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प्रवीण जैन की मुहिम रंग लाई राष्ट्रीय कोविड टीकाकरण की वेबसाइट 11 भारतीय भाषाओं बनी

भारत सरकार में कार्यरत अधिकारी अंग्रेजी की सेवा में अंग्रेजों से भी आगे हैं इसलिए भारत सरकार की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था अंग्रेजी में संचालित की जाती है और यह बात जगजाहिर है। हर सरकारी योजना और ऑनलाइन सेवा में भारत सरकार के अधिकारी अंग्रेजी थोपने से बाज नहीं आते हैं।

कोरोना काल में भी भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय अंग्रेजों को खुश करने के लिए 100 प्रतिशत कामकाज अंग्रेजी में कर रहा है और इस वैश्विक महामारी से बचने के सभी उपाय, दिशा-निर्देश, मोबाइल एप, वेबसाइट आदि केवल अंग्रेजी में तैयार करके जनता को परोसे जा रहे हैं।

कहने को हिन्दी भारत की राजभाषा है पर आपको बता दें कि भारत सरकार में कोई भी कार्य राजभाषा हिन्दी में नहीं किया जाता है, खानापूर्ति के लिए कुछ अंग्रेजी कागजों का हिन्दी अनुवाद फाइलों में चिपका दिया जाता है।

पर कुछ लोग धुन के पक्के होते हैं और हार न मानने की भावना उनमें कूट-कूटकर भरी होती है, ऐसे ही हैं युवा प्रवीण कुमार जैन जो मुंबई में रहते हैं और पेशे से एक सलाहकार व कंपनी सचिव हैं।

कोरोना काल में भारत सरकार द्वारा भाषाई आधार पर किए जा रहे भेदभाव के विरुद्ध वे सभी मंत्रालयों को लगातार लिख रहे हैं, आरटीआई आवेदन लगा रहे हैं। अकेले कोरोना काल में ही हिन्दी का झंडा बुलंद करने के लिए प्रवीण जैन लोक शिकायत पोर्टल पर 800 से अधिक शिकायतें और 300 आरटीआई आवेदन लगा चुके हैं।

राष्ट्रीय कोविड टीकाकरण की वेबसाइट कोविन www.cowin.gov.in भी सरकारी बाबुओं ने केवल अंग्रेजी में बनाई थी। आम जनता से किया जा रहा यह भाषाई भेदभाव प्रवीण जैन को रास नहीं आया और इसके विरोध में उन्होंने राष्ट्रपति जी, प्रधानमंत्री जी, स्वास्थ्य मंत्री जी से लेकर राजभाषा विभाग का दरवाजा खटखटाया। शिकायतें अनदेखी की जाती रही हैं, पर वे रुके नहीं। 10 शिकायतों और 4 महीने की मेहनत के बाद अंततः स्वास्थ्य मंत्री श्री हर्षवर्धन जी को 21 मई 2021 को घोषणा करनी पड़ी कि शीघ्र ही कोविन वेबसाइट 10-12 भारतीय भाषाओं में शुरू की जाएगी।

4 जून 2021 से कोविन वेबसाइट 11 भारतीय भाषाओं में शुरू कर दी गई है। वेबसाइट मूल रूप से अभी भी फिरंगी भाषा में खुलती है। मुख पृष्ठ पर दाहिने कोने पर ENGLISH लिखा हुआ है, ENGLISH पर टेप करने पर 11 भारतीय भाषाओं के नाम दिखाई देने लगते हैं जहाँ आप अपनी पसंद की भाषा चुन सकते हैं।

साभार- वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई
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