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पीयूष गोयल ने पूछा, मीडिया वालों के पास पैसा कहाँ स आता है

ये सवाल भले ही रेल मंत्री पीयूष गोयल ने पूछा हो, लेकिन जवाब वाकई में देश जानना चाहता है। हर कोई जानना चाहता है कि मीडिया हाउसेज के पास पैसा कहां से आता है, कितना आता है। ये सवाल रेल मंत्री पीयूष गोयल ने मशहूर टीवी पत्रकार दिबांग से एक प्रोग्राम में तब पूछा जब दिबांग लोकमत के एक शो में उनका इंटरव्यू कर रहे थे। बाद में दिबांग के सवाल और अपने जवाब को पीयूष गोयल ने ट्विटर पर शेयर कर दिया। जिसके अब तक सैकड़ों रिट्वीट हो चुके हैं।

दरअसल लोकमत समूह का एक कॉन्क्लेव कार्यक्रम था, दिबांग को पीयूष गोयल के इंटरव्यू की जिम्मेदारी दी गई थी। शो टीवी पर भी लाइव जा रहा था, और कई सारे दर्शक भी शो में मौजूद थे। दिबांग ने सवाल पूछा कि. कहा जा रहा है कि एक आकंड़ा चल रहा है कि 2019 के चुनाव में 34 हजार करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी चुनाव लड़ने के लिए, कितना सही है? तो इस पर पीयूष गोयल ने दिबांग के सहारे पूरी मीडिया को ही लपेटे में ले लिया। पीयूष गोयल ने जो जवाब दिया एकबारगी तो उस पर दिबांग भी लाजवाब हो गए, क्योंकि आमतौर पर हर पत्रकार जब भी चैनल की आय, या आय के साधनों के बारे में बात आती है, तो उस पर कुछ भी बोलना नहीं बन पाता है।

वैसा ही दिबांग के साथ भी हुआ। पीयूष गोयल ने जवाब में पहले तो चुटकी ली कि ये तो फेक न्यूज का एक उदाहरण है। बाद में कहा, कि इस हिसाब से एक लोकसभा सीट पर कम से कम 80 करोड़ रुपया खर्च होगा, अगर इतना पैसा एक सीट पर खर्च होने लग जाएगी तो अर्थव्यवस्था में बूम आ जाएगा। उसके बाद पीयूष गोयल ने मीडिया हाउसेज को भी निशाने पर ले लिया, शायद वो इस बात से भी गुस्सा थे कि उनकी किसी पुरानी कंपनी के हिसाब किताब को लेकर उन्हें भी मीडिया की एक रिपोर्ट नें घसीटा गया था।

पीयूष ने कहा, कि आपके एक दोस्त जो अब विपक्ष में बैठे हैं, उन्होंने आरोप लगाया था कि बीजेपी का 2014 में पांच हजार करोड़ का प्रचार बजट था (उनका इशारा शायद आशुतोष पर था)। हम लोग तो जो भी रेडियो, टीवी, प्रिंट या सोशल मीडिया पर खर्च करते हैं, उसका सारा ब्यौरा वेबसाइट पर होता है, थर्ड पार्टी ऑडिट होता है। मैं समझता हूं कि मीडिया को बताना चाहिए कि उनका पैसा किधर से आता है। क्यों वो लोग इलेक्शन के समय हमसे 10 गुना पैसा लेने लगते हैं। 200 रुपए प्रति सेकंड से दस हजार, बीस हजार और चालीस हजार रुपए दस सेकंड के चुनावों में लेने लगते हैं। उनसे सवाल क्यों नहीं होता? इतने में तालियां बजने लगीं। कुल मिलाकर शाय़द हर हिंदुस्तानी चाहता है कि मीडिया को भी अपने ऊपर लगे पेड न्यूज के आरोपों को धोने के लिए सारा ब्यौरा अपनी वेबसाइट पर डालना चाहिए।

साभार- http://samachar4media.com/ से



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