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रेल्वे द्वारा सीनियर सिटिज़न का मज़ाक

रेल्वे ने सीनियर सिटिज़न की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए लोकल ट्रेनों में उनके लिए विशेष रूप से 14 सीटें रिजर्व करने का फैसला किया है । ये 14 सीटें 7-7 करके सेकंड क्लास के दो कोचों मे होगी , वो भी दीवार के ओर की अंदर की तरफ । यह ऊठ के मूह मे जीरे के समान है । इस आदेश से लगता है कि रेल्वे ने केवल अपनी कागज़ी कार्यवाही पूरी की है । 7 सीट तो अब भी रिजर्व है पर उन सीटों पर जवान यात्री  ही यात्रा करते है । सीनियर सिटिज़न तो डब्बे में घुसने की भी हिम्मत नहीं जुटा सकते ।

क्या रेल्वे ने ऐसी कोई ज्ञारंटी दी हे कि वह इस सुविधा को उपलब्ध करवाने के लिए कोई गार्ड या सिपाही होगा । यह तो केवल जनता कि वाह – वाही लूटने का ढकोसला है । और यह भी तय नहीं है कि यह सुविधा 24 घंटे रहेगी या आंशिक । मै रेल अधिकारियों को आव्हान करता हु कि वो वसई से चर्चगेट जाने वाली ट्रेन में सुबह के समय चढ़  कर दिखा दे , और चढ़ गए तो इन सीटों की ओर बढ़ कर बतादे , बैठने की बात तो बहुत दूर की बात है । इससे अच्छा होता विकलांगों की या महिलाओ की तरह एक छोटा डब्बा रिजर्व कर दिया जाता । ऊपर से यह नया फंडा कि सीनियर सिटिज़न यानि 65 वर्ष जबकि रेल्वे द्वारा ही सीनियर सिटिज़न कि उम्र को 60 वर्ष आँका जाता है । बैंक , इन्कम टेक्स , पोस्ट हर जगह सीनियर सिटिज़न के लिए 60 वर्ष कि उम्र को मान्यता प्राप्त है । रेल अधिकारियों से निवेदन है कि वो अपने आदेश की दोबारा समीक्षा करें व सीनियर सिटिज़न को उनकी जरूरत के अनुसार सुविधा प्रदान करें ।

अशोक भाटिया ,
सेक्रेटरी वसई ईस्ट सीनियर सिटिज़न असोशिएशन , वसई पूर्व
फोन न 9221232130 

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