जैविक कृषि ही किसानों का आत्मनिर्भर बनाएगीः बिरला

कोटा। विक्रम संवत 2079 नव संवत्सर कोटा समेत सम्पूर्ण राजस्थान के किसानों के लिए बड़ा अवसर लेकर आया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश ‘‘भैयाजी‘‘ जोशी और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर की उपस्थिति में श्रीरामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र का लोकार्पण किया। गोयल प्रोटीन्स समूह के प्रयासों से यह हाड़ौती का पहला जैविक कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र है।

कैथून-सांगोद मार्ग पर जाखोड़ा ग्राम में निर्मित इस जैविक कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र के लोकार्पण समारोह को सम्बोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है तो जैविक कृषि को अपनाना ही होगा। जैविक कृषि भूमि की उर्वरता बढा गुणवत्तापूर्ण और शुद्ध उपज प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करती है। इसी कारण केंद्र सरकार का पूरा फोकस जैविक कृषि को बढ़ावा देने पर है। श्री रामशान्ताय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान जैसी संस्थाओं की अहम भूमिका रहेगी।

उन्होंने कहा कि अनुसंधान में भी सिद्ध हुआ है जैविक कृषि से प्राप्त शुद्ध आहार हमें अनेक बीमारियों से बचा सकता है। आयुर्वेदिक उपचार पद्धति में भी आमजन का विश्वास बढ़ा है। इस दिशा में जैविक कृषि एकमात्र विकल्प है जो बहुआयामी तरीकों से कृषकों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन सकती है। बिरला ने किसानों का आव्हान किया कि वे इस जैविक कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र का लाभ उठाएं। यहां से प्राकृतिक पद्धति से किसानी का प्रशिक्षण स्वयं भी प्राप्त करें और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करें। यदि हमें भविष्य के लिए अपनी भूमि को सहेजना है तो यह उस दिशा में एक प्रभावी कदम होगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश ‘‘भैयाजी‘‘ जोशी ने कहा कि रसायनिक खाद का उपयोग कर हमने अपनी जमीन को बंजर बनाया और अब उस छद्म विकास की कीमत चुका रहे हैं। हरित क्रांति ने खाद्यान्न संकट तो दूर किया है, लेकिन इसके दोष अब हमारे सामने आ रहे हैं। हम खाद-बीज के लिए दूसरों पर निर्भर हो गए। रसायनिक खाद और कीटनाशकों के उपयोग से स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ा और बीमारियां बढ़ती गई। भूमि की उत्पादकता घटी तो किसान बर्बाद होकर आत्महत्या को मजबूर हो गए।

कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि कृषि का क्षेत्र व्यापक है, इसलिए चुनौतियां भी व्यापक है। किसानों ने परिश्रम करके देश को कृषि उत्पाद की दृष्टि से समृद्ध बनाया है। आज भारत अनेक कृषि उत्पादों में पहले और कुछ में दूसरे क्रम पर है। केंद्र सरकार का प्रयास है कि आने वाले समय में उनमें भी हम पहले क्रम पर हों। रासायनिक खेती ने जमीन को अनुपजाऊ बनाया है। इससे जलवायु परिवर्तन का संकट खड़ा हुआ है। आज प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने, कृषि की लागत कम करने के लिए, शुद्ध आहार के जरिए बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए तथा कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए हमें जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर लौटना होगा। सरकार का प्रयास है कि भारत जैविक निर्यात की दृष्टि से पहले पांच देशों में शामिल हो।

गोयल प्रोटीन्स समूह के ताराचंद गोयल ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में केंद्र के प्रबंधक और शोध प्रमुख पवन के टांक, राजेश प्रजापति, विनोद तिवारी का सम्मान किया गया। इस दौरान लघु उद्योग भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री प्रकाशचंद, आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम, प्रांत प्रचारक विजयानंद, सह प्रचारक मुरलीधर, क्षेत्रीय सेवा प्रमुख मूलचंद सोनी, विद्या भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री शिवप्रकाश, भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय बीज प्रमुख कृष्ण मुरारी, पाथेय कण के संपादक माणकचंद, भारतीय किसान संघ के प्रांत संगठन मंत्री परमानंद, नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, नरेंद्र गोयल, त्रिलोक गोयल, विनोद गोयल, मोहनलाल जैन, छीतरलाल गोयल, अजय गोयल, पंकज गोयल मौजूद रहे।