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श्री पुनीत गोयनका ने कहा, खबर पहले देने से ज्यादा महत्व उसके विश्वसनीय होने का है

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स 2016’ को नोएडा के ‘रेडिसन ब्लू’ होटल में आयोजित कार्यक्रम में टेलिविजन न्यूज के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले उन लोगों को पुरस्जिकृत किया गया जिन्होंने देश में टेलिविजन ब्रॉडकास्टिंग के भविष्य की मजबूत नींव रखी है।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए ‘जी ऐंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ के एमडी और सीईओ पुनीत गोयनका ने इन अवॉर्ड्स के महत्व को रेखांकित करते हुए निडर पत्रकारिता की जरूरत पर बल दिया। श्री गोयनका ने एक प्रसिद्ध रूसी पत्रकार की पंक्ति ‘What matters is the information and not what you think about it’ का उदाहरण भी दिया जिन्होंने चेचन्‍या में खराब कानून व्यवस्था के बावजूद निडर पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना एक खास नाम कमाया। हालांकि इस पत्रकार को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले लेकिन आखिर में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। गोयनका ने कहा, ‘क्या इस तरह के ईमानदार पत्रकार का ऐसा हश्र होना चाहिए था, यकीनन इसका जवाब ना में होगा। इसके अलावा यदि कोई पर्यावरण बचाने की दिशा में काम कर रहा है तो क्‍या वे निडर होकर अपना काम कर सकता है, क्या हमने इसके लिए कोई प्रक्रिया बनाई है जो उसके काम की सराहना करे और उसे प्रेरित करे। इसका जवाब भी ना में ही होगा।’

पत्रकारिता में ऐसा अमूल्‍य योगदान देने वालों को पहचान दिलाना काफी महत्‍वपूर्ण

श्री पुनीत गोयनका ने कहा कि पत्रकारिता में ऐसा अमूल्य योगदान देने वालों को मुश्किल से ही सराहना मिलती है। उनका कहना था, ‘जब हम शाम को आराम से घर पर बैठकर डिनर कर रहे होते हैं तो हमें पत्रकारों अथवा न्यूज रूम से खबरों की उम्मीद होती है। हम सच जानना चाहते हैं, हम ईमानदारी के साथ ही निडर पत्रकारिता की उम्मीद भी करते हैं लेकिन हम शायद ही कभी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचते हैं जिसने यह सब किया है। ऐसे पत्रकारों को मुश्किल से ही पहचान मिल पाती है। साल भर में बेहतर पत्रकारिता करने वालों को सम्मानित करने के लिए शायद ही हम कोई कदम उठाते हैं। मुझे काफी खुशी है कि एक्सचेंज 4मीडिया ने इस दिशा में सोचा और यह अवॉर्ड्स दिए जा रहे हैं। इसके अलावा मुझे इस बात की भी खुशी है कि उन्होंने ऐसा चुनाव किया है जिसने हमारे लिए न्यूज रिपोर्टिंग, पैकेजिंग और प्रजेंटिंग में उल्लेखनीय योगदान दिया है।’

श्री गोयनका ने कहा, ‘सभी न्यूज चैनलों के लिए यह बहुत जरूरी है कि वे एक कदम पीछे जाएं और अपने उद्देश्य पर दोबारा से मनन करें। आजकल दर्शक काफी स्मार्ट हो गए हैं और वे आसानी से समझ जाते हैं कि कौन सी स्टोरी सही है और किस स्टोरी में लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए ‘तड़का’ लगाया गया है। मैं यह बात पुख्ता तौर पर नहीं कह सकता हूं कि आज भी दर्शक स्क्रीन पर एनिमेटेड आग देखने में रुचि रखते हैं अथवा इसके पीछे की कहानी में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। लेकिन यदि हम प्रिंट की बात करें तो लोग आज भी न्यूज की तह तक में जाना चाहते हैं। आज के समय में जब न्यूज 140 कैरेक्टर्स में बांध दी गई है लेकिन अगले दिन लोग अखबार उठाते हैं तो न सिर्फ वह न्यूज जानना चाहते हैं बल्कि वह उसकी गहराई तक में जाना चाहते हैं। सवाल यह है कि न्यूज चैनल आखिर क्यों इस तरह की चीजें नहीं दे सकते हैं।’

यह मुद्दा नहीं है कि किसने पहले रिपोर्ट दी बल्कि यह है कि किसने अच्‍छी रिपोर्ट दी।

श्री पुनीत गोयनका ने कहा कि न्‍यूज चैनल्‍स के लिए यह बहुत जरूरी है कि वह लोगों को उपयोगी सामग्री दिखाए और दर्शकों से खुद को जोड़े रखे न कि सिर्फ सबसे पहले न्यूज दे दे। गोयनका ने कहा, ‘क्या हम सोचते हैं कि सबसे पहले न्यूज देने से हम दूसरे चैनलों से आगे निकल जाएंगे। जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि आज के दर्शक काफी समझदार हैं। ऐसे में मुझे नहीं लगता कि वे इस बात की चिंता करते हैं कि किसने रिपोर्ट सबसे पहले दी है बल्कि वे इस बात का ज्यादा ध्यान रखते हैं कि इस रिपोर्ट को किस तरह से तैयार किया गया है। पूर्व में बताया गया था कि कुछ छोटे प्रादेशिक जनरल एंटरटेमेंट चैनल (GEC) बड़े न्‍यूज चैनलों की टक्‍कर में पहुंच गए हैं। हालांकि यह तुलना सही नहीं है लेकिन ऐसा इसलिए हुआ है कि प्रादेशिक जनरल ऐंटरटेनमेंट चैनल ने वैल्‍यू (value) डिलीवर की है और अपने व्‍युअर्स से खुद को जोड़े रखा है। वे चीजों को समझकर उसी हिसाब से डिलीवर करते हैं। जिस दिन न्यूज चैनल इस तरह की काम करना शुरू कर देंगे, मेरा मानना है कि फिर व्युअरशिप के लिए उन्हें किसी तरह के स्‍पेशल इफेक्‍ट की जरूरत नहीं पड़ेगी।’

श्री गोयनका ने कहा, ‘व्युअर्स न्यूज चैनलों की पावर और उनकी क्षमता को अच्छी तरह पहचानता है। जब लोग देखते हैं कि पत्रकार किसी जनप्रतिनिधि का इंटरव्यू कर रहा है और प्रधानमंत्री तक से वह ईमानदारी से सवाल पूछ रहा है तो उन्हें संतोष होता है कि कोई तो है जो उनकी तरफ से सवाल पूछ रहा है। ऐसे में वह खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं कि कोई तो ऐसा माध्‍यम है जिसमें इन सवालों को पूछने का माद्दा है। लेकिन इस तरह समस्‍याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। इसलिए मैं सोचता हूं कि न्‍यूज चैनल को अपने उद्देश्‍यों की ओर बढ़ना चाहिए।। उन्‍हें सिर्फ रिपोर्टिंग नहीं करनी चाहिए बल्कि आम आदमी की परेशानियों का हल भी निकालना चाहिए। उन्‍हें इस तरह का व्‍यवहार करना चाहिए कि वे आम आदमी के हितों के लिए मजबूत दावेदारी कर रहे हैं। एक बार यह चीजें होनी शुरू जाएं तो बाकी अपने आप शुरू हो जाएगा।’

मीडिया में स्वामित्व और पारदर्शिता के मामले पर चिंता जताते हुए गोयनका ने कहा, ‘मैं उसी बात पर जोर दूंगा जिसके बारे में हमारे चेयरमैन और राज्यसभा सदस्‍य डॉ. सुभाष चंद्रा ने चिंता जताई थी कि हमें ऐसे असामाजिक तत्वों को न्यूज चैनल्स में निवेश करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए जो दर्शकों के मतलब की नहीं बल्कि अपने मतलब की न्यूज तैयार करते हैं।

इएनबीए अवॉर्ड का आठवां संस्करण था और ‘जी राजस्थान न्यूज’ द्वारा प्रायोजित था। इस बार के एडिशन में 31 विभिन्न श्रेणी को शामिल किया गया। इसके तहत ब्रॉडकास्ट न्यूज इंडस्ट्री की ओर से ईएऩबीए की पहल को अच्छा प्रतिसाद मिला और विभिन्न श्रेणी मे 300 से ज्‍यादा प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। । वर्ष 2008 में अपनी शुरुआत के बाद से ही यह अवॉर्ड टेलिविजन न्यूज के क्षेत्र में बेहतर काम करने वालों की पहचान कर उन्हें सम्मानित करता आ रहा है।

बहुप्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स 2016’ को नोएडा के ‘रेडिसन ब्लू’ होटल में आयोजित एक रंगारंग कार्यक्रम में प्रदान किए गए।



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