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विक्रमोत्सव के मंच पर मालवी माच से जीवंत हुआ ‘राजा विक्रम’

भोपाल। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ द्वारा भारत उत्कर्ष और नव जागरण पर एकाग्र तीन दिवसीय विक्रमोत्सव-2021 दूसरे दिन खेल माच का ‘राजा विक्रम’ की प्रस्तुति पंडित ओमप्रकाश शर्मा के निर्देशन में हुई। ठेठ मालवा की लोक परम्परा माच पर आधारित यह नाट्य कला रसिकों को एक नये अनुभव से परिचय कराता है। पल प्रति पल बेढब जो नाटक का सूत्रधार भी है, दर्शकों को बांधे रखता है।150-200 वर्ष पुरानी मालवांचल की लोकनाट्य ‘माच’ परम्परा जो लोककथाओं पर आधारित होती है।

माच के खेल को ‘राजा विक्रम’ के माध्यम से उस्ताद कालूराम माच अखाड़ा, उज्जैन के कलाकारों द्वारा तैयार किया गया है। ‘राजा विक्रम’ माच की कथा उज्जैयनी के राजा विक्रम और रत्नागढ़ के सिकटराजा की बेटी चम्पादे पर गुथी गई है। माच के पूर्व रंग में माणक खम्ब की स्थापना-पूजन से एक जुलूस के रूप में आने, फिर जय-जयकार सलामी, गजल गायन के साथ बेढब की आमद होती है जो दर्शकों को बताता है कि आज इस मंच पर राजा विक्रम और चम्पादे की सवारी आने वाली है, इसलिये माच की रंग पम्परा अनुसार साफ-सफाई, छिडक़ाव और मालवी जाजम बिछाने के लिए भिस्ती व फर्रासन को बुलाकर व्यवस्था सम्पन्न करता है।

यहां माच का पूर्वरंग समाप्त होकर मूल नाट्यकथ पर आता है जिसमें राजा विक्रम की आमद होती है। बेढ़ब राजा से अपना परिचय देने का निवेदन करता है। राजा विक्रम अपना परिचय सुधि दर्शकों को देता है। एक राजा की विनयशीलता विक्रमादित्य को सम्राट बना देता है। लोककथानकों के अनुरूप सम्राट विक्रमादित्य, उत्तरदायी शासन, प्रशासन, न्याय व्यवस्था की स्थापना की थी जिसका परिचय भी इस नाट्य के माध्यम से मिलता है। राजा विक्रमादित्य का साहित्य, संस्कृति, संगीत, नाट्य, ज्ञान, विज्ञान, चिकित्सा आदि बहुविध क्षेत्रों के सर्वश्रेष्ठ रचनाकारों, सर्जकों, मनीषियों को हमेशा संरक्षण-समर्थन मिला, इसका जीवंत उदाहरण खेल माच राजा विक्रम है। पंडित ओमप्रकाश शर्मा का निर्देशन के साथ परिकल्पना एवं संगीत नाटक के अंत तक दर्शकों को बांधे रखने में सफल होता है।

निर्देशक का वक्तव्य
‘उस्ताद कालूराम माच अखाड़ा’ उज्जैन की माच परम्परा का प्रारंभ उस्ताद कालूराम जी ने किया था। दौलतगंज की माच परम्परा को लोकव्यापी बनाने में उस्ताद कालूराम माच अखाड़े का योगदान अद्वितीय है। वर्तमान में पंडित ओमप्रकाश शर्मा ‘उस्ताद कालूराम माच अखाड़ा’ को नई ऊँचाईयांँ प्रदान कर मालवांचल के लोकनाट्य माच को अक्षुण्ण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहे हैं। नवोदित कलाकारों को संस्था के माध्यम से प्रशिक्षण देकर माच की परम्परागत गायन शैली में दक्ष करने का भी कार्य किया जा रहा है।
पं. ओमप्रकाश शर्मा, निर्देशक

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