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आपात्काल के अतिरिक्त कोई मार्ग नहीं

विश्व कोरोना के कहर से भयभीत है। कुछ लोगों के अनुसार यह चीन द्वारा प्रयुक्त जैविक हथियार है। कुछ लोग इसे दवा एवं वैक्सीन कम्पनीज् का पूर्व नियोजित षड्यन्त्र बता रहे हैं। कुछ इसे साधारण रोग बता रहे हैं, जो भी हो, इतना सत्य है कि यह रोग गम्भीर सावधानी के द्वारा ही रोका जा सकता है। सरकारों के प्रयासों को जन सहयोग मिलना अत्यावश्यक है। देश व संसार में अनेक देश पूर्णतः बन्द हैं। इधर तबलीगी जमात वाले कोरोना जिहादियों ने देश को बेहाल कर दिया है। हमारे प्रधानमन्त्री कोरोना पर नियन्त्रण के लिए गम्भीर हैं, संसार में उनकी ख्याति भी बढ़ रही है परन्तु सम्भवतः इस ख्याति से अभिभूत होकर वे अपना दण्डधर्म भूल गये हैं। वे हाथ जोड़ रहे है, व डंसने वाले विषधर सर्पों की चिकित्सा करा रहे हैं, उनसे विनती कर रहे हैं।

देश में गृहमन्त्री पता नहीं कहाँ हैं? उनकी कोई आवाज तक उनकी सुनाई नहीं देती। इन दोनों की जोड़ी दुष्टदमन के लिए प्रसिद्ध थी परन्तु CAA के विरोध ने इनकी वीरता को ऐसा भयभीत कर दिया है, कि ये जमातियों के विरुद्ध बोलने का साहस भी नहीं जुटा पा रहे, तब उनके विरुद्ध कार्यवाही करने का तो स्वप्न भी नहीं देख सकते। वे भयभीत हैं अथवा शान्ति का नोबल पुरस्कार पाने की अभिलाषा है, यह तो वे ही जानें परन्तु जमाती खुले हुड़दंग कर रहे हैं, कहीं छुपकर वार कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में योगी जी अवश्य साहस का परिचय दे रहे हैं। उन्हें देखकर कुछ और सरकारें उनका कुछ अनुकरण करने का प्रयास कर रही हैं। कांग्रेस आदि विपक्षी दल तो देश को बेचकर, तोड़कर भी तुष्टिकरण के लिए प्रसिद्ध हैं परन्तु मोदी जी व शाह जी तो तुष्टिकरण के विरुद्ध हुंकार भरते थे, आज इनकी हुंकार कहीं सुनाई नहीं देती। इन्होंने शाहीन बाग को सहा, खूनी दंगों को सहा परन्तु अपना पौरुष नहीं दिखाया।

योगी जी ने अपना प्रदेश अच्छा सम्भाला। मैंने तो तुष्टिकरण व भ्रष्टाचार की राजनीति को देख कर 15 वर्ष लगातार मतदान नहीं किया परन्तु जब मोदी जी प्रथम बार प्रधानमन्त्री पद के उम्मीदवार घोषित हुए, तब बड़ी आशा से 2014 में लोकसभा में मतदान किया। इन्होंने बहुत साहसिक कार्य किए थे परन्तु पिछले कुछ माह से इनकी शिथिलता वा कायरता से मन क्षुब्ध है। मान्यवर मोदी जी! आपको विश्व में सम्मान मिल सकता है, कोई बड़ा पुरस्कार भी मिल सकता है परन्तु उससे देशवासियों के प्राण नहीं बचेंगे? यदि कोरोना अमेरिका व यूरोप की भांति फैल गया, तो यहाँ बेचारे लाखों भारतीय मारे जायेंगे, इन सबका कलंक भी आपको ही मिलेगा। विपक्ष आपको तब अच्छी तरह घेरेगा। सैक्यूलरिज्म अच्छी बात है, सहनशीलता व शान्ति अच्छी बात है परन्तु जो शान्ति व सहनशीलता देश के लिए भावी घोर अशान्ति, असह्य पीड़ा व भयंकर रक्तपात लाती है, वह कदापि स्वीकार्य नहीं। ईश्वर करे ऐसा न हो परन्तु यदि ऐसा हो गया तो देश अराजकता की आग में धधक उठेगा, तब आपका सारा यश धूल घूसरित हो जायेगा। विदेशों को औषधि देना अच्छी बात है, मानवता है परन्तु यदि यहाँ जमातियों को कठोर दण्ड, जो केवल मृत्युदण्ड ही हो सकता है, न दिया गया, तो अपने भारतीयों के लिए दवा उपलब्ध करना असम्भव हो जायेगा? आप मन की बात में अपने मन की बात तो कर लेते हैं परन्तु देशवासियों के मन की बात कहाँ सुनते हैं? मैंने पिछले 5-6 वर्ष में अनेक पत्र लिखे, परिणाम शून्य रहा।

मान्यवर! आपसे विनम्र अनुरोध है कि आप इस देश को कोरोना जिहादियों से बचा लीजिये। इस समय आपसे ही आशा है अन्यथा देश आपको भी क्षमा नहीं करेगा। आपमें साहस है, बुद्धिमत्ता है, दूरदृष्टि है। इन सब गुणों का पूरा उपयोग करें, यदि इस अभागे तन्त्र में सम्भव न हो, तो कुछ माह के लिए देश में आपात् काल की घोषणा करके देश के शत्रुओं व उनके प्रत्यक्ष व परोक्ष संरक्षकों को कठोर दण्ड देकर कोरोना को समाप्त कर डालिए। ऐसा न हो कि इसमें देर हो जाये और देश ही स्वयं टूट जाये। मेरा सभी देशवासियों से अनुरोध है कि इस सन्देश को माननीय प्रधानमन्त्री व देश के गृहमन्त्री तक अपने-2 स्तर से पहुंचायें और देश से बचाने में सहयोग करें। सभी देशवासी साम्प्रदायिक, कथित जातीय, भाषा, प्रान्त एवं राजनैतिक मतभेदों को पूर्ण रूप से भुलाकर इसे प्रचारित करने का कष्ट करें।

साभार –https://vaidic-physics.blogspot.com/ से

 

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