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रामेश्वरम का कायापलट – एक यात्री की आँखों देखी

पिछले पाँच साल में मोदी सरकार में तीर्थों के कायाकल्प के अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। फिर चाहे उन्हें ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी से जोड़ना हो, संरक्षण हो या मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना हो। जिसमें केदारनाथ, वैष्णोदेवी, काशी, अयोध्या, वृंदावन, उज्जैन, से लेकर रामेश्वरम तक शामिल हैं। मैं पिछले साल मार्च में श्री रामेश्वरम धाम व श्रीरामसेतु गया था, जिसे दुर्दशा से निकालने में मोदी सरकार ने कोई कसर बाकी नहीं रखी।

रामसेतु राष्ट्रीय धरोहर है, उसका पूर्ण संरक्षण मोदी सरकार द्वारा किया जा रहा है। रामसेतु पर केंद्र सरकार द्वारा एकदम चकाचक रोड बनाया गया है। पहले रामसेतु के भारतीय अंतिम छोर तक जाने के लिए जहाज से ही जाना पड़ता था। सरकार द्वारा उस पूरे रामसेतु पर 20 किलोमीटर लम्बा हाइवे बनाया गया है जिसपर सब वाहन चल रहे हैं और अंतिम छोर तक बोट से जाने की बाध्यता खत्म हो गई है। रामसेतु पर बने इस 20 किलोमीटर रोड के दोनों तरफ उत्ताल समुद्र उछाल मारता है।

धनुषकोड़ी अर्थात “रामसेतु” का भारतीय अंतिम छोर जो जमीन तल पर है, उसके आगे का रामसेतु सागर की लहरों के नीचे है, पर धनुष्कोडी के थोड़ा आगे आगे तीन द्वीप जैसे दिखते हैं जो रामसेतु का ही अंग हैं। पहले असली धनुष्कोडी तक जाना इतना कठिन था कि गाइड लोग तीर्थयात्रियों को विभीषण मन्दिर तक ही लेकर जाते थे, जो कि धनुष्कोडी से 11 किलोमीटर पहले ही पड़ जाता है। वो लोग उसी को रामसेतु का अंतिम छोर बता देते थे, उसी को धनुष्कोडी कह दिया करते थे, जबकि यह गलत था। ज्यादातर लोग धनुष्कोडी जा ही नहीं पाते थे। मोदी सरकार द्वारा यह अति अद्भुत और महत्वपूर्ण कार्य हुआ है जो मेरा आंखों से देखा हुआ है। अब आसानी से धनुष्कोडी तक रामसेतु के ऊपर बनी रोड से जा सकते हैं जिस रोड के दोनों तरफ समुद्र है। पूर्व राष्ट्रपति श्री एपीजे अब्दुल कलाम का स्मारक भी एक राष्ट्रीय धरोहर के रूप में विकसित किया गया है।

इसके साथ ही 1963 कि बाढ़ में तबाह हो चुका रामेश्वरम रेलवे स्टेशन का भी अब पुनः पुनर्निर्माण किया जाएगा। पूरे रामेश्वरम में रोड से लेकर बिजली, सफाई तक की तमाम व्यवस्थाएं चाकचौबंद की जा चुकी हैं। स्वयं प्रधानमंत्री ने रामनाथस्वामी भगवान महादेव की पूजा कर यह सब कार्य राष्ट्र को समर्पित किए थे। इसके साथ ही भारत को श्रीलंका से जोड़ने वाले सीधे रेलनेटवर्क की परियोजना अब जल्द ही पटरी पर आने वाली है। पूर्व की सरकारों ने कभी भारत की संस्कृति के असली चिन्हों को सहेजने का प्रयास नहीं किया, बल्कि उन्हें नष्ट करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। तीर्थों का उद्धार आज शताब्दियों बाद कोई शासक कर रहा है, जिसकी शक्ति 100 करोड़ हिन्दू हैं। सच तो यह है कि देवी अहिल्याबाई होल्कर के बाद हिन्दू मन्दिरों की सुधि अगर किसी ने ली है तो उसे इतिहास नरेंद्र मोदी के नाम से याद रखेगा। नरेंद्र मोदी को रामद्रोही कहने वाले नाटकबाज शायद श्रीरामसेतु को श्रीराम का रामसेतु नहीं ईसाईओं का एडम ब्रिज समझते हैं!!

इस फोटो में आप देख सकते हैं, रेत वाला हिस्सा धनुष्कोडी है जो रामसेतु की अंतिम छोर है। इससे 11 किमी पहले विभीषण मन्दिर पड़ता है। धनुष्कोडी के आगे समुद्र के पानी में उथला हुआ रामसेतु है। इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा मित्रों के साथ शेयर करें।

जय श्री राम

 

 

 

 

साभार https://www.facebook.com/Rprampukar/ से

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