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अब बैंक के सामने से निकलने पर भी पैसे कटेंगे

रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के मार्गदर्शन में और मोदी जी के अच्छे दिनों को लाने के लिए काम कर रही सभी बैंकों ने तय किया है कि अब जो भी खाताधारक बैंक की शाखा के सामने से निकलेगा उसके खाते से भी पैसे कटेंगे। अभी यह तय नहीं किया गया है कि कितने पैसे कटेंगे, लेकिन सैध्दांतिक तौर पर सभी बैंक वाले इस बात पर राज़ी हो गए हैं कि इससे बैंकों की आमदनी भी बढ़ेगी, सड़कों पर लोग अवारागर्दी नहीं करेंगे और यातायात की समस्या भी सुधरेगी। पहले इसे कुछ बैंकों में लागू किया जाएगा इसके सफल होने के बाद देश की हर बैंक इसे लागू करेगी। इसके बाद इस प्रोजेक्ट को दुनिया के सभी देशों में सभी बैंकों को भेजा जाएगा। प्रायोगिक तौर पर कुछ बैंकों ने इस प्रक्रिया को चालू भी कर दिया है।

अपना नाम गोपनीय रखते हुए एक बैंक अधिकारी ने बताया कि जब से नोट बंदी हुई है बैंक में हमारा काम करना हराम हो गया है। लोग पैसे जमा कराने और निकालने तो कम आते हैं मगर नियमों को लेकर पूछताछ करने ज्यादा आते हैं। इधर रिज़र्व बैंक रोज नए नियम बनाने में इतनी व्यस्त है कि कई बार सुबह जो नियम बनाया जाता है दोपहर को ठीक उसका उल्टा नियम बना दिया जाता है। ऐसे में बैंक के अधिकारियों की मुश्किल ये हो जाती है कि हम सुबह एक खातेदार को एक नियम का हवाला देकर उसका काम नहीं करते हैं, दोपहर को नियम बदल जाने के बाद उसके पड़ोसी का वही काम करना पड़ता है। इस पर हमारा खातेदार झगड़ा करने आ जाता है कि तुमने हमारे साथ पक्षपात किया।

इन सभी झंझटों को लेकर हमने ये तय किया है कि अब कोई आदमी अगर बैंक के सामने से भी निकलेगा तो उसके खाते से 25 से लेकर 50 रु. काट लिए जाएंगे। हम एक ऐसा सॉफ्टवेअर बनवा रहे हैं जिसमें खातेदार का मोबाईल नंबर हमारी बैंक की किसी भी ब्रांच की रेंज में आने पर हमारे सर्वर को इसकी सूचना देगा और उसके खाते से पैसे कट जाएंगे। इसके बाद अगर कोई खातेदार पैसे कटने की शिकायत लेकर आएगा तो बैंक के अंदर आने पर उस पर जुर्माने के रूप में दुगुने पैसे कट जाएंगे, और जब वह हमारे अधिकारियों और कर्मचारियों से बहस करेगा तो जितनी देर बैंक में रहेगा उतनी देर एसटीडी मीटर के हिसाब से उसके पैसे कटते जाएँगे

बैंक अधिकारी का कहना था कि इसका फायदा ये होगा कि लोग फालतू घर से नहीं निकलेंगे और अगर घर से निकले भी तो बैंक के सामने से तो कतई नहीं निकलेंगे। इससे आने वाले समय में हमें बैंकों में लूटपाट करने वाले लोगों की पहचान करने में आसानी रहेगी। हम अपने सीसीटीवी कैमरों से उन लोगों के चेहरे अपने रेकार्ड पर लेंगे जो बैंक के सामने से निकलते दिखाई देते हैं। अगर कभी बैंक में डकैती पड़ी तो हम इन लोगों को शक के दायरे में लेकर पुलिस को इनके फुटेज सौंप देंगे।

घाघ बैंक अधिकारी ने उत्साहित होकर बताया कि इससे शहर की यातायात व्यवस्था भी सुधरेगी और बैंक में लोगों का आना ही बंद हो जाएगा, जिससे बैंक में कर्मचारियों को ताश खेलने और कैरम खेलने समय भी मिल जाया करेगा।

जब बैंक अधिकारी से पूछा कि इस तरह तो हर एक खातेदार लुट जाएगा फिर आपकी बैंक में लोग लेन-देन करेंगे ही क्यों, तो उस अधिकारी ने मासूमियत से जवाब दिया कि हम तो यही चाहते हैं कि लोग बैंक से लेन-देन बंद करे ताकि हम बैंक में आराम से रहें और हमारे कर्मचारी बैंक के समय में शादी, सगाई, बच्चों के जन्म दिन, सब्जी खरीदने, अस्पताल में बीमार को देखने जाने जैसे सामाजिक कार्यक्रमों में अपना समय दें। इससे सामाजिक समरसता भी बढ़ेगी और बैंक के कर्मचारियों और अधिकारियों का समाज में रुतबा भी बढ़ेगा।

इस अधिकारी से बात हो ही रही थी कि एक खातेदार इस बात की शिकायत कर रहा था कि वह तो रात को सपने में बैंक आया था और सुबह उठकर देखा तो 25 रु. कटने का एसएएमस आ गया। इस पर अधिकारी ने अकड़ दिखाते हुए कहा, मानते हो, क्या साफ्टवेअर बनाया है आदमी को सपने में भी चोरी करते पकड़ सकता है। अब कोई हम बैंक वालों को सपने में भी बेवकूफ नहीं बना सकता। इससे अच्छे दिन और क्या आएँगे?

एक दूसरे काउंटर पर एक आदमी शिकायत कर रहा था कि किसी ने दुश्मनी निकालने के लिए उसके खाते में 10 रु. दस बार जमा करवा दिए और मैं जब अपने पैसे निकालने आया तो मेरे खाते से 900 रु. ट्रांजिक्शन चार्ज के नाम पर काट लिए।



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