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राजस्थानी काव्यांजलि” में कविता पाठ एवँ कवियों का सम्मान

कोटा। सीएडी स्थित राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय में विश्व कविता दिवस एवं जल दिवस पर “राजस्थानी काव्यांजली” कार्यक्रम का आयोजन किया गया । अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकारण जितेन्द्र निर्मोही, मुख्य अतिथि जसवीर मीणा पुलिस उपाधीक्षक नगर निगम कोटा तथा अति विशिष्ठ अतिथि राजस्थान साहित्य अकादमी के सुधीन्द्र पुरुस्कार -2018 से सम्मनित राम नारयण मीणा “हलधर”, वरिष्ठ साहित्यकार विश्वामित्र दाधीच , गौरस प्रचण्ड, कृष्णा कुमारी, सीमा घोष तथा इरफान कादरी मौजुद रहे । वही मुख्य वक्ता महेन्द्र नेह रहे ।कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की आराधना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे जितेन्द्र निर्मोही ने कहा” कविता आज़ भी अपनी जगह प्रासंगिक है वैश्वीकरण और भूमंडलीकरण के इस युग में कविता आज़ भी संवेदना का पाठ पढ़ा रही है।कोरोना काल में इसकी उपादेयता को बहुत करीब से देखा गया और महसूस किया गया है। कवि तुलसीदास ने बालकाण्ड में उनके समय के कवियों , भूतकाल के कवियों और भविष्य में आने वाले कवियों की वंदना की है”!

समारोह के मुख्य अतिथि जसवीर मीणा पुलिस उपाधीक्षक नगर निगम कोटा ने कहा कि डा. दीपक श्रीवास्तव जी ने यह महत्वपूर्ण आयोजन करवा कर मुझे कोटा महानगर के विद्वान साहित्यकार बंधुओं से जोड़ने का प्रयास किया है। शिक्षक केवल अपने विद्यार्थियों को ही शिक्षा देता है कवि सारे समाज का शिक्षक है।इस करोना काल में विश्व कविता दिवस इसलिए भी प्रासंगिक हैं कि आज समाज को अनुशासन व संवेदनशीलता की बड़ी की बड़ी आवश्यकता है। करोना काल में कविताओं ने और समाज की प्रेरणा ने हमें अतिशय उर्जा दी। ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा देते हैं।

मुख्य वक्ता महेंद्र नेह ने कहा” विश्व कविता दिवस वर्ष1999 से प्रारंभ किया गया है तबसे ही कविता के महत्व की उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। राम नारायण मीणा “ हलधर “ ने कहा कि – “ स्त्रियों को जन्म लेने दो । उनके जन्म लेने से उर्वरा रहेगी॥ हमारे खेतो की मिटटी,स्त्रियों को खुलकर हंसने दो॥ उनकी खिलखिलाहट के रंगों से और मीठे हों, गेहूँ की बालियों में पक रहे दूधिया दाने ॥ स्त्रियों को गाने दो उनके समवेत सुरों से रीझकर बरसते हैं बादल, स्त्रियों को मुस्कराने दो , उनकी मुस्कान के रंगों को याद करके ही घर लौटते हैं संसार के सारे थके-हारे पुरुष । विश्वामित्र दाधीच ने प्रभु श्री राम पर गीत सुनाया । रतन लाल जी ने कहा कि – “ मनख जुण मे आयो छे तो मनख बणर ही रहे” । लोकनारायण जी ने भृतहरि पर गीत पढा । मुरली ने “ जे घर हो थारी भरतार , मजौ दुणों हो जातो री ।

इस अवसर पर काव्य साधना से कोटा महानगर का नाम वैश्विक पटल पर रोशन करने के लिये “ गेस्ट ऑफ ऑनर” राजस्थान साहित्य अकादमी के सुधीन्द्र पुरुस्कार -2018 से समानित राम नारायण मीणा “हलधर” समेत 21 कविओं को “ पुस्तकालय पदक” से कार्यक्रम के मुख्य अतिथी डीपुटी एस.पी . जसवीर मीणा साहब ने सम्मनित किया गया जिनमे पेशे से चिकित्सक एवं साहित्य सेवा मे समर्पित डा. के.के. श्रीवास्तव , डा. फरीद राजस्थानी के कवि किशन लाल वर्मा, मुरलीधर गौड , रतन लाल वर्मा एवं साहित्यकार जितेन्द्र निर्मोही , विश्वामित्र दाधीच,महेन्द्र नेह ,आनंद हजारी , गौरस प्रचण्ड, कृष्णा कुमारी, सीमा घोष, महेश पंचोली, नहुष व्यास, सलीम अफ्रीदी, प्रेम शास्त्री , मुरलीधर गौड,सुरेश पण्डित ,विष्णु शर्मा , लोकनारायण,के.बी.दीक्षित डा. रघुनाथ मिश्र “ सहज” एवं डा गोपाल कृष्ण भट्ट रहे। प्रेम जी शास्त्री एवं किशन जी वर्मा ने पुस्तकालय को स्वलिखित पुस्तकें भेंट की ।

विश्व जल दिवस को समर्पित जितेन्द्र निर्मोही द्वारा लिखित पुस्तक “ नीर की पीर” ( ध्वनि नाटक) का लोकार्पण किया गया डा. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि – लेखक ने अपनी बात को इस पुस्तक के माध्यम से आमजन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कहा कि जल के प्रति अभी भी समय है कि हम जागरुक हो जाये । जल बचायें । मेरी कृति इसी चिंता को लेकर लिखी गयी है । खेंतो मे , सार्वजनिक स्थलों पर , घरों मे पानी कैसे बचायें , इसमे वर्णित किया गया है इसी क्रम मे कहा कृष्णा कुमारी कमसिन ने कहा कि – जल की हमने की नही अगर हिफाजत आज कल कैसे सुन पायेंगे कल कल की आवाज़ । कार्यक्रम में युवा पाठकों ने स्वरचित रचनाएं सुनाई तथा अतिथि कवियों द्वारा कविता के मर्म को समझा। सञ्चालन नहुष व्यास ने किया। कार्यक्रम में डा.प्रितिमा व्यास , प्रिति शर्मा , योगेन्द्र सिंह , प्रशांत शर्मा मुकेश गौर समेत श्री अजय सक्सेना एवं नवनीत शर्मा ने कार्यक्रम का प्रबंधन किया ।———

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