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हिंदू विरोधी इतिहास के झूठ की पोल खोलती पुरुषोत्तम नागेश ओक की पुस्तकें

पुरुषोत्तम नागेश ओक जी का खोज पूर्ण साहित्य. सभी पुस्तकें पेपरबैक संस्करण हैं। स्कूल कालिज और यूनिवर्सिटी मे जो इतिहास पढ़ाया जा रहा है वह वामपंथियों द्वारा गढ़ा है। उसका उद्देश्य आत्मसम्मान को नष्ट करना है. लुटेरों को महान बताने में वामपंथियों की विशेषज्ञता है.

एनसीईआरटी की पुस्तकों में दशकों से यह झूठ पढ़ाया जा रहा है कि मुगलों ने हिंदू मंदिरों का नवनिर्माण कराया।

जब आरटीआई लगा कर यह पूछा गया कि इसका संदर्भ (सबूत) दीजिए तो एनसीईआरटी ने कहा, इसके श्रोत का हमें भी पता नहीं है। यानी NCRT की पुस्तकों में तथ्य नहीं, लाल लंपटों की बकैती है, यह स्वयं एनसीईआरटी मान रहा है।

आजादी के बाद से ‘लाल टिड्डे इतिहासकारों’ के लिखे इसी तरह के गलत इतिहास को पढ़ाया जा रहा है, और यही झूठ पढ़ा कर तथाकथित सेक्यूलर नौकरशाही तैयार की जा रही है। राम मंदिर पर भी कोर्ट में कम्युनिस्ट इतिहासकार अपने लिखे झूठ का संदर्भ नहीं दे पाए थे। अदालत ने इनके लिखे इतिहास को तथ्य नहीं, विचार कहा था।
रोमिला थापर ने अपनी पुस्तक ‘भारत का इतिहास’ में लिखा कि वर्ण व्यवस्था का मूल रंगभेद था। जाति के लिए प्रयुक्त होने वाले शब्द वर्ण का अर्थ ही रंग होता है। जबकि सच्चाई इसके बिलकुल विपरीत है. सभी भाषाओं में अनेकार्थी शब्द होते हैं. वर्ण शब्द भी अनेकार्थी है. यहाँ वर्ण शब्द का अर्थ है चुनाव, गुण। औरंगजेब जैसे नरसन्हारक के गुण गाने वाले वामपंथी इतिहासकारों के फैलाए झूठ से बचने के लिए पढिए।

ओक जी का लेखन एक अद्वितीय प्रयास है एतिहासिक सत्य को जानने का।

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