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मार्क टली और फाय डिसूज़ा को मिलेगा मुंबई प्रेस क्लब का रेड इंक पुरस्कार

पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2018 के रेडइंक अवॉर्ड फॉर लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए ब्रिटेन के वरिष्ठ पत्रकार और बीबीसी इंडिया के पूर्व संवाददाता सर विलियम मार्क टली को को चुना गया है। पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्‍लेखनीय योगदान के लिए मुंबई प्रेस क्‍लब की ओर से हर साल दिया जाने वाला य‍ह अवॉर्ड ‘National RedInk Awards for Excellence in Journalism’ का एक हिस्‍सा है। मुंबई के जमशेद भाभा हॉल, एनसीपीए में 18 मई को आयोजित एक रंगारंग समारोह के दौरान उन्हें यह अवॉर्ड केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु और महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फणनवीस प्रदान करेंगे।

वहीं ‘मिरर नाउ’ चैनल की एग्जिक्यूटिव एडिटर फाय डिसूजा का चयन रेडइंक अवॉर्ड फॉर ‘जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर’ के लिए किया गया है इन दो पुरस्कार के अलावा 32 पत्रकारों को 13 प्रतिस्पर्धी श्रेणियों में पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए रेडइंक पुरस्कार दिया जाएगा।

गौरतलब है कि लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार टली को भारतीय पत्रकारिता में उनके लंबे और सर्वोत्तम योगदान को पहचान देगा। टली ने बीबीसी के साथ 30 साल तक काम किया था और जुलाई 1994 में उन्होंने संस्थान से इस्तीफा दे दिया था। वह 20 साल तक बीबीसी के दिल्ली ब्यूरो के प्रमुख रहे थे। मार्क टली का पूरा नाम सर विलियम मार्क टली है। 1994 के बाद से वे नई दिल्ली में फ्रीलांस जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं।

मार्क टली का जन्म कलकत्ता में 1936 में हुआ था और वे एक अमीर इंग्लिश अकाउन्टेंट के बेटे हैं। अपने बचपन के शुरुआती दस साल उन्होंने भारत में ही बिताए, लेकिन तब उन्हें भारतीय लोगों के साथ मिलने-जुलने की आजादी नहीं थी, लिहाजा इसके बाद उन्हें उनकी स्कूली शिक्षा के लिए इंग्लैंड भेज दिया गया। उनका शिक्षा ट्वाईफोर्ड स्कूल, मार्लबोरो कॉलेज और ट्रिनिटी हॉल, कैम्ब्रिज में हुई, जहां उन्होंने धर्मशास्त्र का अध्ययन किया। कैम्ब्रिज के बाद उन्होंने इंग्लैंड के चर्च में एक पादरी बनने के बारे में सोचा, लेकिन लिंकन थियोलॉजिकल कॉलेज में केवल दो वर्षों के बाद इस विचार को त्याग दिया।

मार्क टली बीबीसी में 1964 में शामिल हुए और एक भारतीय संवाददाता के रूप में कार्य करने के लिए 1965 में भारत आ गए। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने दक्षिण एशिया की सभी प्रमुख घटनाओं को कवर किया जिनमें भारत-पाकिस्तान संघर्ष, भोपाल गैस त्रासदी, ऑपरेशन ब्लू स्टार (और उसके बाद इंदिरा गांधी की हत्या तथा सिख विरोधी दंगे), राजीव गांधी की हत्या और बाबरी मस्जिद विध्वंस शामिल हैं। टली ने जुलाई 1994 में तत्कालीन डायरेक्टर जनरल जॉन बिर्ट के साथ बहस के बाद बीबीसी से इस्तीफा दे दिया।

टली को 1985 में ‘ऑफिसर ऑफ दि ऑर्डर ऑफ दि ब्रिटिश एम्पायर’ बनाया गया और 1992 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। वर्ष 2002 में उन्हें नाइट की उपाधि से सम्मानित किया गया और 2005 में उन्हें पद्म भूषण सम्मान प्रदान किया गया।

वहीं फाय डिसूजा का नाम सुनते ही पिछले साल की वो बहस आंखों के सामने आ जाती है, जिसमें उन्होंने बड़ी शालीनता और धैर्य के साथ अभद्रता पर उतरे मौलाना को जवाब दिया था। यही वो क्षण था, जिसने बतौर महिला एंकर फाय डिसूजा को एक अलग पहचान दिलाई। सोशल मीडिया पर उस बहस का विडियो खूब वायरल हुआ, इतना ही नहीं दूसरे मीडिया संस्थानों ने भी उस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। आम तौर पर ऐसे नज़ारे कम देखने को मिलते हैं। ‘मिरर नाउ’ की एग्जिक्यूटिव एडिटर फाय डिसूजा रात 8 बजे आने वाले शो ‘द अर्बन डिबेट’ (The Urban Debate) को होस्ट करती हैं। ये शो इस टाइम स्लॉट में लोकप्रिय और बेहतरीन शोज़ में से एक है।

डिबेट शो में आमतौर पर पैनलिस्ट की आक्रामकता का असर एंकर पर भी दिखाई देता है। कई बार तो एंकर भी अपना आप खो बैठते हैं, लेकिन फाय डिसूजा बिलकुल अलग हैं। वे बखूबी जानती हैं कि जब शब्दों की आग बरस रही हो, तो खुद पर कैसे नियंत्रण रखना है। डिसूजा सामाजिक और राजनीतिक के साथ-साथ आर्थिक मुद्दों पर भी गहरी पकड़ रखती हैं। मिरर नाउ का हिस्सा बनने से पहले वह ‘ईटी नाउ’ में ‘इन्वेस्टर गाइड’, ‘ऑल अबाउट स्टॉक’ और ‘द प्रॉपर्टी गाइड’ जैसे आर्थिक मसलों से जुड़े शो होस्ट करती थीं।

मूलरूप से बेंगलुरु निवासी फाय डिसूजा ने माउंट कार्मल से जर्नलिज्म की पढ़ाई की। उनके पास अंग्रेजी साहित्य में बैचलर और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री भी है। पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो की, इसके बाद 2003 में सीएनबीसी टीवी 18 से जुड़ीं और फिर टाइम्स ग्रुप से। डिसूजा को पर्दे के पीछे रहकर अपनी आवाज़ से जादू बिखेरना अच्छा लगता था, इसलिए उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो को सबसे पहले चुना। लेकिन करियर की संभावनाओं को देखते हुए उन्होंने टीवी की दुनिया में कदम रखा। स्कूल के दिनों में फाय डिसूजा ने काफी डिबेट में हिस्सा लिया था, इसलिए जब अप्रैल 2017 में मिरर नाउ के साथ टीवी पर उन्हें लाइव डिबेट करने का मौका मिला तो उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। इसके बाद तो उन्होंने सफलता के नए-नए आयाम स्थापित किये।

करीब 50 पत्रकारों की टीम को संभालने वालीं फाय डिसूजा का मानना है कि पत्रकारों को राष्ट्रीय मुद्दे उठाने के साथ-साथ आम आदमी को भी तव्वजो देनी चाहिए। उनकी यही कोशिश रहती है कि ‘द अर्बन डिबेट’ में वह ऐसे मुद्दों को छेड़ें जिनका कहीं न कहीं आम लोगों से प्रत्यक्ष तौर पर जुड़ाव होता है। टीवी पत्रकारिता की दुनिया में आज फाय एक जाना पहचाना नाम हैं। अन्य पत्रकारों के लिए वह एक उदाहरण हैं कि कैसे सौम्यता और शालीनता के साथ भी अपनी बात कही जा सकती है।



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