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मीडिया चौपाल में श्री गोविंदाचार्य ने कहा सर्वनाश को जन्म दे रहा है व्यक्तिवादी विकास

श्री नीलमेघाचार्य गाविन्दाचार्य गोविंदाचार्य को सुनना अपने आप में एक दुर्लभ अनुभव होता है। अपने धाराप्रवाह व्याख्यान में वे प्रकृति, पर्यावरण, धर्म, अध्यात्म, विज्ञान और संस्कृति से लेकर मानवीय संवेदनाओं से जेड़े हर विषय को जिस नीर-क्षीर विवेक से प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर सोचने और समझने पर मजबूर कर देते हैं उस आनंद को वही अनुभव कर पाता है जो उनके व्याख्यान को सुनने का मौका पाता है।

हरिद्वार में आयोजित मीडिया चौपाल में विकास अवधारणा एवं दृष्टि और मीडिया जैसे बोझिल से लगने वाले विषय पर जब श्री गोविंदाचार्यजी ने अपनी बात गाय गंगा और यमुना से शुरु कर जीडीपी और पशु अधिकारों व स्वास्थ्य जैसे तमाम विषयों को समेट कर शुरु की तो देश भर से आए मीडिया कर्मियों के लिए ये एक ऐसा पक्ष था जिसके बारे में शायद उन्होंने कभी सोचा ही नहीं था। देवकी परमानंदम कृष्ण वंदे जगत गुरूं से अपनी बात शुरु करते हुए श्री गोविंदाचार्य जी ने कहा, जब से हमारे देश में और दुनिया में ग्लोबलाईज़ेशन की बयार चली है हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। 25 साल पहले देश में आर्थिक उदारवाद शुरु किया गया। इसका नतीजा ये हुआ कि देश में 25 साल पहले 80 प्रतिशत लोगों के पास 20 प्रतिशत संपत्ति थी और आज देश के 20 प्रतिशत कारोबारी घरानों का देश की 80 प्रतिशत संपत्ति पर कब्जा हो गया है।अकेले अंबानी की संपत्ति दुनिया के कई देशों और देश के कई राज्यों से ज्यादा है और आज इसी देश में 50 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं।

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उन्होने कहा कि हमारी सरकारों ने विकासवाद की झूठी परिभाषाएँ तय कर रखी है। विकास का मतलब जीडीपी नहीं बल्कि विकास का मतलब है सबसे पीछे वाला आगे आए। अभी जो विकास हो रहा है उसमें जो आगे है वौ और आगे जा रहा है और पीछे वाला हाशिये पर भी नहीं है।

उन्होंने कहा कि विज्ञान अभी गाय गंगा और यमुना को नहीं समझ पाया है। यमुना और गंगा दोनों का उद्गम पास पास है लेकिन यमुना का जल काला क्यों है और गंगा का जल साफ क्यों दिखाई देता है। गंगा में मछलियों और मगर की बहुतायत है तो यमुना में कछुओ की। इन दोनों नदियों का मिलन भी गहरी वैज्ञानिकता लिए हुए है। गंगा ज्ञान की और यमुना प्रेम की प्रतीक है तो नर्मदा वैराग्य की। दुनिया में कोई नदी इतनी ऊँचाई से नहीं निकली है जितनी गंगा और यमुना। गंगा में हिमालय क हजारों वनस्पतियाँ मिलकर इसके जल को शुध्द बना देती है। यमुना को हम यम की बहन मानते हैं और इसीलिए महाभारत का युध्द यमुना के किनारे हुआ। इसमें 70 लाख लोग मारे गए थे।

उन्होंने कहा कि हम आदमी की सुख सुविधाओं को विकास मान बैठे हैं इसलिए ये विकास सर्वनाश ला रहा है। जब तक विकास में पशु-पक्षियों, नदियों और प्रकृति को शामिल नहीं किया जाएगा हम विकास के नाम पर सर्वनाश के बीज बोते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को ये समझना चाहिए कि हमारे देश में 120 तरह की प्राकृतिक विविधताएँ हैं। इसी के अनुरूप मनुष्य, पशु-पक्षियों और प्रकृति का संतुलन भी बना हुआ है, मगर विकासवाद से हम इस संतुलन को नष्ट करते जा रहे हैं। हमारे देश में कई प्रजातियों का गौवंश है और हमारे देश की गाय की ये विशेषता है कि उसके कूबड़ में सूर्य की उर्जा को ग्रहण करने की ताकत होती है। उसी से उसके शरीर में सूर्यकेतू नाड़ी बनती है जिसकी वजह से गाय का दूध, गोबर और मूत्र विशेष चिकित्सकीय गुण रखता है।

श्री गोविंदाचार्य ने कहा कि जिस ओड़िशा के हरिकोटा से अंतरिक्ष में उपग्रह छोड़े जाते हैं उसी जिले के दीना माझी को अपनी पत्नी की लाश ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं मिलती; ये कैसा विकास है?

उन्होंने कहा कि हम और हमारी सरकार जीडीपी की विकास दर से खुश है जबकि जीडीपी तभी बढ़ती है जब किसी देश में बीमारियाँ और अपराध बढ़ते जाए। उन्होंने समझाते हुए कहा कि देश में बीमारियाँ फैलती है लोग जॉक्टर क पास जाते हैं, डॉक्टर का कारोबार बढ़ता है, फिर अस्पतालों का और फिर दवाई बनाने वालों का कारोबार बढ़ता है। इसी तरह देश में अपराध बढ़ते हैं, फिर सरकार पुलिस बल की संख्या बढ़ाती है, फिर जेल भवन बनते हैं और ये सब विकास की परिभाषा में आकर जीडीपी की वृध्दि की परिभाषा तय करते हैं, ये विकास का सूचक है कि बीमार और अपराधी समाज के निर्माण का? उन्होंने बताया कि बुलंद शहर में सबसे ज्यादा दूध का उत्पादन होता है लेकिन वहाँ पशुओं की संख्या ही इतनी नहीं है कि इतने दूध का उत्पादन हो सके। उन्होंने कहा कि जब देश आज़ाद हुआ तब एक आदमी पर एक गाय का अनुपात था आज ये अनुपात 6-7 आदमी पर एक गाय का रह गया है तो फिर हमें शुध्द दूध कहाँ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सच्चा विकास वह है जिसमें देश के एक आम आदमी की न्यूनतम आवश्यकताओँ की पूर्ति हो सके। उन्होंने बताया कि मिर्जापुर जिले में किसान नील गायों के आतंक से परेशान हैं, लेकिन ये समस्या इसलिए पैदा हुई कि नीलगायों को खाने वाले जानवर सियार, लोमड़ी, लक्कड़बग्घा जंगलों से गायब हो गए। आज हम मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं क्योंकि हमारा भूजल इतना नीचे चला गया है कि मेंढक का जीना मुश्किल हो गया है। मेंढक बारिश के दिनों को छोड़कर जमीन की अदर नमी वाले क्षेत्र में चला जाता है और बारिश में ऊपर आकर मच्छरों के लार्वा, प्यूपा और अंडों का शिकार करता है। लेकिन अब नमी की तलाश में मेंढक जमीन के इतने अंदर चला जाता है कि बारिश होने की उसको खबर ही नहीं होती है।

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उन्होने कहा कि ग्लोबलाईज़ेशन वाले विकास ने हमें एक ऐसी अंधी गली के मुहाने पर लाकर छोड़ दिया है कि आगे कोई रास्ता ही नहीं सूझ रहा है।

मीडिया की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अमिताभ बच्चन और लोक नायक जयप्रकाश नारायण का जन्म दिन एक ही दिन आता है लेकिन देश का मीडिया अमिताभ बच्चन का तो महिमामंडन करता है और जय प्रकाश को भूल जाता है।

सोशल मीडिया की चर्चा करते हुए श्री गोविदाचार्य ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो टेंडिग होती है उसी पर विजुअल मीडियाबहस करता है और प्रिंट मीडिया भी वही खबर बना देता है। देश का मीडिया सेंसेटिव नहीं रहा ये सेंसेशन का शिकार हो गया है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि देश का लाखों आदिवासी ग्वालियर से दिल्ली जुलुस के रूप में जा रहे थे तो एक टीवी चैनल वाले ने अपने रिपोर्टर द्वारा दी गई ये खबर इसलिए नहीं दिखाई कि उसमें कोई खूबसूरत चेहरा नहीं था, उस रिपोर्टर से कहा गया कि वो इन आदिवासियों में कोई खूबसूरत चेहरा खोजकर उनकी बाईट ले तो ये खबर टीवी पर चलाएंगे।

उन्होंने कहा कि देश के टीवी न्यूज वालों ने एक अस्वस्थ प्रतियोगिता का ऐसा दौर शुरु किया है कि एक चैनल अगर कोई घटिया या झूठी खबर दिखाएगा तो दूसरे चैनल उससे आगे बढ़कर झूठ परोसेंगे। हरियाणा के एक गाँव छोछी में एक ट्रक ड्रायवर की मौत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक अखबार ने जब ये खबर दी कि इस ड्रायवर की मौत एच्स से हो गई है तो दूसरे अखबार वालों ने अपने रिपोर्टरों को भी एड्स की खबरें लाने में लगा दिया और रिपोर्टरों छोछी गाँव में एड्स को लेकर ऐसी कहानियाँ गढ़ी कि इस गाँव के लड़कों और लड़कियों के लिए जो रिश्ते आए थे वो टूट गए, क्योंकि खबरों में सा बताया जा रहा था कि पूरा गाँव एड्स से ग्रस्त हो गया है। इस मिथक को तोड़ने में कई सामाजिक कार्कर्ताओं को तीन साल लगे। उन्होंने कहा कि मीडिया सबसे तेज और सबसे आगे के चक्कर में सबसे घटिया और गैर जिम्मेदार होता जा रहा है।

‘विज्ञान-विकास और मीडिया पर हरिद्वार के ‘निष्काम सेवा ट्रस्ट’ में दो दिवसीय मीडिया चौपाल का ये पहला दिन व पहला सत्र था। समकालीन व सामाजिक विकास के ज्वलंत विषयों पर आधारित यह अभी तक का पांचवा चौपाल है। चौपाल में हरिद्वार के सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल के साथ निश्केयर संस्था के प्रमुख डा मनोज पटेरिया मौजूद थे। दिव्य प्रेम सेवा मिशन के प्रमुख आशीष गौतम ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

अपने उदबोधन में सांसद रमेश पोखरियाल ने कहा कि जिस विकास के पीछे हम दौड़ रहे हैं, उस विकास में समन्वयता की जरुरत है। हमारा उद्ेश्य स्वार्थ हित मे नहीं बल्कि बहुआयामी है इसलिए लोग हमारे विचारो को स्वीकार कर रहे हैं। चौपालियों को संबोधित करते हुए समाजसेवी अनूप नौडियाल ने कहा कि युवाओं में सीखने और जानने की जिज्ञासा होती है, इसलिए मीडिया चौपाल उन्हें प्रेरणाप्रद मंच प्रदान करता है। निस्केयर के प्रमुख डॉ. मनोज पटेरिया ने बताया हम ऐसा मंथन करें कि समाज में विकास संचार के माध्यम से हमारे चारों ओर जागरुकता फैले।

चौपाल में देव संस्कृति विश्सवविद्यालय के विद्यार्थियों ने गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ कार्यक्रम का प्रारम्भ किया। इसके साथ मीडिया चौपाल की सम्पूर्ण विवेचना को प्रस्तुत करते एक समाचार पत्र का भी विमोचन किया गया। दे दिन तक चलने वाली मीडिया चौपाल में देश भर के अनके विद्वान विकास एवं मीडिया से जुडे विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखेंगे। जिसमें वेदान्त में आधुनिक विज्ञान की प्रासंगिकता, आनन्द का विज्ञान और विकास के विभिन्न आयामों की अवधारणा, संचार की आवश्यकता, संचारकों की नई भूमिका एवं वर्तमान मीडिया परिदृश्य में ‘सूचनाओं से बेहाल जनता व संदेशों के अकाल से ग्रसित मीडिया’ का समाधान क्या है? जैसे ज्वलंत मुद्दें पर संवाद किया जाएगा।

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चौपाल के मुख्य आयोजक स्पंदन के साथ देव संस्कृति विश्वविद्यालय, दिव्य प्रेम सेवा मिशन, इण्डिया वाटर पोर्टल, निस्केयर, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय कर रहा है।

मीडिया चौपाल में अनिल सौमित्र, केसर सिंह, संजय चतुर्वेदी, हर्षवर्धन त्रिपाठी, डा सुखनंदन सिंह, आशिष अंशु, कुसुमलता केडिया, अनिल सति, आदि मौजूद थे।

इससे पहले चौथा मीडिया चौपाल ग्वालियर में हुआ था। जिसमें ‘जन-जन के लिए मीडिया’, ’विज्ञान की बात जन-जन के साथ’, ‘नदी संरक्षण’, ‘नदी संरक्षण एवं पुनजीर्ववन’, जैसे गंभीर व ज्वलंत विषयों पर मंथन किया जा चुका है।

कार्यक्रम की शुरुआत में मीडिया चौपाल में पूर्व में भागीदारी कर चुके आशुतोष कुमार सिंह आशीष अंशु, विवेक पांडे, आईबीएन 7 के केशव कुमार, हिन्दी अकादेमी के उपाध्यक्ष श्री सुशील कुमार भारत सरकार की पत्रिका योजना के संपादक श्री रीतेश पाठक ने भी मीडिया चौपाल की मीडिया कर्मियों के लिए उपयोगिता और इसकी सार्थकता पर अपने विचार व्यक्त किए। इकानामिक्स टाईम्स के पूर्व पत्रकार श्री भुवन भास्कर ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि वे पहले की चौपालों में नहीं आ पाए मगर इस बार संकल्प लेकर इसमें शामिल हुए हैं। मीडिया चौपाल के इस पाँचवें आयोजन में देश भर के 200 से अधिक पत्रकारों के साथ ही पत्रकारिता व जनसंचार की पढ़ाई कर रहे छात्र –छात्रा भी इसमें भागीदारी कर रहे हैं।
सत्र का संचालन पत्रकार श्री हर्ष और स्पंदन के श्री अनिल सौमित्र ने किया।

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