आप यहाँ है :

मेरे माता पिता मेरे गुरु हैं :-सिद्धांत भोसले

सिद्धांत भोसले संगीत की दुनिया का एक नया सितारा हैं जो अपनी सुरों की रोशनी लोगों के दिलों में फैला रहा है। यह जितना अच्छा गाते हैं उतने ही स्वभाव के विनम्र हैं। सिद्धार्थ भोसले प्रसिद्ध गायक श्री सुदेश भोसले के बेटे हैं। आप कैलिफोर्निया में संगीत की शिक्षा प्राप्त कर रहें हैं। सिद्धांत भोसले ने बहुत से प्रसिद्ध लोगों के साथ काम किया है जैसे शंकर एहसान लॉय ,सलीम सुलेमान ,सचिन जिगर ,शमीर टंडन, हरिहरन ,सुनिधि चौहान इत्यादि। ज़ी टीवी म्यूजिक कम्पनी ने सिद्धांत का गाना भी जारी किया है। जिसको लोगों ने बहुत पसंद किया है। लॉस एंजेलिस कैलिफोर्निया में इस सुरीले गायक से मिलने का और बात करने का मौका मिला। प्रस्तुत है इस रोचक बातचीत के मुख्य अंशः

आपके घर में संगीत का वातावरण था क्या इस बात ने संगीत के प्रति आपके रुझान को कितना प्रभावित किया ?

जी, सही कहा आपने मेरे घर में संगीत का माहौल था। मेरे घर के लगभग सभी कमरों में संगीत से जुड़ी चीजें रखी हुई है। मैं बहुत भाग्यशाली हूँ कि मै ऐसे वातावरण में बड़ा हुआ। मेरे घर के हर एक कमरे में अलग अलग संगीत बज रहा होता था जैसे फ़िल्मी संगीत,शास्त्रीय संगीत ,ग़ज़ल,और पाश्चात्य संगीत। मेरी मम्मी पियानो बजाती हैं। गिटार का पहला पाठ मुझे मेरे नाना जी ने और भारतीय शास्त्रीय संगीत का पहला पाठ मुझे मेरी दादी जी ने दिया था। तो ऐसे ही माहौल में मै बड़ा हुआ। मेरे चारों ओर संगीत ही संगीत बिखरा हुआ था।

आपने किस उम्र से गाना शुरूकिया था ?
मैने पांच साल की उम्र से पहले ही गाना शुरू कर दिया था। मुझे याद है कि जब मै पाँच साल का था तो पापा ने कहा कि मंच पर जाओ तुमको गाना है, उस समय फिजी आइलैंड में मैने अपनी बहन के साथ दोगाना (डुएट ) गाया था। जब में स्कूल में था तो मुझे याद है बड़े गुलाम अली साहब घर पर आये थे। मैने उनके सामने ग़ज़ल गाई था और आशा भोसले जी के सामने मैने “आ चल कर तुझे मै ले कर चलूँ ” गाया था। वह सुनती रहीं, इसी गाने में एक जगह ऊँचा सुर आता है जैसे हो मैने वह सुर लगाया आशा जी ने सर हिलाया और पापा को बोला “एकदम सुर आता है। ”

आपने अपनी बहन के साथ कौन सा गाना गाया था?

जी हमने मुसुम सुहासी गाया था, जो की शान जी का गाना है।

आप अपना गुरु किसको मानते हैं
जीवन की सभी शिक्षा के लिए मैं अपने माता पिता को अपना गुरु मानता हूँ। मंच पर दर्शकों के साथ कैसे बात करनी है उनको कैसे शामिल करना है यह सब मैने अपने पिता से सीखा है। मेरे पिता बहुत ही विनम्र इंसान हैं ऊंचाई पर पहुँचने के बाद भी उनमे जरा सा भी अभिमान नहीं है। ये सारी बातें मैं उनसे सीखना चाहता हूँ मैं उनके जैसा ही बनना चाहता हूँ।

 

 

क्या आप रियाज़ करते हैं ?
जी मैं हमेशा रियाज़ करता हूँ, और मेरी सोच में रियाज़ बहुत जरुरी है। जिस दिन मुझे लगेगा कि मुझे रियाज़ बंद करना है उसी दिन से मैं अच्छा गायक नहीं रहूँगा। जैसे मैँ गिटार बजता हूँ, गीत लिखता हूँ संगीत भी देता हूँ , इन सब के लिए भी अभ्यास बहुत ही जरुरी हैं। मुझे यह सब करने में बहुत ही आनन्द आता है। तो इसलिए जब भी मैँ अभ्यास करता हूँ बोर नहीं होता।

आपने अभी कहा कि आप गीत लिख रहे हैं और धुन भी बना रहें हैं। तो क्या आप अपना अल्बम निकालने की सोच रहे हैं?
मैं एक साल से सैनफ्रांसिस्को में संगीत की शिक्षा प्राप्त कर रहा हूँ। इसमें में गीत लिखना ,धुन बनाना ,पियानो बजाना और सगीत के सिद्धांत इत्यादि विषय आते हैं। यह सब सीख कर मैं अपना एक अल्बम निकालने की सोच रहा हूँ। अभी उसी पर काम चल रहा है। साथ ही साथ मैं बहुत सी फाइलों के लिए भी काम कर रहा हूँ पिछले साल मैने अपना पहला गीत रिलीज़ किया था जिसको मैने लिखा था व गाया भी था और संगीत भी दिया था था। ये ज़ी म्यूजिक कम्पनी ने रिलीज़ किया था। उन्होंने टीवी चैनल्स पर और उनके अपने यू टयूब चॅनल पर प्रसारित किया था। उस गाने का नाम है “तू ब्यूटीफुल है” l

आपने भारत में संगीत सीखा है और यहाँ भी सीख रहे हैं। दोनों जगह संगीत सीखने में आप क्या अन्तर पाते हैं ?
यहाँ आकर मैने जाना कि भारतीय संगीत कितना महत्वपूर्ण और विशेष है। यहाँ मेरे साथ बहुत से देशों के विद्यार्थी शिक्षा पा रहे हैं। उनको भी हमारा संगीत बहुत पसंद हैं क्योंकि हमारे संगीत में बहुत सी ऐसी बातें हैं जो यहाँ के संगीत में नहीं है। भारतीय संगीत सीखने के बाद यहाँ संगीत सीखना सरल हो जाता है। मैने भारतीय संगीत सीखा है तो पश्चात्य संगीत सीखना बहुत आसान हो जाता है अभी मेरा लक्ष्य है कि अपने संगीत को पूरी दुनिया के सामने लाया जाये। मैं यहाँ लॉसएंजेलिस के संगीतकारों के साथ मिल कर काम कर हूँ।

आपका हिंदी सिनेमा में अभी तक कोई गाना नहीं आया।
जी हिन्दी सिनेमा में मेरा कोई गाना नहीं आया है पर मैने बहुत सी मराठी फिल्मों के लिए गाया है। हिंदी में पार्श्व गायक की तरह मेरा पहला गाना एक कार्टून फिल्म बाल गणेश के लिए था इस फिल्म में मैंने हरिहरन जी के साथ एक दोगाना गाया था। उसके बाद मैने सुनिधि चौहान जी के साथ एक और कार्टून फिल्म में गाया था। पिछले वर्ष मैने शंकर अहसान लॉय और सलीम-सुलेमान के साथ उनके स्टूडियो में काम किया था।

सुदेश भोसले जी आपके पिता है तो एक प्रसिद्ध पिता का बेटा होना कितना लाभदायक है और कितना नुकसानदायक।
मेरी तुलना पापा से की जाती है। पर उसको मैं कोई गलत नहीं मानता क्योंकि मेरे पिता का गायकी में एक मुकाम है वहां तक पहुँचने के लिए मैं और अधिक मेहनत करता हूँ, ताकि मैँ उनको गौरवान्वित अनुभव करा सकूँ। मेरे पापा हमेशा कहते हैं कि “में चाहता हूँ कि लोग कहें की यह सिद्धांत के पापा है, ये न कहें कि यह सुदेश भोसले का बेटा है। ” लोगों को लगता है कि स्टार के बच्चे होने से रास्ते आसान हो जाते हैं पर ऐसा नहीं है। मेरे पिता सुदेश भोसले हैे, इसलिए शायद एक बार कोई मुझे पूछ लेगा पर उसके बाद सब कुछ मुझ पर ही निर्भर होगा। यदि मैं अच्छा नहीं गाऊँगा तो कोई मुझे दूसरा मौका नहीं देगा।

 

 

आपके पिता जी मिमिक्री बहुत अच्छी करते हैं। क्या आपने भी कभी ऐसा करने का सोच है?
जी हाँ मेरे पिता जी ने मिमिक्री और गायकी की एक नयी विधा को जन्म दिया है उनके जैसा कोई नहीं कर सकता। पर मैने कभी भी ऐसा करने के लिए नहीं सोचा क्योंकि दूसरों की आवाज़ में गाना एक कला है पर इसके फायदे के साथ साथ नुक्सान भी हैं। पापा ने बहुत सी परेशानियों का सामना किया है शायद इसलिए उन्होंने मुझे बचपन से कहा की अपनी ही आवाज़ में गाना। उनकी बात सही है पर मै सोचता हूँ कि मैं तो उनकी तरह कभी भी नहीं कर सकता। उन्होंने १४ आवाज़ों में गाने का एक शो भी किया था। उनके जैसी प्रतिभा किसी और के पास नहीं है।

बहुत से गायक और गायिका रियाज़ के साथ साथ खाने में भी परहेज़ करते हैं क्या आप भी खाने में परहेज करते हैं ?

जी हाँ मैं ठंडी चीजों से थोड़ा दूर ही रहता हूँ। बचपन से ही मुझको ठंडी चीजों की आदत नहीं थी।

क्या आप कोई वाद्य यंत्र बजाते हैं ?
मै गिटार और ड्रम बजाता हूँ। अपना संगीत बनाने के लिए आपको इंस्ट्रूमेंट बजाना तो आना ही चाहिए। मैं स्कूल में हमेशा ड्रम बजाता था।

बचपन से ले कर अभी तक क्या आपकी गायकी में कुछ बदलाव आए हैं ?
जब मैं तीसरी कक्षा में था तो हर ब्रस्पतिवार को मेरो टीचर असेम्ब्ली में मुझको भजन गाने के लिए कहती थी। उस समय मैं भजन और ग़ज़ल गाता था पर अभी मैं ज्यादा पॉप गाता हूँ ,अपना गीत लिखने में संगीत देने में थोड़ा व्यस्त हूँ ।

क्या आपने शास्त्रीय संगीत सीखा है ?

जी बचपन से ही मैने भारतीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की है। मुम्बई में मैने गुरु मोलाय बनर्जी के पास ,जो पंडित भीमसेन जोशी जी के शागिर्द थे और गुलाम मुस्तफा साहब जी के पास सीखा है। गुलाम मुस्तफा जी के शागिर्दों में सोनू निगम जी और हरिहरन जी भी शामिल हैं।

आपने किस घराने से ताल्लुक रखते है ?
मैने जो कुछ भी सीखा है वह आगरा घराना का है। मेरी दादी माँ इस घराने से थीं।

आपको कौन सा राग बहुत अच्छा लगता है ?
पिछले एक साल में मुझको एक बात का अनुभव हुआ है कि मैं राग यमन बहुत गाता हूँ। जब भी मैं रियाज़ करा रहा होता हूँ तो यमन में जो तीव्र सुर लगते हैं वो अपने आप आ जाते है और जब मैं धुन बनाता हूँ, तो राग यमन बहुत आ जाता है।

आप किस भाषा में गीत लिखते हैं ?

मैं हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में गीत लिखता हूँ। अंग्रेजी गाने अभी एक दो महीने में रिलीज होंगे।

(रचना श्रीवास्तव अमरीका में रहती हैं और वहाँ रह रहे भारतीय लोगोॆं की गतिविधियों पर नियमित रूप से लिखती हैं। )



Leave a Reply
 

Your email address will not be published. Required fields are marked (*)

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

सम्बंधित लेख
 

Back to Top