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प्रशांत किशोर और काँग्रेस की राहें अब जुदा जुदा

चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के व्‍यवहार से कांग्रेस के कई आला नेता खुश नहीं है। उनका आरोप है कि उनकी ज्‍यादातर रणनीतियां टीम के सदस्‍य बना रहे हैं। उत्‍तर प्रदेश में कांग्रेस के प्रचार की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे एक वरिष्‍ठ नेता पिछले सप्‍ताह यह कहते सुने गए कि मीडिया में पार्टी की छवि खराब करने वाली रिपोर्ट्स के पीछे किशोर की टीम का हाथ है। जब उनसे पूछा गया कि पार्टी अब भी किशोर की सेवाएं क्‍यों ले रही हैं तो उन्‍होंने फीकी हंसी के साथ कहा, ”राहुलजी को पूछिए।”
इससे पहले कांग्रेस ने दूसरे चरण के चुनाव प्रचार की रूपरेखा प्रशांत किशोर को दूर रखकर बनाई थी। कांग्रेस का यूपी में दूसरे चरण का प्रचार अभियान गुलाम नबी आजाद ने दूसरे कांग्रेसी नेताओं के संग चर्चा के बाद तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार प्रशांत किशोर इस चर्चा में नहीं शामिल थे। प्रशांत किशोर को करीब एक साल पहले यूपी में 2017 में होने वाले विधान सभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी के चुनाव प्रचार की रणनीति बनाने का जिम्मा सौंपा गया था लेकिन अब उन्हें किनारे किया जा रहा है। हालांकि प्रशांत किशोर की टीम अभी भी जमीन पर सक्रिय है। प्रशांत ने ही कांग्रेस के लिए ’27 साल यूपी बेहाल’ और ‘किसान यात्रा’ जैसे कार्यक्रम किए हैं।
प्रशांत किशोर और कांग्रेस के बीच दूरियों की भनक उस समय ही लग गई थी जब राज बब्‍बर ने कहा था कि पार्टी ने किशोर को चुनाव का रणनीतिकार बनाने के लिए नहीं लिया है। बब्बर ने कहा, ‘प्रशांत जी हमारी पार्टी के रणनीतिकार नहीं हैं बल्कि उन्हें पार्टी की विचारधारा को आगे ले जाने के लिए रखा गया है। उसके लिए उन्हें नई तकनीकों के माध्यम से पार्टी को लोगों तक पहुंचाना है। आखिरकार में हमारी पार्टी के कार्यकर्ता हैं जो ग्रासरूट लेवल पर काम करते हैं। लोगों को नई चीजों को समझने में वक्त लगता है। लेकिन अब पार्टी में लोगों को समझ आ गया है कि किस शख्स का क्या काम है।’

साभार- इंडियन एक्सप्रेस से



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