेरुवियन सीमा के निकट एरिटा, पामा डेल की पूर्वी पट्टी, तभारुगल व लोआ एवं कोपीपो नदियों की द्रोणियों में स्थित हैं।

आस्ट्रेलियन रेगिस्तान : लाल रंग के कंगारू
आस्ट्रेलिया के विशाल भाग पर स्थित आस्ट्रेलियन रेगिस्तान गर्म, शुष्क व अर्धशुष्क एवं 15,00,000 वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल में फैला है। ग्रेट सेंडी रेगिस्तान, गिब्सन रेगिस्तान और ग्रेट विक्टोरिया रेगिस्तानों ने सम्मिलित रूप से आस्ट्रेलिया के आधे से अधिक भाग अपना साम्राज्य स्थापित कर रखा है। इसके पूर्व में तनामी रेगिस्तान, सिम्पसन रेगिस्तान और स्टुअर्ड रेगिस्तान रेतीले रेगिस्तान हैं। आस्ट्रेलिया रेगिस्तान को तीन भागों चिकनी मिट्टी के समतल, रेतीले और पथरीले रेगिस्तान में विभाजित किया जाता है। वर्तमान आस्ट्रेलियन रेगिस्तान पहले कभी ध्रुवीय बर्फ की चादरों से ढका हुआ था और उससे भी पहले इस क्षेत्र में उथले सागर थे। आस्ट्रेलिया की भूमि कुछ लाखों वर्ष पूर्व ही शुष्क होने लगी। आस्ट्रेलिया के कुछ हिस्से 10 लाख वर्ष पूर्व, जिसे भौगोलिक समायावधि में ज्यादा समय नहीं माना जाता, ही रेगिस्तानों में परिवर्तित हुए हैं। आस्ट्रेलिया धीरे-धीरे उत्तर की ओर बढ़ रहा है और एक दिन यह भूमध्य रेखा के समीप पहुंच जाएगा और तब यह फिर से उष्णकटिबंधीय क्षेत्र बन जाएगा।

दि ग्रेट सेंडी रेगिस्तान
आस्ट्रेलियन रेगिस्तानों में दि ग्रेड सेंडी रेगिस्तान सबसे बड़ा रेगिस्तान हैं। पश्चिमी आस्ट्रेलिया के उत्तर में स्थित इस रेगिस्तान का क्षेत्रफल लगभग 3,40,000 वर्ग कि.मी. है। इसमें रॉकी पर्वत और पिलेबरा एवं किंब्रले पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य समतल क्षेत्र आता है। यह रेगिस्तान समुद्र तट के किनारों तक फैला हुआ है। यहां औसत वर्षा 250 से 300 मि.मी. तक होती है किंतु यहां उच्च ताप की वजह से ज्यादातर जल का वाष्पीकरण होने से जीवों एवं वनस्पतियों के लिए जल की उपलब्धता बहुत कम हो जाती है। यहां दिन का तापमान 300 से 420 सेल्सियस के बीच रहता है। तनामी रेगिस्तान–दि ग्रेट सेंडी रेगिस्तान के पूर्व में स्थित इस रेगिस्तान का क्षेत्रफल 37,500 वर्ग कि.मी. है। तनामी, पृथ्वी का शुष्क स्थल और प्रमुख अलग-थलग रेगिस्तान है। यहां की मुख्य वनस्पतियों में ‘स्पीनिफेक्स घास’ (नुकीली पत्ती वाली घास जो तट क्षेत्र को बांधती है), बबूल तथा अन्य छोटी झाडि़यां आदि पाई जाती हैं। इस रेगिस्तान में बहुत छोटे कद के लाल रंग के कंगारू, जिनकी प्रजाति समाप्त होने के कगार पर है, बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
सिम्पसन रेगिस्तान-

सिम्पसन रेगिस्तान आस्ट्रेलिया के मध्य भाग में स्थित करीब 170,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। वनस्पतियों के आधार पर यहां विश्व के सबसे लंबे समानांतर रेत के टीले और अर्ग हैं। बिग रेड (नापानरीका) बहुत प्रसिद्ध रेतीला टिब्बा है, जिसकी ऊंचाई 40 मीटर है। यहां वर्षा कम और अनियमित होती है। सिम्पसन रेगिस्तान के नीचे ग्रेट आर्टेशियन द्रोणियां स्थित हैं। यहां पर अनेक प्राकृतिक स्रोतों और कृत्रिम नल-कूपों द्वारा पानी की उपस्थिति बनी रहती है परन्तु जल के अनियंत्रित दोहन के कारण इन स्रोतों में जल स्तर बहुत कम हो गया है। इस रेगिस्तान में मुख्य वनस्पतियां ‘स्पीनिफेक्स’ घास तथा अन्य झाडि़यों के रूप में। मिलती हैं। दि ग्रेट विक्टोरिया रेगिस्तान–
सर्पिय जीवों के लिए प्रसिद्ध रेतीले टीलों की भरमार वाले विशाल दि ग्रेट विक्टोरिया रेगिस्तान का क्षेत्रफल 3,38,000 वर्ग कि.मी. है। रेत के टीलों के अलावा यहां पर चिकनी मिट्टी के बने अर्धचंद्राकार बालू के टीले भी बहुतायत में मिलते हैं। ये अर्धचंद्राकार बालू के टीले ‘लंकटें टिब्बा’ कहलाते हैं। यहां पर समतल क्षेत्र भी होते हैं जो छोटे-छोटे आयरन ऑक्साइड से चमचमाते गोल पत्थरों से भरे रहते हैं। यहां पर वनस्पति बहुतायत से होती है। दि गेट विक्टोरिया रेगिस्तान ‘विज़ार थौर्नी डेविल’ सहित सरीसृप जीवों के कारण यह रेगिस्तान प्रसिद्ध हैं।
गिब्सन रेगिस्तान–

पश्चिमी आस्ट्रेलिया के विशाल रेगिस्तान के मध्य में ग्रेड सेंडी तथा ग्रेट विक्टोरिया रेगिस्तान के बीच में स्थित गिब्सन रेगिस्तान का क्षेत्रफल 156,000 वर्ग कि.मी. है। इसका नामकरण आस्ट्रेलिया महाद्वीप की खोज करने में सफल होने वाले ‘अल्फ्रेड गिब्सन’ के नाम पर किया गया है। अल्फ्रेड गिब्सन ने इस रेगिस्तान को 1874 में पार करने का असफल प्रयास किया था। इस रेगिस्तान में मिलने वाले जीवों में रेड कंगारू प्रमुख हैं।

स्टुअर्ट पथरीला रेगिस्तान: स्वर्ण भण्डार

आस्ट्रेलियाई रेगिस्तान में पाए जाने वाले खनिजों में ‘ओपल’ (दूधिया रंग का बहुमूल्य पत्थर) मुख्य है। इसके अतिरिक्त यहां स्वर्ण, जस्ता, लोहा, लैड आदि भी मिलते हैं। यह रेगिस्तान विस्तृत गिब्बर समतली क्षेत्र, लाल मिट्टी तथा रेत के टीलों के लिए जाना जाता है। इसकी खोज उन्नीसवीं शताब्दी में ‘ट्रेलगी’, ‘स्टुअर्ट’ तथा ‘आइर’ ने की थी। इस रेगिस्तान का नामकरण 1844 में चाल्र्स स्टुअर्ड के नाम पर किया गया। इस क्षेत्र में जीव तथा वनस्पतियों की संख्या बहुत कम हैं। यहां मिलने वाली वनस्पतियों में नुकीले अथवा कांटेदार झाडियां मुख्य हैं। मुख्यतः यहां उगने वाले छोटे आकार की झाडि़यां, शुष्क तथा लवणीय वातावरण में ही पाई जाती हैं जिनका उपयोग भेड़ के चारे के रूप में होता है।

चिहोदेदुआ रेगिस्तान–डायमंड बैक सर्प का आवास

चिहोहुआ रेगिस्तान में अत्यंत जहरीले एवं खड़खड़ाहट की आवाज के साथ रेंगने वाले ‘डायमंड बैक’ नामक सर्प पाए जाते हैं।
उत्तर अमेरीका का यह सबसे बड़ा रेगिस्तान है। इस रेगिस्तान का नामकरण इसके केंद्र में स्थित मैक्सिकन प्रांत के नाम पर किया गया है। ऊंचाई पर स्थित इस रेगिस्तान का क्षेत्रफल 5,18,000 वर्ग कि.मी. है। यह ‘सीरा मैडिर’ श्रृंखलाओं के बीच स्थित है, मैक्सिको से लेकर न्यूमैक्सिको, टेक्सास तथा एरीजोन तक फैला हुआ है। यहां ग्रीष्म ऋतु में तापमान बहुत अधिक किंतु शीत ऋतु में तापमान जमाव बिंदु तक पहुंचता है। चिहोदुआ रेगिस्तान का औसतन तापमान -300 सेल्सियस (शून्य से तीस डिग्री सेल्सियस कम) से 400 सेल्सियस के बीच रहता है। इस रेगिस्तान में वर्षा अधिकतर ग्रीष्म ऋतु में होती है। इस क्षेत्र में वार्षिक वर्षा का औसत लगभग 250 मि.मी. तक होता है। यह उच्च अक्षांश रेगिस्तान हैं जिसका अधिकतर हिस्सा 1000 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। चिहोहुआ रेगिस्तान में वनस्पतियों एवं जीवों की अच्छी-खासी संख्या पाई जाती है। निचले क्षेत्रों की मरुभूमि में ‘क्रियोसोट बुश’ व ‘टार’ की झाडियां बहुतायत में होती हैं। यहां पर ‘यकास’ वंश के पौधे (एक प्रकार की लिली) थोड़ा ऊपर के क्षेत्रों में मिलते हैं।

डैथ वैली –टिम्बिश जनजाति एक हज़ार वर्षों से

अमेरिका के केलिफोर्निया में स्थित डैथ वैली पृथ्वी का सबसे गर्म स्थान है। टिम्बिश जनजाति के लोग पिछले एक हजार वर्षों से डैथ वैली में रह रहे हैं। डेथ वैली रेगिस्तान गर्म एवं शुष्क है और यह 13,812 वर्ग किमी. क्षेत्रफल में फैला है। यहां गर्मियों के दिनों में तापमान 54 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और सर्दियों में रात में तापमान जमाव बिंदु से नीचे चला जाता है। चारों ओर से पर्वतों द्वारा घिरे रहने के कारण यह स्थान अत्यंत गर्म हो जाता है। वर्षा कम होने पर भी यहां की मिट्टी के द्वारा जल की पर्याप्त मात्रा को अवशोषित न करने के कारण, भारी बारिश होने पर यहां बाढ़ आ जााती है। इस रेगिस्तान में ‘अभारगोसा नदी’ तथा ‘फर्नेस क्रीट’ (समुद्र से कटाव के रूप में निकली जल धारा) जल धाराएं भी हैं किंतु वह जल्द ही इस घाटी की रेतीली सतह में समा जाती है।

गोबी रेगिस्तान–बेकिटरियन ऊंट का आवास

गोबी रेगिस्तान बेकिटरियन ऊंट (जिनके दो कूबड होते हैं) का आवास स्थल माना जाता है। कछु जगंली किस्म के गधे भी होते हैं। संसार के रेगिस्तान के विशेष भालू इसी रेगिस्तान में पाए जाते हैं। इन भालू की प्रजाति ‘मज़ालाई’ अथवा ‘गोबी’ लुप्त होने के कगार पर है। इसके अतिरिक्त यहां जंगली घोड़े, गिलहरी व छोटे कद के बारहसिंगे भी होते हैं। गोबी एक मंगोलियन शब्द है जिसका अर्थ होता है जलरहित स्थान । यह संसार का पांचवां बड़ा रेगिस्तान और एशिया का सबसे विशाल रेगिस्तान है। यह 130,000 वर्ग किमी.क्षेत्रफल में विस्तृत हैं।
गोबी रेगिस्तान में काष्ठीय व सूखा प्रतिरोधी गुणों वाले सैकसोल नामक पौधे बहुतायत में मिलते हैं। लगभग पत्ति विहीन यह पौधा ऐसे क्षेत्रों में भी उग आता है जहां की रेत अस्थिर होती है। अपने इस विशेष गुण के कारण यह पौधा भूक्षरण को रोकने में सहायक होता है। सहारा की भांति यह रेगिस्तान भी तीन भागों में विभक्त है – ताकला माकन रेगिस्तान, अलशान रेगिस्तान तथा मु अस रेगिस्तान। गोबी रेगिस्तान का अधिकतर भाग रेतीला न होकर चट्टानी है। गोबी रेगिस्तान की जलवायु में तेजी से बदलाव होता है। यहां न केवल सालभर तापमान बहुत जल्दी-जल्दी बदलता है बल्कि 24 घंटों में ही तापमान में व्यापक परिवर्तन हो जाता है। गोबी रेगिस्तान में वर्षा की औसत मात्रा 50 से 100 मि.मी. है। यहां अधिकतर वर्षा गर्मी के मौसम में ही होती है। यहां का तापमान -400 सेल्सियस (जनवरी में) से लेकर 450 सेल्सियस (जुलाई में) के बीच में रहता है। गोबी रेगिस्तान में अधिकतर नदियां बारिश के मौसम में ही बहती हैं।यहां वर्षों ऋतु में ही नदी में पानी रहता है। निकटवर्ती पर्वतों से जल धाराएं रेगिस्तान की शुष्क भूमि में समा जाती हैं।

दि ग्रेट बेसिन रेगिस्तान-सींगो वाला गिरगिट

यह अमेरीका का सबसे बड़ा रेगिस्तान है जो लगभग 4,09,000 वर्ग कि.मी. तक के क्षेत्र में फैला है। यहां मिलने वाले जीवों में सर्प, सींगो वाला गिरगिट तथा खरगोश मुख्य हैं।यहां अधिकतर ‘साल्टबुश’ नामक वनस्पति पैदा होती है। यह ओरेगोन, इदाहो, नेबादा, यूटा, योर्मिंग, कोलोराडो तथा केलिफोर्निया राज्यों के बीच फैला हुआ है। इसका अधिकांश भाग यूटा तथा नेवादा राज्यों में स्थित है। यह ऊंचाई पर स्थित रेगिस्तान है जिसका अधिकांश क्षेत्र समुद्र सतह में 1200 मीटर ऊपर की ऊंचाई पर स्थित है। इस रेगिस्तान में एक नहीं अपितु अनेक बेसिन है। वार्षिक वर्षा का औसत 250 मि.मी. रहता है।

कालाहारी रेगिस्तान–खनिजों का भण्डार

इस रेगिस्तान में समुचित मात्रा में कोयला, हीरा, तांबा, निकल तथा यूरेनियम के भंडार हैं। विश्व में हीरों की प्रमुख खदानों में पूर्वोत्तर कालाहारी के आरोपा क्षेत्र में स्थित हीरे की खान भी शामिल है।
दक्षिण अफ्रीका में ओरेंज नदी तथा उत्तर में ज़ाम्बेज़ी नदी के बीच स्थित यह रेगिस्तान 500,000 वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल में फैला है। यह बोरटबान के अधिकांश क्षेत्र, नामीबिया तथा दक्षिण अफ्रीका के कुछ भूभाग में फैला हुआ है।
कालाहारी शब्द संभवतः ‘कीर’ से बना है जिसका अर्थ ‘बेहद प्यास’ है। यह भी कहा जाता है कि ‘कालाहारी’ विशेष जनजातीय शब्द ‘कालागारी’ अथवा ‘कालागारे’ से उत्पन्न हुआ माना जाता है, जिसका अर्थ ‘जलविहीन स्थान’ होता है। अन्य रेगिस्तानों की भांति इस स्थान पर भी रेत के टीले व बजरी के समतल क्षेत्र हैं। यहां के टीले लगभग स्थिर रहते हैं। कालाहारी रेगिस्तान में अधिकतर रेत बहुत महीन तथा कहीं लाल, तो कहीं स्लेटी रंग की होती है। इस रेगिस्तान का अधिकांश क्षेत्र जीवाश्म-रेगिस्तान माना गया है। इस रेगिस्तान का दक्षिण-पश्चिमी भाग अति शुष्क है। यहां ग्रीष्म ऋतु में तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से 40 डिग्री सेल्सियस के मध्य रहता है। जबकि शीतकाल में यहां तापमान जमाव बिंदु से भी नीचे चला जाता है। कालाहारी रेगिस्तान में शेर, लकड़बघ्घा, हिरन तथा अनेक प्रकार के सरीसृप (रेंगने वाले जीव) तथा अनेक प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। कालाहारी रेगिस्तान में 400 से अधिक वनस्पतियां पाई जाती हैं। किंतु मुख्य रूप से यहां बबूल की झाडि़यां तथा अन्य घास पैदा होती हैं यहां अधिकतर खानाबदोश यानी यायावर लोग ही रहते हैं जो स्थान बदलते रहते हैं। यहां के स्थाई निवासियों को ‘बुशमैन’ कहा जाता है, जो अनेक जनजातीय लोगों का मिलाजुला नाम है। ये लोग कालाहारी के रेगिस्तानी क्षेत्र में पिछले बीस हजार वर्षों से रह रहे हैं।

कराकुम रेगिस्तान–अर्धचंद्राकार टिब्बे

कराकुम का शाब्दिक अर्थ ‘काली रेत’ है। तुर्कमेनिस्तान में स्थित यह रेगिस्तान केस्पियन सागर के पश्चिमी किनारे के पूर्व से अमूदरिया नदी के पश्चिम तक 2,97,900 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में फैला हुआ है। इस रेगिस्तानी की धरती की विशेषता दरार युक्त चिकनी मिट्टी की सतह तथा ‘अर्धचंद्राकार टिब्बे’ हैं। औसतन यहां 100 से 200 मि.मी. वर्षा होती है। यहां तापमान -14 डिग्री सेल्सियस से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। मुख्य वनस्पति के रूप में यहां ‘काले सेकसोल’ के पेड़ होते हैं।

मोजावे रेगिस्तान–झीलें और झरनें

अमेरीका की विशाल द्रोणी का ही एक भाग है
मोजावे ( मोहावे ) रेगिस्तान। मोजावे रेगिस्तान में असंख्य झीलें व झरने पाये जाते हैं। यह रेगिस्तान किसी समय सागर का ही अंतर्भाग था जो ज्वालमुखीय प्रक्रिया के कारण और कोलोरडो नदी द्वारा एकत्रित पदार्थों द्वारा बना है। यह रेगिस्तान उत्तर तथा पश्चिम दिशा में सीरा नेवादा, तालाचापी तथा सन गब्रिल एवं बर्नारडिनो की पवर्त श्रृंखलाओं द्वारा सीमित है जो दक्षिण-पूर्व में कोलोरडो रेगिस्तान में जा मिलता है।

नामीब रेगिस्तान–अफ्रीकन हाथी

नामिब रेगिस्तान में अफ्रीकन हाथी समेत यहां अनेक प्रकार के पशु निवास करते हैं। इस रेगिस्तान में मानव का वास नहीं है तथा यहां पहुंचना कठिन है। हालांकि इस रेगिस्तान का सैसरीम क्षेत्र वर्ष भर आबाद रहता है। इस रेगिस्तान में टंगस्टन, नमक तथा हीरे की खाने हैं। नामीबिया में स्थित नामीब रेगिस्तान 1,35,000 वर्ग कि.मी.क्षेत्रफल में फेल है और माना जाता है कि यह संसार का सबसे पुराना रेगिस्तान है। इस रेगिस्तान की चैड़ाई लगभग 160 कि.मी. तथा लंबाई 1300 कि.मी. है। लगभग पिछले 8 करोड़ वर्षों से यह क्षेत्र शुष्क या अर्धशुष्क रहा है। इस रेगिस्तान की रचना दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका के तटीय किनारों के साथ बेगुंएला की ठंडी जल धाराओं द्वारा शुष्क वायु से ठंडा होने पर संभव हुई है। यहां के बालू के टीले अस्थिर होते हैं। इस रेगिस्तान के बालू के कुल टीलों में से ‘स्टार टिब्बा’ लगभग 10 प्रतिशत है। यहां वार्षिक वर्षा का औसत 15 मि.मी. से कम ही रहता है। यहां की नमी का मुख्य स्रोत तटीय क्षेत्र का कोहरा होता है। यह रेगिस्तान ऊसर होने पर भी यहां वनस्पति तथा जीवों की अनेक प्रजातियां विद्यमान हैं। यहां की चट्टानों पर लाइकेन यानी शैवाक नामक रंग-बिरंगी वनस्पतियां बहुतायत में पाई जाती हैं।

नेगेव रेगिस्तान–भूरे चट्टानी पर्वत

नेगेव शब्द का शाब्दिक अर्थ सूखा है।
सामान्यतया यह क्षेत्र आदिकालीन सागरीय युग से पहले का है। यहांं तांबा, फॉस्फेट तथा प्राकृतिक गैस उपलब्ध हैं। करीब 12,170 वर्गकि.मी.क्षेत्रफल में विस्तृत यह रेगिस्तान इजराइल के क्षेत्रफल का लगभग आधे से अधिक भाग में है। इसके पश्विमी तरफ सिनाई प्रायद्वीपीय है। इसकी सीमाओं पर जार्डन की पहाडि़यां, सिनाई प्रायद्वीप तथा भूमध्यसागर की एक पतली तटीय पट्टी स्थित है। समान्य रेगिस्तानों की भांति नेगेव रेगिस्तान रेत से ढका नहीं है। यहां पर भूरे, चट्टानी और धूल भरे पर्वत उपस्थित हैं जो वादियों और गहरे गड्ढों से संबद्ध हैं।

पैटागोनिया रेगिस्तान–विश्व का पांचवा बड़ा

पैटागोनिया रेगिस्तान रेगिस्तान 6,73,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफलमें फैला अमेरिका का सबसे बड़ा एवं विश्व का पांचवा सबसे बड़ा रेगिस्तान है।
इसमें खनिजों में कोयला, प्राकृतिक गैस, तेल व लोहा प्रमुख हैं। अन्य खनिजों के रूप में यहां थोड़ी मात्रा में यूरेनियम, जस्ता व सीसा भी पाये जाते हैं।
यह रेगिस्तान मुख्य रूप से अर्जेंटीना से लगा हुआ है और आंशिक रूप से चिली क्षेत्र तक फैला हुआ है। दक्षिणी अर्जेंटीना के पैटागोनिया क्षेत्र के पश्चिम में इसकी सीमा एंडिज पर्वत से और पूर्वी सीमा अटलांटिक महासागर से लगी हुई है। यह एक ठंडा रेगिस्तान है। अर्धशुष्क प्रकृति वाला यह रेगिस्तान चूबुत तथा सांताक्रुज के दक्षिणी राज्य में स्थित एंडिज पर्वत की वृष्टिछाया क्षेत्र तक फैला हुआ है। यहां पूरे वर्ष का औसतन तापमान केवल 7 डिग्री सेल्सियस होता है। यहां पर वर्षा 100 से 260 मि.मी. होती है। इस रेगिस्तान में तेज पछुवा हवाएं चलती हैं। इन हवाओं में उपस्थित धूल व रेत के कणों के कारण यहां पर बहुत कम वनस्पतियां पायी जाती हैं।

सोनारन रेगिस्तान–रेतीले टीलों की भरमार

मोजावे रेगिस्तान के उत्तर में स्थित सोनारन रेगिस्तान का अधिकांश भाग अमेरीका के एरीज़ोना क्षेत्र में स्थित है जो 275,000 वर्ग किमी.क्षेत्रफल में विस्तारित है। इसके उप क्षेत्रों में कोलाराडो रेगिस्तान और यामा रेगिस्तान आते हैं। यहां रेतीले टीलों की भरमार है। इसका क्षेत्रफल 2,75,000 वर्ग किमी. है। सोनारन रेगिस्तान उत्तरी अमेरिका का सबसे बड़ा और गर्म रेगिस्तान है। जहां तापमान -13 डिग्री सेल्सियस -48 डिग्री सेल्सियस के मध्य रहता है। इस क्षेत्र में वार्षिक वर्षा 250 मि.मी. तक होती है।सोनारन रेगिस्तान के जीवों में मुख्य रूप से बड़ी-बड़ी छिपकलियां (जिन्हें कि चकवाला कहते हैं) बिच्छू तथा रेगिस्तानी कछुए पाए जाते हैं।
नागफनी यहां की मुख्य वनस्पति है जो यहां अच्छी पनपती हैं। इन सुंदर पौधों की 12 प्रजातियां पाई जाती हैं

ताकला माकन रेगिस्तान-बर्फ से ढकी पहाड़ियां

ताकला माकन रेगिस्तान पश्चिमी चीन के जिनजियांग प्रांत में स्थित चीन का सबसे बड़ा और शुष्कतम एवं गर्म रेगिस्तान है जो 3,27,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है। कुनलुम पर्वत और तिब्बत के पठार से लेकर दक्षिण में और उत्तर में टाईन शान के मध्य विस्तृत रेगिस्तान टारिम द्रोणि को भरता है। यह सागरों से धरती के अन्य किसी स्थान से अपेक्षाकृत अधिक दूर स्थित हैं। यह रेगिस्तान एशियाई मानसून से अप्रभावित रहता है। उत्तर से आने वाले आर्कटिक तूफानों को भी इस रेगिस्तान को घेरे हुए पर्वत रोक लेते हैं। इस क्षेत्र में नमक बहुत विशाल क्षेत्र में मिलता है। रेगिस्तान के करीब 85 प्रतिशत भाग पर बालू के टीले हैं जहां बहुत ही कम संख्या में या न के बराबर वनस्पतियां उगती हैं। इस रेगिस्तान में वार्षिक वर्षा का औसत 40 से 100 मि.मी. है। बर्फ से आच्छादित पहाडि़यों की बर्फ से पिघलने से प्राप्त पानी से अनेक नदियां इस रेगिस्तान से होकर गुजरती हैं।
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1-फ़-18,RHB कोलोनी,कुन्हाड़ी,
कोटा,राज.
9928076040
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