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कलम, वाणी और किरदार के सम्मान से आसान होती है ज़िन्दगी की राह – डॉ. चन्द्रकुमार जैन

राजनांदगाँव । प्रखर वक्ता और दिग्विजय कालेज के हिंदी विभाग के राष्ट्रपति सम्मानित प्राध्यापक डॉ. चन्द्रकुमार जैन ने कमला कालेज में यादगार अतिथि व्याख्यान दिया । उन्होंने सभागृह बड़ी संख्या में उपस्थित छात्राओं को अच्छा लिखने, बोलने और व्यक्तित्व निर्माण के अचूक सूत्र बताए ।

प्रारम्भ में प्राचार्य डॉ. श्रीमती सुमन सिंह बघेल के साथ अतिथि वक्ता और वरिष्ठ प्राध्यापकों ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया । स्वागत के बाद कलमा कालेज की हिंदी विभाग प्रमुख डॉ. बृजबाला उइके ने डॉ. जैन का परिचय देते हुए बताया कि भाषा, सम्प्रेषण और व्यक्तित्व विकास पर उनका यह व्यावहारिक और उपयोगी व्याख्यान आयोजित किया गया है जिससे छात्राओं को जानकारी के साथ-साथ कॅरियर की दृष्टि से भी प्रभावी सलाह मिल सके । उन्होंने डॉ. जैन की बहुआयामी उपलब्धि तथा योगदान को मील का पत्थर निरूपित किया ।

अध्यक्षीय आसंदी से प्राचार्य डॉ. सुमन सिंह बघेल ने कहा भाषा का सही ज्ञान और अभिव्यक्ति की शक्ति यदि अर्जित कर ली जाए तो जीवन की धारा बदल सकती है । इसके लिए उचित जिज्ञासा और समर्पित अभ्यास जरूरी है । उन्होंने कहा इस क्षेत्र में डॉ. जैन की विशेष पहचान के मद्देनजर यह व्याख्यान आयोजित किया गया है । उन्होंने छात्राओं को व्याख्यान का लाभ लेने की स्नेहसिक्त हार्दिक प्रेरणा दी ।

अतिथि वक्ता डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने अपने धाराप्रवाह संबोधन के साथ छात्राओं से सीधे संवाद की रोचक और काव्यमय शैली में कहा कि भाषा की सार्थकता तभी है जब जो कहा जाना है वह सही ढंग से कहा जाए और उसे उसी तरह समझा भी जाये जिस तरह उसे कहा गया है । कुछ कहने के लिए कुछ भी कह बैठना ठीक नहीं है बल्कि कुछ कहने को अर्थपूर्ण बनाने के लिए बहुत कुछ जानने और समझने के लिए तैयार रहना अहम बात है । इससे भाषा आपकी वाणी और व्यक्तित्व की पहचान बन जाती है ।

डॉ. जैन ने बताया कि प्रभावी सम्प्रेषण एक कला, विज्ञान और गहरे अर्थ में साधना भी है । व्यक्तित्व आडंबर से नहीं गुणवत्ता की आदत से बनता है । दिखना व्यक्तित्व का आवरण है लेकिन भीतर से वैसा होना उसकी उपलब्धि है । तामझाम का व्यक्तित्व धीरे-धीरे खो सकता है किंतु ईमानदारी की शख्सियत की उम्र बड़ी लंबी होती है । डॉ. जैन ने कहा लिखना,बोलना और उसे लोगों का तज़ुर्बा बना देना संभव है । जरूरत इस बात की है कि हम कलम, वाणी और किरदार वालों का दिल से सम्मान करना सीखें । इससे आगे की राहें खुद ब खुद साफ होती जाएंगी ।

कार्यक्रम के दौरान प्राध्यापकगण और स्टाफ के सहयोगियों सहित अनुशासित छात्राओं की शानदार मौजूदगी ने जिले के गौरवशाली संस्थान कमला कॉलेज के इस प्रसंग में चार चांद लगा दिया।



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