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सीमा पर तैनात पिता से मिलने अकेले ही 4500 किमी. का सफर तय किया 9 साल की बच्चियों ने

नई दिल्ली. फौजी पिता से मिलने की चाहत में 9 साल की दो बच्चियां मेघालय स्थित अपने घर से अकेले ही पाकिस्तान बॉर्डर के लिए निकल पड़ीं। लेकिन दोनों दिल्ली आकर भटक गईं। इनमें से एक के पिता पंजाब स्थित पाक बॉर्डर और दूसरे के पिता छत्तीसगढ़ के नक्सल इलाके में बतौर बीएसएफ जवान तैनात हैं। मेघालय की राजधानी शिलांग से पाकिस्तान बॉर्डर तक ढाई हजार किलोमीटर लंबे सफर में बच्चियां जब दिल्ली पहुंचीं तो आरपीएफ जवान मामले को भांप गए और बच्चियों को बीएसएफ हेडक्वार्टर भिजवा दिया। दूसरे बच्चे पापा के साथ खेलते थे तो याद आती थी…

– बच्चियों ने बताया कि जब दूसरे बच्चे अपने पापा के साथ खेलते थे, तो उन्हें भी अपने पिता की याद आती थी।
– बच्चियों की हसरत थी कि वे भी और बच्चों की तरह अपने पापा के साथ खेलें, बाजार जाएं, खाना खाएं और पिता के साथ ही स्कूल आना-जाना हो।
– 9 साल की अनीषा के पिता सुभाष चंद पंजाब बॉर्डर पर गए थे, लेकिन इन दिनों उनकी ड्यूटी कश्मीर में थी।

शिलांग से गुवाहाटी और फिर दिल्ली
– अनीषा अपने पिता की तैनाती की जगह, प्लाटून नंबर और ऐड्रेस लेकर घर से निकली थी। अनीषा और तीसरी क्लास में पढ़ने वाली उसकी दोस्त पेमा शेरपा 4 अगस्त की दोपहर घर से निकलीं।
– दोनों शिलांग से गुवाहाटी जाने वाली टाटा सूमो में सवार हुई। गुवाहाटी स्टेशन से ये बच्चियां बिना टिकट ट्रेन में बैठीं और 6 अगस्त को दिल्ली पहुंच गई।
– दिल्ली स्टेशन से दोनों पाक बॉर्डर जाने वाली ट्रेन में सवार होना चाहती थीं पर भीड़ और अनजानी भाषा के कारण भटक गईं।
– इसी दौरान आरपीएफ अधिकारी सुनील चौबे और नितिन मेहरा ने अनीषा और पेमा को स्टेशन पर अकेले घूमते देख उनसे बात की। बच्चियों से मिले जवाब से दोनों दंग रह गए।

शिलांग पुलिस को बताया घटना के बारे में
– बच्चियों ने बेहद मासूमियत से बताया कि वे अपने पापा से मिलने पाकिस्तान बॉर्डर जा रही हैं और अब रोकने से रुकेंगी नहीं। पेमा को उम्मीद थी कि उसके पिता भी वहीं होंगे।
– आरपीएफ जवानों ने बच्चों को चिप्स और कोल्ड ड्रिंक्स दिलवाई और पाक बॉर्डर जाने वाली ट्रेन में बैठाने का बहाना करके थाने ले आए।
– यहां बच्चों से कोई सीधी पूछताछ नहीं कि गई। बस बातों बातों में पता लगाया कि वे शिलांग से हैं और दोनों के पिता बीएसएफ में हेड कॉन्स्टेबल हैं।
– थाना इंचार्ज आरके. लाकड़ा ने चुपचाप पूरी बात बीएसएफ मुख्यालय और शिलांग पुलिस को बताई। मामले की गंभीरता देखते हुए डीजी स्तर के अधिकारी इस चर्चा में शामिल हुए।
– इसके बाद देर रात बच्चियों को बीएसएफ कैम्प स्थित महिला बटालियन को सौंप दिया गया। यहां उन्हें उनके पिता से मिलवाया गया। बाद में वे उन्हें यहां से घर ले गए।

शिलांग में क्राइम ब्रांच कर रही थी जांच
– शिलांग के रिंजहा थाने में दोनों बच्चियों के परिवार ने अपहरण का मुदकमा दर्ज कराया था।
– लोकल लोग इन बच्चियों के लापता होने से गुस्से में थे और थाने का घेराव करके बैठे थे।
– इसी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एसपी क्राइम ब्रांच को मामले की जांच सौंपी थी।

दोनों के पिता को प्लेन से बुलाया और एक महीने की छुट्‌टी दी
– बीएसएफ कमांडेंट शुभेंदु भारद्वाज के मुताबिक, दोनों जवानों के लिए फ्लाइट की व्यवस्था कर उन्हें बच्चियों से मिलवाया गया है। अनीषा के पिता फिलहाल कश्मीर की बर्फीली चोटियों पर ड्यूटी कर रहे थे।
– जवानों की विशेष छुट्‌टी मंजूर कर उन्हें परिवार के साथ समय बिताने का अवसर दिया गया है। पेमा के पिता पी शेरपा ने भास्कर को बताया कि उनकी बेटी को उनसे बेहद लगाव है।
– उन्हें छुट्‌टी मिलने में भी कभी दिक्कत नहीं हुई और सप्ताह भर पहले ही वह छूट्‌टी काट कर वापस ड्यूटी पर लौटे थे।
– बावजूद इसके फोर्स ने उन्हें अपनी बच्चियों के साथ समय बिताने के लिए एक महीने की छुट्‌टी दे दी है।

साभार- http://www.bhaskar.com/ से

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