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कब्रों पर चमत्कार का फर्जीवाड़ा

पूरे भारत में हजारों पीर की कब्रे हैं। सब पर जाने वाले और करोड़ों का चढ़ावा चढ़ाने वाले कौन हैं? वही हिन्दू जिसे लगता है कि इसमे दबा हुआ शव जिसे कीड़े खा चुके हैं इनकी मनोकामना पूरी करेगा। प्रत्येक पीर के साथ चमत्कार की कहानियां जोड़ दी गई हैं। सामान्य हिन्दू यह जानने की कोशिश कभी नहीं करता कि चमत्कारी कहानी में कितना सच है।

चमत्कार का आरम्भ कैसे होता है? एक कहानी से समझिए-सर्दियों की अंधेरी रात थी। एक रात एक आदमी ने पंसारी की दूकान से चीनी की 2 बोरी चुरा ली. जब वह उन्हें ले जाने लगा तो चौकीदार ने शोर मचाया। कुछ आदमी पीछे भागे.

चोर ने पकडे जाने के डर से सोचा-क्यों ना बोरी कुँए में फेंक दूँ। एक तो वह जैसे तैसे रात के अँधेरे में पास वाले कुएँ में फेंकदी, लेकिन जब दूसरी बोरी क़ुए में डालने लगा तो खुद भी बोरी के साथ कुँए में गिर गया।

सुबह शोर सुनकर लोग इकट्ठे हो गए। कुएँ में रस्सियाँ डाली गईं। उस आदमी को बाहर निकाल लिया गया. परन्तु सर्दी के कारण और रात भर पानी में रहने से वह कुछ घंटों के बाद मर गया। मरने के बाद दफना दिया गया.

दूसरे दिन जब लोगों ने इस्तेमाल के लिए कुएँ में से पानी निकाला तो वह मीठा था।

नजदीक की मस्जिद के मौलवी साहब ने इसे चमत्कार बताया.
उस आदमी को पीर घोषित किया. उसकी कब्र को आलिशान दरगाह बना दिया. पीर के चमत्कारों की कहानियाँ चारों तरफ फ़ैल गई। हजारों हिन्दू हनुमान जी को छोड़ कर दरगाह पर जाने लगे। उनमे वह पंसारी भी था जिसकी दूकान में चोरी हो गई.

हर साल उस दरगाह पर उर्स मनाया जाता है. हिन्दुओं द्वारा करोड़ों का चढ़ावा चढ़ाया जाता हैं।
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प्रश्न- क्या पीर पर मांगी गई मन्नत पूरी होती है?
आप किसी भी पीर पर जाने वाले से पूछोगे तो आधे से अधिक बताएंगे कि उनकी मन्नत पूरी हुई थी। क्या ये सब गलत हैं या इन सभी को भ्रम हुआ है?

उत्तर- मन्नत या मनोकामना पूरी होने के पीछे औसत का नियम काम करता है।
बेटा पैदा होना, रोग दूर होना, परीक्षा में पास होना आदि।

उदाहरण के लिए 1 रुपए लें। उसे 100 बार उछालने पर हेड या टेल आने की सम्भावना 50-50 होती है। बेटा और बेटी पैदा होने की सम्भावना भी इतनी ही है। बस वे लोग चुप रहे जिन्होंने बेटे की मन्नत मांगी और बेटी हुई। परन्तु जिन्होंने बेटा मांगा और बेटा हुआ उन्होंने इसका जोर शोर से प्रचार किया।
परीक्षा में पास होने की या रोग दूर होने की सम्भावना तो 66% से अधिक ही होती है। बेटे या बेटी की शादी के लिए दामाद या बहू मिलने की सम्भावना तो लगभग 100% होती है।

इनमें से कोई भी सूर्य के पश्चिम से उगने की मन्नत नहीं मांगता। कोई भी मिर्च के बीज से आम या अंगूर उत्पन्न होने की मन्नत नहीं मांगता। कोई भी मई जून में ठण्ड की व जनवरी में गर्मी की मन्नतें नहीं मांगता। केवल वही मन्नतें मांगी जाती हैं जिनके पूरा होने की सम्भावना हो।

आज पूरे भारत में कहीं भी पीर की कब्र रातों रात बना दी जाती है। फ्लाईओवर पर भी पीर की कब्र बना दी जाती है। वैसे यह प्रचलन नया नही है। एक ऐतिहासिक भवन में ऊपरी मंजिल पर कब्र बनी हुई है। आश्चर्य है कि छत पर किसी को कैसे दफनाया जा सकता है।

बेहद कीमती व्यवसायिक जमीनों पर पीर है। दिल्ली, गुड़गांव में अनेक बहुमूल्य जमीनों पर पीर की कब्र हैं। किसी भी शहर में व्यापारिक केंद्र के पास, रेलवे स्टेशन के पास व बस स्टैंड के पास भी पीर के नाम पर करोड़ों की जगह कब्जाई हुई मिल जाएगी।
यहाँ से फिर ज़मीन Jहाद शुरू हो जाता है। कुछ समय बाद उस पीर के कागज वक्क बोर्ड में जाते है। वक्क बोर्ड किसी कोर्ट में जाता है। कोर्ट के माध्यम से नमाजी मोमिन उस पीर की ज़मीन पर कब्जा कर लेते है। आगे दुकान निकाल लेते हैं और पीछे पीर का का चढ़ावा उठाते रहते है। उस चढ़ावे के पैसे से Jहाद चलाते हैं। यही तो है सारा खेल।

विश्वास रखिए-
इन पीरों के चमत्कार का रहस्य केवल हिंदुओं का चढ़ावा है। आप चढ़ावा बन्द करिए। पीर अपने आप भाग जाएगा।

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