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सत्ताहीनता की बौखलाहट..

महोदय,

स्वतंत्र भारत में छह दशक से अधिक सत्ता का सुख भोगने वाली कांग्रेस की सत्ता से बाहर होने के कारण बैचेनी इतनी अधिक बढ़ गयी है कि वह मोदी सरकार पर सहिष्णुता व साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए उसे विनाशकारी बता रही है। यह कितने दुर्भाग्य का विषय है कि जब सोनिया मंडली ने 2004 में अल्पसंख्यक मंत्रालय बना कर हिंदुओं के राजस्व द्वारा संग्रहित कोष से अल्पसंख्यकों विशेषतः मुसलमानो को लाभान्वित करने के लिए अरबो रुपयो की योजनायें बनाने का असंवैधानिक कार्य किया, तब कोई धार्मिक भेदभाव व समाज का विभाजन नहीं हुआ था ?
यह कहाँ का नियम है कि राजस्व के नाम पर समाज का दोहन करें और उसी राजस्व से एक विशेष समुदाय को मालामाल किया जायें., क्या इससे दो समुदायो के बीच आपसी वैमनस्य और घृणा का बीजारोपण नहीं होगा ?
इसके अतिरिक्त आपको याद रखना होगा की सोनिया गांधी ने अल्पसंख्यकों के बहुमत वाली अपनी ‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ‘ से बहुसंख्यक हिन्दुओ को जन्म से ही दोषी बनाने का षड्यंत्रकारी प्रारूप (ड्राफ्ट) “साम्प्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक” ( 2011) तैयार करवाया था।जन सामान्य के भारी विरोध के बाद भी सोनिया की सरकार ने अंतिम समय तक इस विधेयक को पारित करने का भरसक प्रयास किया था जिससे बहुसंख्यक हिन्दू अपने ही देश में धर्मपरिवर्तन को विवश होता या फिर बंधक बनाया जाता।
उपरोक्त विचारणीय बिंदु एक स्वस्थ विचारधारा व सामान्य व्यक्ति को भी समझ में आ सकते है।अतः आज जो असहिष्णुता के नाम पर राष्ट्र में अशान्ति व अराजकता का वातावरण बनाया जा रहा है उसका एकमात्र उद्देश्य केवल मोदी सरकार द्वारा विकास के लिए किये जा रहे कार्यो में बाधा डालना व विश्व में भारत की पुनः बनती हुई प्रभावशाली छवि को धूमिल करना ही है।
अतः सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सभी राष्ट्रवादियों को एकजुट होकर विदेशी षडयंत्रो को सहयोग कर रहे देश के छदम् सेक्युलरो के चेहरो से पर्दा हटा कर उनकी वास्तविकता को उजागर करना होगा।

विनोद कुमार सर्वोदय
नया गंज,गाज़ियाबाद

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