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शब्दकोश में कई शब्द आत्महत्या करेंगे

रात को सोने के पहले शब्दकोश में कुछ शब्दों का अर्थ खोजने के लिए शब्दकोश क्या खोल लिया जैसे मुसीबत मोल ले ली। जैसे ही नींद लगती तो ऐसा लगता कि शब्दकोश में कुछ खुसुर-पुसुर हो रही है। समझ में ही नहीं आ रहा था कि शब्दकोश में से ये आवाज़ कैसी आ रही है। अभी तक तो मेरे घर में फ्रिज, वाशिंग मशीन, से लेकर जितने भी बिजली के उपकरण हैं वो काम से ज्यादा आवाज़ ही करते हैं, लेकिन किसी शब्दकोश में से आवाज़ आने की बात से दिमाग चक्करघिन्नी हुआ जा रहा था। मैं जैसे ही आवाज़ सुनने की कोशिश करता, आवाज़ कम होने लगती और जब सोने का नाटक करता तो कुछ कुछ शब्द सुनाई पड़ने लगते थे। पहले तो मुझे लगा कि इस शब्दकोश में किसी भूत की कोई आत्मा आ गई होगी, तो मारे डर के मैं पसीना पसीना हो गया। लेकिन आवाज़ें लगातार आती रही। आखिरकार मैने सोने का नाटक करते हुए उन आवाज़ों को सुना तो हैरान रह गया।

सबसे पहले कड़ी कार्रवाई शब्द मिमियाता हुआ चीख रहा था, वह अन्य शब्दों को कह रहा था देखो मेरा क्या हाल हो गया। देश के नेताओँ और मंत्रियों ने कड़ी कार्रवाई करेंगे की ऐसी फज़ीहत की है कि अब जब भी कोई नेता या मंत्री कहता है कि इस मामले में हम कड़ी कार्रवाई करेंगे तो मेरी तो शर्म से डूब मरने की इच्छा होती है। इस शब्दकोश में कड़ी कार्रवाई का मतलब लिखा है, किसी भी घटना, लापरवाही, बेईमानी और भ्रष्टाचार पर तत्काल कार्रवाई कर दोषी को दंडित किया जाए। लेकिन यहाँ तो हाल ये है कि जिस पर कड़ी कार्रवाई करना है वही चिल्ला चिल्लाकर कहता है कि कड़ी कार्रवाई करेंगे। मगर किसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होना तो दूर सड़ी कार्रवाई तक नहीं होती और ऊपर से उसे प्रमोशन से लेकर तमाम लाभ देकर उसको सम्मानित कर दिया जाता है। फिर वह अपने मातहत अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी ऐसी ही कड़ी कार्रवाई करते हुए उनको भी हर तरह से फायदा पहुँचाता है। अफसर, नेता और मंत्री की घरवालियों से लेकर घरवाले तक कड़ी कार्रवाई की आड़ में इनसे सब्जी मंगवाने से लेकर, गाँव से देसी घी, सिनेमा के टिकट तक सब काम करवाते हैं और मैं यहाँ शब्दकोश में दूसरे शब्द अखबारों की कटिंगों और टीवी की खबरें दिखा दिखाकर मेरी मजाक उड़ाते हैं कि देखो आज फिर किसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो रही है।

इस पर जाँच शब्द ने अपनी पीड़ा सुनाई। जाँच का मतलब है किसी भी घटना की गहराई में जाकर उसकी सत्यता पता करना। अब तो हालत ये हो गई है कि जाँच जाँच सब चिल्लाते हैं मगर जाँच करने की बजाय उस घटना को ही झूठ बता देते हैं। ये तो ऐसा हो गया जैसे कोई चोर भरे बाजार में किसी का पर्स छीनकर भागे और खुद ही चोर चोर चिल्लाता हुआ सुरक्षित निकल जाए। जिसके खिलाफ जाँच होना होती है, वो ऐसी तिकड़म भिड़ाता है कि शिकायतकर्ता की जाँच होने लगती है। किसी भ्रष्ट ने करोड़ों की जमीन, बंगले कारें कैसे खरीदी इसकी बजाय ये जाँच होती है कि शिकायत कर्ता ने शिकायत की जानकारी कहाँ से और कैसे हासिल की, उसे इसके लिए किसने पैसे दिए। जाँच शब्द ने घोर निराशा में कहा दिन भर टीवी और अखबारों में जाँच के नाम से मेरा हो हल्ला मचता है तो मेरी तो आत्मा चीत्कार उठती है। शब्दकोष के दूसरे शब्द जाँच शब्द सुनते ही मेरा मजाक उड़ाते हैं। वह फुसफुसा रहा था कि जैसे ही खबरों में कहा जाता है कि पुलिस मामले की जाँच कर रही है तो मेरा तो गला ही बैठ जाता है, पुलिस तो तत्काल मामले को दबा देती है, जाँच कहाँ करती है।

इन शब्दों की पीड़ा सुनकर कई और शब्द फुसफुसा रहे थे मगर अपने को तो नींद लग गई इसलिए बाकी शब्दों की पीड़ा नहीं सुन पाए, बस कुछ ऐसा लगा कि कई शब्द आत्महत्या करने की सोच रहे हैं। अब जब भी मौका मिलेगा उनकी भी सुनेंगे और आपको पढ़ाएँगे।

कार्टून साभार- राजस्थान पत्रिका से



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