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परोपकार के मंच पर बरसी काव्य रसधारा

मुंबई। मुंबई की अग्रणी संस्था परोपकार ने समाजसेवा से लेकर संस्कृति, धर्म व साहित्य के क्षेत्र में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। परोपकार द्वारा इस वर्ष आयोजित कवि सम्मेलन स्वर्गीय प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति को समर्पित था। इस कवि सम्मेलन में सत्यनारायण सत्तन, कीर्ती काले, सुनील जोगी विनीत चौहान और प्रताप फौजदार जैसे कवियों ने रसिक श्रोताओं को अपनी समसामयिक, व्यंग्य, श्रृंगार और वीर रस की कविताओं से श्रोताओं का मनोरंजन भी किया तो भावविभोर भी किया। चुटकुलेबादी और फूहड़ हास्य की पहचान बु चुके कवि सम्मेलनों के इस दौर में इस कवि मंच से श्रोताओं को सही मायने में कविताओं का आस्वाद मिला। इस अवसर पर जाने माने टीवी अभिनेता और कवि शैलेष लोढ़ा को क लाख रुपये का परोपकार पुरस्कार भी प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन श्री सत्यनारायण सत्तन ने किया।

सुनील जोगी ने अटलजी को समर्पित अपनी कविता में अटलजी को श्रध्दांजलि देते हुए कहा-भारत माँ का मान निभाते वो संस्कारी थे, विस्फोटों के बीच मुस्कराते वो अटल बिहारी थे।

दिल्ली से आई श्रीमती कीर्ति काले ने बेटी की बिदाई पर लिखी मार्मिक कलविता सुनाकर श्रोताओ को पूरी तरह भिगो दिया।

भर भर आए नैन बिन नैना नहीं चैन

मन में उठा भूचाल बिटिया चली ससुराल

कहनी है बिटिया बात ये जरुरी तेरे बिना भी मैं अनिपट अधूरी

होने से तेरे मैं हो गई पूरी, तू मेरे जीवन की कस्तूरी

माँ की दुलारी बिटियास बाबा री प्यारी बिटिया कर दिया निहाल

याद है तेरी वो तुतलाती बोली

प्यारी प्यारी गुड़िया कि चुनर चोली

नन्हें हाथों की पहली रंगोली

भुले बिसरे वादों की खट्टी मीठी यादों की होली

कल तक तू मेरी गोदी में सोई रातों में बातों की लड़ियाँ पिरोई

नटखट अदाओं से कब तू सयानी हुई, राजा की रानी हुई

पल में बदल गए साल

बिटिया चली ससुराल

इसके बाद उन्होंने श्रृंगार की कविता को धरती और आसमान को रुपक बनाकर अद्भुत रचना प्रस्तुत की।

मद भरी रात को प्यार की बात को चाँदनी में नहाकर निखरने तो दो

मन सम्हालो सम्हालो सम्हालो …पिया

मेघ महुए से झरकर बिखरने तो दो

हल्का हल्का हवा में नशा छाएगा

धीरे धीरे से मीठा सुरुर आएगा

हौले हौले झुकेगा धरा पर गगन

हठ धरा का धरा ही रह जाएगा

वीर रस के कवि विनीत चौहान ने अपनी वीर रस की कविता से श्रोताओ में जोश भर दिया

फूल बनकर जो गिरा उसको यहाँ मसला गया, आदमी फौलाद में ढलना चाहिए

जो सेना पर पत्तथर फेंके लाल किलें लटका दो सेना को इनतना मत रोको सैनिक बागी हो जाएगा

ये धरती बढ़ती रहती है वीरों की शमशीरों से

जिनके शीश काटना थे उनसे हाथ मिला बैठे

प्रताप फौजदार ने बहुत ही मजेदार ढंग से अपने व्यंग्य बाणों से देश के राजनीतिक माहौल पर चोट की।

उन्होंने अटलजी को समर्पित कविता में कहा, कवियों की आन बान थे वो, मित्रता के लिए हिम कम शीतल, बैरियं के लिए तो अंगार थे अटल जी।

शेलेष लोढ़ा ने अपने सम्मान के प्रत्युत्तर में कहा कि हम समाज और परिवार में रहते हुए भी अपने ही लोगों से कटते जा रहे हैं। हम बच्चों से जो चाहते हैं वो उन्हें देते नहीं। मोबाईल से हमारी संवेदनाएँ मरती जा रही है। वाट्सप और फेसबुक ने हमसे हमारा ही समय छीन लिया है।

उन्होंने कहा सहजता थी सादगी थी जिंदगी थी

वाट्सप फेसबुक नहीं थे तो जिंदगी थी

कार्यक्रम में परोपकार के अध्यक्ष श्री शंकर केजड़ीवाल व संस्था के अन्य पदाधिकारियों ने सभी आमंत्रित अतिथियों का स्वागत किया। स अवसर पर आयकर विभाग के प्रमुख अधिकारी, भाजपा के नेता श्री राज के पुरोहित व मुंबई के व्यापारिक व उद्योग जगत के कई प्रमुख व्यक्ति उपस्थित थे।



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