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राजस्थान के चित्रकार कोटा,बूंदी चित्र शैली की विरासत को जिंदा रखे हैं शेख मोहम्मद लुकमान

हाड़ोती में पर्यटन की दृष्टि से काफ़ी कुछ होने के बावजूद भी अधिकांश विदेशी पर्यटक बूंदी की चित्रशाला में भित्तियों पर बने चित्रों को देखने के लिए विशेष रूप से आते हैं। बूंदी की यह चित्रशाला विश्व पर्यटन मानचित्र पर विख्यात है। कोन थे वो चित्रकार जिन्होंने अपनी कल्पनाओं से इस रंगबिरंगे स्वनिल चित्र संसार की रचना की। उन चित्रकारों की पीढ़ी के आज एक चित्रकार परिवार के सदस्य शेख मोहमद लुकमान कोटा के विज्ञान नगर में निवास करते हैं और पूर्वजों की चित्र परंपरा की विरासत को संभाले हुए हैं। 

कोटा -बूंदी शैली के चित्रकार लुकमान ने बताया कि उनके शेख परिवार के पूर्वज मुगल शासक बाबर के समय ईरान से आकर दिल्ली बस गए थे। उन्होंने अपनी ईरानी कला का पोषण करते ही यहां की देशी कला के सम्मिश्रण से एक नई शैली को जन्म दिया जो मुगल चित्र शैली के नाम से पुकारी गई। इसके पश्चात सम्राट अकबर के समय जब बूंदी – रणथंभोर के शासक राव दुर्जन के साथ संधि होने पर पूर्वज सवाईमाधोपुर आ कर बस गए। यहां उन्होंने ईरानी शैली के साथ राजपूत बूंदी शैली के साथ चित्रकारी की।आगे चल कर बूंदी में आ गए। यहां के कला प्रेमी हाड़ा शासकों द्वारा शेख चित्रकारों को प्रश्रय देते हुए उनके गुजारे के लिए माफी में भूमि और रहने के लिए आवास दिए। ये आवास आज भी बूंदी में मौजूद हैं। बूंदी के बाद शेख परिवार रियासत कल में ही कोटा आकर बस गए। बूंदी में चित्र बनाए जाने से बूंदी चित्र शैली का जन्म हुआ। जब चित्र कोटा में बनाए गए तो बूंदी से पृथक कोटा चित्र शैली का उदय हुआ। तभी से कोटा – बूंदी चित्रशेली प्रचलित हो गई।

लुकमान बताते हैं कि उनके पूर्वजों ने अन्य चित्रकारों के साथ – साथ बूंदी, कोटा के महलों, हवेलियों और जैन मंदिरों में चित्रकारी की थी। वह भी अपने पिता के साथ जाया करते थे और चित्र बनाते। धीरे – धीरे वह भी इस शैली की बारीकियों, रंग संयोजन, परिवेश आदि को समझने लगे और चित्रकला की इस शैली में दक्षता हांसिल करली। अपनी छ: पीढ़ियों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि क्रमश: विच्छु, अब्दुल्ला, शेख रहीम बक्श,इनके छोटे भाई कादर बक्श, शेख मोहम्मद उस्मान थे और वर्तमान में इनके पुत्र स्वयं शेख मोहम्मद लुकमान है। कोटा, बूंदी चित्र शैली के सुनाम धन्य परंपरागत चित्रकारों में कोटा के चित्रकार मोहम्मद लुकमान का नाम इस शैली में आज अकेला नाम है जो इस चित्र शैली को जिंदा रखे हुए है। इनका छोटे भाई मोहम्मद इरफान भी इनके साथ चित्रकारी करते हैं। इन्होंने कोटा पेलेस, अभेड़ा महल, रामपुरा जैन मंदिर, बारां जैन मंदिर, पालकिया हवेली, कोटा और बारां रेलवे स्टेशन, अनंत पुरा दरवाजा, कोटा की बोहरा समाज मस्जिद एवम गुना मस्जिद आदि में चित्रकारी का काम किया है। 

पेंटिंग बनाने की प्रक्रिया के संदर्भ में बताते हैं कि पेंटिंग में हाथ का बना देशी कागज और स्टोन तथा वेजिटेबल रंग काम में लाए जाते हैं। बारीक काम ऐसा जिसे लेंस से देखना पड़ता है को जीरो प्वाइंट के ब्रश से किया जाता है जिसे हाथों से गिलहरी के बालों से बनाया जाता है। चित्रों में सोने व चांदी के वर्क भी बारीकी से किया जाता है। हेलकारी एवम कथिर का उपयोग भी किया जाता है।

लुकमान ने बताया कि एक छोटी पेंटिंग बनाने में एक माह तक का समय लग जाता है और बड़ी पेंटिंग में उसकी साइज और काम के हिसाब से अधिक समय लगता है। आप मुख्यत: बारहमासा, राग रागनी, रागमाला, शिकार,प्रेम आधारित पेंटिंग बनाते हैं। आर्डर पर आपकी लगभग 70 से ज्यादा पेंटिंग्स विदेशों में अमेरिका,जर्मनी, हालैंड और भारत में बड़ौदा, बनारस, उदयपुर, जयपुर, मुंबई, अहमदाबाद आदि अन्य शहरों में जा चुकी हैं। 

 आपको चित्रकला के क्षेत्र में मिले अनेक पुरुस्कारों में भारतीय रेलवे बोर्ड द्वारा 12 जुलाई 2018 को स्टेशनों पर चित्रकारी प्रतियोगिता में इनको कोटा स्टेशन पर की गई चित्रकारी के किए तीसरा पुरुस्कार ( संयुक्त के रूप से) तीन लाख रुपए एवम प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया। आपको जिला, राज्य और राष्ट्र स्तर कई बार सरकार और विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2005 में राजस्थान पत्रिका द्वारा कर्णधार सम्मान, 2007 – 08 में राजस्थान सरकार द्वारा राज्यपाल तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा सम्मानित किया गया। आपने कई बार राष्ट्रीय हस्तशिल्प और हथकरघा द्वारा प्रायोजित हस्तशिल्प प्रदर्शनियों और राज्य व जिला स्तरीय प्रदर्शनियों में भाग लेकर करीब दो दर्जन से अधिक पुरुस्कार प्राप्त किए हैं। आपने ईरान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ऑन लाइन चित्रकला प्रतियोगिता में भी भाग लिया।

परिचय 
 शेख मोहम्मद लुकमान का जन्म 20 जुलाई1957 को कोटा में हुआ। आप विगत 40 वर्षों से पेंटिंग्स का कार्य कर रहे हैं। आपने हाई स्कूल तक शिक्षा प्राप्त की और केवल पेंटिंग्स से ही अपने परिवार का भरण -पोषण करते हैं। आपने कोटा एवम बनारस में स्पीक मैके की और से आयोजित कोटा चित्र शैली में प्रशिक्षण भी प्रदान किया। साथ ही राजस्थान सरकार द्वारा 2007 में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में 10 विद्यार्थियों को एक वर्ष का प्रशिक्षण भी प्रदान किया। जर्मनी के एक लेखक और चित्रकार के. डी.,क्रिस्टोफ ने उनकी पुस्तक” चित्रा मिनिएचर एवम वाल पेंटिंग” में इनकी चित्रकृतियों सहित इनका परिचय प्रकाशित किया है। एक विद्यार्थी चित्रकार मोहम्मद उस्मान शेख और मोहमद लुकमान पर पीएच. डी.के लिए शोध कर रहे है। लुकमान कहते हैं हम ने तो केवल चित्रकला पर आधारित जीवन निकाल लिया परंतु अब केवल इस पर निर्भर नहीं रहा जा सकता है इस लिए नई पीढ़ी को अब यह कला हस्तांतरित नहीं कर रहा हूं। आज चित्रकला अभिरुचि तक तो सही है पर निर्वाह के लिए माध्यम नहीं बन सकती है।

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