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हिंदी को सिर्फ पखवाड़ा नहीं, रोजमर्रा से जोड़कर देखने की जरूरत-डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव

हिंदी हमारे रोजमर्रा की भाषा है और इसे सिर्फ पखवाड़ा से जोड़कर देखने की जरूरत नहीं है। जरूरत इस बात की है कि हम इसके प्रचार-प्रसार और विकास के क्रम में आयोजनों से परे अपनी दैनिक दिनचर्या से भी जोड़ें। उक्त उद्गार लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने चीफ पोस्टमास्टर जनरल, उत्तर प्रदेश, लखनऊ कार्यालय में आयोजित हिन्दी पखवाड़ा के समापन और सम्मान समारोह में व्यक्त किये।

डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि संवेदना और अनुभूति के स्तर पर हिन्दी से हमारा जो लगाव है, वह अन्य किसी भाषा में नहीं हो सकता। हिंदी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल ही इसका असली सम्मान है। डिजिटल क्रान्ति के इस युग में वेबसाइट्स, ब्लॉग और फेसबुक व टविटर जैसे सोशल मीडिया ने हिन्दी का दायरा और भी बढ़ा दिया है।

सहायक निदेशक (राजभाषा) आर. के मिश्र ने कहा कि ने कहा कि हिंदी पूरे देश को जोड़ने वाली भाषा है और सरकारी कामकाज में भी इसे बहुतायत में अपनाया जाना चाहिये। सहायक निदेशक भोला शाह और ओम प्रकाश चौहान ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन राजभाषा सहायक डॉ. जेके अवस्थी ने किया।

हिंदी पखवाड़ा के दौरान चीफ पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के विजेताओं को निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने सम्मानित भी किया। निबंध लेखन प्रतियोगिता अधिकारी वर्ग में रोहिताश्व बाजपेई, अर्चना झा, निबंध लेखन प्रतियोगिता कर्मचारी वर्ग में में राम किशोर तिवारी, सुमन देवी, अर्पना वर्मा और अनुवाद एवं शब्द ज्ञान प्रतियोगिता में ऋषभ गुप्ता, मीनाक्षी जायसवाल, सारिका अवस्थी को क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राजभाषा हिंदी में सर्वोत्तम कार्य करने वाले पुष्पलता श्रीवास्तव, जुबैर इक़बाल, मीरा गोधवानी, दीक्षा यादव व लाल बहादुर यादव को नकद पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।

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