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इम्तिहान डरकर नहीं, डटकर देने से मिलती है कामयाबी

राजनांदगांव। इन दिनों कालेजों में परीक्षाओं का दौर चल रहा है। हर छात्र या छात्रा के लिए पढ़ाई के दौरान एकाग्रता की कमी या उसका भय आम समस्या है। इस पर बहुत कारगर सुझाव देते हुए छह विषयों में स्नातकोत्तर,आरटीआई ओसीसी और क़ानून सहित मूकमाटी जैसे बहुचर्चित महाकाव्य पर डॉक्टरेट करअपनी अलग पहचान बनाने वाले दिग्विजय कालेज के राष्ट्रपति सम्मानित प्रोफ़ेसर डॉ. चंद्रकुमार जैन ने कहा है कि परीक्षा को भी एक उत्सव बनाया जा सकता है। इम्तिहान में डरकर नहीं, डटकर कामयाबी मिलती है।

डॉ. जैन ने दुर्ग-भिलाई ट्विन सिटी क्लब के गरिमामय एक्ज़ाम अलर्ट इवेंट में कहा कि परीक्षा में नींद नहीं उड़नी चाहिए बल्कि इतने आत्मविश्वास के साथ टाइम टेबल बनाकर पढ़ें कि परीक्षा की अवधि में भी पर्याप्त नींद ले सकें। तनावमुक्त रहें। सही खान-पान का ध्यान रखें। मोबाईल, सोशल मीडिया के अनावश्यक उपयोग से बचें। अपनी हर अच्छी तैयारी के लिए खुद को शबाशी दें। पढ़ाई के दौरान काम की चीजों को एक जगह पर व्यवस्थित रखें। अपने भीतर पढ़ाई का माहौल बनाएं।

डॉ. चंद्रकुमार जैन ने कहा कि परीक्षा के दौरान विद्यार्थी स्वयं को सुझाव देते रहें। पढ़ाई शुरू करने के पहले उसके महत्व और फायदों के बारे में लिख लें ताकि उसको देखते रहने से आपका मन भटके नहीं। जब आप पढ़ने बैठें तब कठिन विषय को पहले पढ़ें क्योंकि उस वक्त आप तरोताज़ा रहते हैं और एकाग्रता का स्तर ज़्यादा होता है। उन्होंने कहा कि योग या ध्यान का अभ्यास करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है। रिवीजन हेतु टाइम-टेबल बनाएँ। सरल नोट्स का उपयोग करें। एक ही प्रश्न के लिए बहुत सारी किताबों में न उलझें बल्कि किसी एक या दो अच्छी किताब से उसका उत्तर बार-बार पढ़कर तैयार करें।

डॉ. जैन ने कहा कि किसी प्रश्न को लेकर परीक्षा हाल में भी कोई संशय हो तो पूछने में हिचकिचाएं नही। तैयारी के समय भी अगर पुस्तकों से समाधान न हो तो योग्य मित्रों, प्राध्यापकों से मार्गदर्शन लेना चाहिए। लेकिन, अंतिम समय में रिवीजन करने से दूर रहें। बहुत से छात्र, परीक्षा हाल में घुसने से पूर्व और यदि कुछ समय बचा हो तो हाल के अंदर भी कुछ-न-कुछ पढ़ते या रिवीजन करते देखे जाते हैं। ऐसा नही करना चाहिए । ऐसा करने से आप तनाव ग्रस्त हो सकते है । आप डिप्रेशन में सब कुछ भूल जाने के शिकार भी हो सकते हैं।

आखिरकार डॉ. जैन ने कहा कि परीक्षा पूर्ण तरो-ताजगी के साथ तनाव रहित होकर देना चाहिए । अगर पढ़ाई जीवन निर्माण के लिए है तो परीक्षा उस निर्माण की अनिवार्य कीमत है, जिसे अदा करना जिम्मेदारी का ही दूसरा नाम है।



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