आप यहाँ है :

कन्याकुमारी मन्दिर की पार्वती की प्रतिमा मंत्रमुग्ध कर देती है

दक्षिण शैली में खड़ी मुद्रा में श्याम पाषाण की पार्वती की शोभायमान प्रतिमा, लंबे हार, सुंदर नथ,चमकीली बार्डर वाली साड़ी धारण किए श्रंगारित देवी और कई बातियों वाले लटकते हुए प्रज्वलित दीपक दर्शनार्थी को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। गर्भगृह की कांति मन को अचंभित और आंखों को चकाचौंध कर देती हैं। ऐसा अद्भुत रूप है कन्याकुमारी के सागर के दांई ओर पार्वती को समर्पित ”कन्याकुमारी अम्मन मंदिर“ के मुख्य गर्भ ग्रह का।

दक्षिण शैली में बने इस विख्यात मन्दिर में कई गुम्बजों में गणेश, सूर्यदेव, अय्यपा स्वामी, काल भैरव, विजय सुंदरी और बाला सुंदरी आदि देवी-देवताओं की मूर्तियां विराजित हैं। इनके साथ – साथ मंदिर के अंदर मंदिर से जुड़े 11 तीर्थ स्थल हैं। अंदर के परिसर में तीन गर्भ-गृह, गलियारे और मुख्य नवरात्रि मंडप हैं। इन्हें एकदम से समझ पाना या रुककर देखना इतना आसान नहीं है क्योंकि अंदर से मंदिर की बनावट भूल-भुलैया सी प्रतीत होती है।

मंदिर परिसर में मूल-गंगातीर्थम नामक कुआं है जहां से देवी के अभिषेक का जल लाया जाता है। मंदिर की वास्तुकला द्रविड़ शैली की है जिसमें काले पत्थर के खम्भों पर गूढ़ और पेचीदा नक्काशी से सजाया गया है। देवी कुमारी मंदिर, कुमारी अम्मन मंदिर और भगवती अम्मन मंदिर के रूप में लोकप्रिय, इस मंदिर की शानदार वास्तुकला को पांड्यों द्वारा आकार दिया गया था और नायकों द्वारा पुनर्निर्मित किया गया था। मूलत: मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व की ओर है जो किसी समय में खुला रहता था परंतु अब प्रवेश उत्तरी द्वार से किया जाता है। पूर्व द्वार वर्ष में केवल पांच बार विशेष त्यौहारों के अवसर पर ही खुलता है।

कन्याकुमारी मन्दिर के पीछे प्रचलित कथानक के मुताबिक प्राचीन काल में राजा भरत ने अपने साम्राज्य को नौ बराबर हिस्सों में बांट कर दक्षिणी हिस्सा उसकी पुत्री कुमारी को दिया था। बानासुर इसकी सुन्दरता पर मुग्ध होकर इससे विवाह करना चाहता था। कुमारी ने शर्त रखी की वह उससे युद्ध करे और यदि युद्ध में जीत जाता है तो विवाह हो जायेगा। युद्ध में दैव्य शक्ति प्राप्त कुमारी ने बानासुर का वध कर दिया। कुमारी के नाम पर ही इस स्थान का नाम कन्याकुमारी हो गया और यह मन्दिर स्थापित हुआ।

मंदिर के दर्शन सुबह 4:30 बजे से 12 बजे के बीच एवं शाम 4 बजे से 8:30 बजे के बीच खुले रहते हैं। केरल राज्य में हिन्द महासागर, बंगाल की खाड़ी एवं अरब महासागर के संगम पर स्थित कन्याकुमारी देश का एक प्रमुख और विख्यात पर्यटक स्थल है। यह स्थल देश के उत्तर में प्रहरी बने हिमालय से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक की यात्रा का अन्तिम छोर है। तीनों समुन्दरो के संगम पर स्थित है। कन्याकुमारी का मन्दिर भारत के दक्षिणी छोर का आखिरी विख्यात मन्दिर है। मन्दिर के साथ – साथ सागर की उठती-गिरती लहरों को देखने और तटीय रेत का आनन्द उठाने के लिए वर्ष भर देश-विदेश के कोने-कोने से पर्यटक यहां पहुँचते हैं। मन्दिर के निकट ही सागर में विवेकानंद स्मारक और गुरूवलुर की प्रतिमा दर्शनीय हैं। केरल की राजधानी तिरुअंतपुरम से बस और टैक्सी से यहां पहुंचा जा सकता हैं। तिरुअंतपुरम देश के प्रमुख स्थलों से हवाई जहाज, रेल एवं बस सेवाओं से जुड़ा है।

image_pdfimage_print


सम्बंधित लेख
 

Back to Top