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रायपुर : वनौषधि छत्तीसगढ़ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन : छह हर्बल कम्पनियों से हुआ अनुबंध

विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ को प्रकृति का विशेष वरदान मिला है। इसके गर्भ में जहां बहुमूल्य रत्न और खनिज संपदा भरी पड़ी है, वहीं धरती के ऊपर बेशकीमती वन आवरण से लदा हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ आदिवासी और वन बहुल राज्य है। वनों में हजारों प्रकार की जड़ी-बूटियां और वनौषधियां विद्यमान हैं। इनका उपयोग करके आदिवासियों के जीवन स्तर को बेहतर किया जा सकता है। श्री अग्रवाल ने ‘‘वनौषधि 2018 छत्तीसगढ़’’ पर यहां विज्ञान महाविद्यालय परिसर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागृह में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे।

दो दिवसीय राष्ट्रीय परिचर्चा सह संगोष्ठी का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य वनौषधि बोर्ड द्वारा किया गया। अध्यक्षता राज्य के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने की। विशेष अतिथि के रूप में वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री निवास राव मद्दी, क्रेडा अध्यक्ष श्री पुरन्दर मिश्रा, विधायक श्री बर्नाड रोड्रिग्स, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, संगठन मंत्री श्री पवन साय, सिंधी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री अमित जीवन, संस्कृत विद्यामण्डलम के अध्यक्ष स्वामी परमानंद, छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल के उपाध्यक्ष श्री केदार गुप्ता, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के.पाटिल, मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री भरत मटियारा शामिल हुए। औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह ने स्वागत भाषण और उपाध्यक्ष डॉ.जे.पी. शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

मुख्य अतिथि की आंसदी से श्री गौरीशंकर अग्रवाल ने कहा कि वनौषधि पादप बोर्ड ने पिछले दो दिनों में इनका उपयोग करने वाले कम्पनियों, किसानों और वैद्यराजों को एक साथ बिठाकर महत्वपूर्ण चर्चा की हैं। उन्होंने आशा प्रकट कि इस संगोष्ठी में वनों के संवर्धन, संरक्षण के साथ वनौषधियों के विनाश विहीन उपयोग में सफल होंगे। उन्हांेने कहा कि सगोष्ठी में मिले निष्कर्षों का राज्य सरकार स्वागत करेगी और उसका पालन किया जाएगा। श्री अग्रवाल ने सगोष्ठी में हुए एमओयू पर प्रसन्नता भी जाहिर की। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने कहा कि आज हर्बल मेडिसिन पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं। ऐसे ज्वलंत और सम-सामयिक विषय पर प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी आयोजन के लिए उन्होंने वन विभाग और औषधीय पादप बोर्ड को बधाई दी। उन्होने कहा कि निवेश प्रोत्साहन के सिलसिले में मैंने काफी दौरा किया है। उन्हांेने कहा कि जयपुर में आयोजित सम्मेलन में एक जानकार अर्थशास्त्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए खनिज और बिजली तो महत्वपूर्ण हैं। लेकिन इससे ज्यादा महत्वपूर्ण वहां की जंगलों में पाई जाने वाली वनौषधियां हैं। छत्तीसगढ़ का भविष्य इन वनौषधियों पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि हमें अन्य विषयों के साथ-साथ वनौषधियों के शोध और अनुसंधान पर ध्यान देना होगा। शोध पर ध्यान केन्द्रित नहीं होने से विकास एक तरह से थम जा जाता है। इसलिए विकसित देशों में ज्यादा ध्यान शोध और अनुसंधान पर ही होता है। श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 44 प्रतिशत जंगल का होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। छत्तीसगढ़ आने वाले 10 सालांे मंे इसे हर्बल राज्यों की श्रेणी में अग्रिम पंक्ति में खड़ा मिल सकता है।

कार्यक्रम के दोनो दिन 3 एवं 4 फरवरी 2018 को औषधीय पौधों के विभिन्न विषयों पर 19 प्रस्तुतीकरण हुए, 03 फरवरी 2018 को (07) हिमालया, डाबर, बिट्स पिलानी, एम्स, पिरामल, कैडिला, नाईपर एवं 04 फरवरी 2018 को (12) आर्गेनिक वेलनेस, आई.जी.के.वी., बिट्स पिलानी, कैडिला फार्मासेक्यूटिकल, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया, फ्लेमिंगों फार्मासेक्यूटिकल कंपनियों द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया गया। उक्त प्रस्तुतीकरणों के निष्कर्षों के आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य में औषधीय पौधों के क्षेत्र में नीति एवं कानून बनाने हेतु प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार को भेजा जावेगा।

कार्यक्रम में पोस्टर प्रेजेंटेशन किया गया जिसमें औषधीय पौधों के वैज्ञानिक प्रस्तुतीकरण किया गया। जिसमें 03 सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों में प्रथम स्थान डॉ. चंचल दीप कौर एवं विद्यार्थी रावतपुरा सरकार कालेज, द्वितीय स्थान अशिता गुप्ता रावतपुरा सरकार कालेज एवं तृतीय स्थान श्री वेश कुमार देशमुख एवं विद्यार्थियों शा. वी.वाय.टी.वाय. जी. कालेज दुर्ग को दिया गया। कार्यक्रम के दौरान कुल 06 कंपनियों से अनुबंध किये गये तथा कई अनुबंधों की कार्यवाही प्रारंभ की गई। बायो इनोवेट मुंबई द्वारा अर्जुन छाल खरीदने हेतु अनुबंध किये जाने की अनुमति दी गई, अदिला बायोटेक कोटा कंपनी द्वारा छत्तीसगढ़ में हर्बल उत्पाद बनाने वाली कंपनी स्थापित करने हेतु अनुबंध करने की सहमति जताई गयी है, औषधीय पौधों की नर्सरी, कृषिकरण के अनुबंध के लिए आर्गेनिक वेलनेस द्वारा किसानों से चर्चा की गई, जिसमें 1000 एकड़ क्षेत्र में कांटेªक्चुअल खेती करने का प्रस्ताव रखा गया।

हिमालया कंपनी द्वारा कच्चे वनौषधि उपजों के खरीदारी हेतु अनुबंध करने की सहमति दी गई । सिंघानिया बिल्डकान एवं आर्गेनिक वेलनेस द्वारा ज्वाईट वेन्चर हेतु मध्यान्ह भोजन योजना में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अनुबंध किया गया। ड्रग टेस्टिंग लैबोट्री एवं अनुसंधान केन्द्र द्वारा महत्वपूर्ण औषधीय पौधों के अर्क से ‘‘हर्बल एनर्जी ज्यूस’’ तैयार करने हेतु चर्च की गई एवं एथिक्स फार्मा एवं क्वालिटी काउसिंल ऑफ इंडिया के बीच एथिक्स फार्मा को जी.ए.पी. एवं जी.एफ.सी.पी. प्रमाणीकरण की एजेन्सी के रूप में प्राधिकृत करने की प्रक्रिया आरंभ की गई तथा 3200 पारंपरिक वैद्यों द्वारा जैव विविधता अधिनियम के तहत आईपीआर के तहत अनुबंध करने की चर्चा की गई जिसके उपरांत उनकी पारंपरिक चिकित्सा का उपयोग यदि दुनिया में किसी भी स्थान पर किया जाता है तो उसका लाभ उस वैद्य को प्राप्त होगा। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के 10 वैद्यों (श्री निर्मल अवस्थी, श्री राम प्रसाद निषाद, श्री मनहरण, श्री संत कुमार यादव, श्री मनवंता राम, श्री दशरथ राम, श्री जानकी प्रसाद, श्री राम विलास, श्री चिंता राम, श्री भागवत) का सम्मान किया गया, जिनकी उपचार पद्धति का पेटेंट बोर्ड द्वारा कराया जा रहा है।



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