Saturday, June 15, 2024
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सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण से ही बचेगी हमारी सांस्कृतिक धारा

भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और समृद्ध विरासत के संरक्षण की दिशा में समाज, संगठन एवं सरकार (व्यवस्था)अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं ।वर्ष 2014 के बाद राष्ट्रीय परिदृश्य पर बदलाव दिखाई देने लगा जब सरकार ने राष्ट्र के समृद्ध परंपरा, संस्कृति एवं सभ्यता के उन्नयन के दिशा में उर्जित स्तर पर काम किया ;एवं सांस्कृतिक विरासत को पहचान दिलाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई थी। वर्तमान सरकार देश (राज्य) के समृद्ध संस्कृति को लेकर संवेदनशील है, और वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक गौरव को बढ़ाने में बहुत सक्रिय है।

पिछली सरकारों के उपेक्षा के कारण राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत और देश से जुड़े महत्वपूर्ण स्थल विकसित एवं पुनर्जीवित से उपेक्षित थे; लेकिन संगठन एवं सरकार की सकारात्मक उपादेयता के कारण इन सांस्कृतिक स्थल एवं राष्ट्रीय विरासत को पुनर्विकसित करने की सक्रियता बढ़ाई गई है। सरकार के उपादेयता के कारण वाराणसी जिसे ‘ काशी ‘ और ‘ बनारस ‘ भी कहा जाता है ,भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में गंगा नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन नगर है। हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है ;इसके साथ बौद्ध और जैन धर्म में भी महत्वपूर्ण उपादेयता एवं प्रासंगिकता है। हिंदू संस्कारों में इसे “अविमुक्त क्षेत्र ” कहा जाता है ।वाराणसी संसार के प्राचीन धरोहरों में से एक है। बनारसी की संस्कृति का गंगा नदी एवं इसके धार्मिक महत्व की उपादेयता के कारण महत्वपूर्ण उपादेयता है।

भारत के कई महान दार्शनिक, कवि लेखक एवं संगीतज्ञ वाराणसी से आत्मा से जुड़े हैं; जिनमें स्वामी रामानंद एवं गोस्वामी तुलसीदास जिन्होंने हिंदू धर्म का पवित्र परम पूज्य ग्रंथ ” रामचरितमानस” लिखा था; एवं गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम प्रवचन “सारनाथ “में दिया था, जिसको वर्तमान सरकार पुनर्विकसित एवं पुनर्जीवित करने के क्रम में विश्वस्तरीय “काशी विश्वनाथ कॉरिडोर “और कई अन्य परियोजनाओं ने सांस्कृतिक नगरी की गलियों,घाटों और मंदिर परिषद का कायाकल्प किया है ।भारतीय धर्म ग्रंथों में बद्रीनाथ (उत्तराखंड), द्वारका( गुजरात) जगन्नाथ पुरी (उड़ीसा) एवं रामेश्वरम (तमिलनाडु) चार पवित्र धाम है, जिनको ‘ चार धाम सड़क परियोजना’ से सभी मौसम में सड़क संपर्क से जोड़ा गया है।

केदारनाथ को आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने व्यक्तिगत रूप से विकसित करवाया है। मोदी जी ने केदारनाथ परिसर में आदि गुरु शंकराचार्य, जो अद्वैत वेदांत के प्रणेता थे, की प्रतिमा का अनावरण किया, जो सभ्यता गत और सांस्कृतिक एकता की शाश्वत प्रतीक बनी रहेगी। मोदी जी ने अगस्त ,2020 में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया, जो आधुनिक भारत के इतिहास में ‘ अविस्मरणीय क्षण ‘ बन चुका है, जिसका 60 % काम पूर्ण हो चुका है ।

लेखक सहायक आचार्य हैं
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